दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक को लेकर अचानक बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि क्या अब जहाजों से टोल वसूला जाएगा और अगर हां तो इसका असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जहां एक तरफ स्टेट ऑफ हॉर्मोज को लेकर पहले से ही तनाव चरम पर है। वहीं अब स्टेट ऑफ मलक्का का नाम भी इस बहस में सामने आ गया। स्टेट ऑफ हॉर्मोज वो जगह है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। हाल ही में ईरान की तरफ से यह चर्चा तेज हुई कि यहां से गुजरने वाले जहाजों पर फीस यानी कि टोल लगाया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो सोचिए तेल महंगा होगा, शिपिंग कॉस्ट पड़ेगी और सीधे असर पड़ेगा आम आदमी की जेब पर। यही वजह है कि पूरी दुनिया इस मुद्दे को लेकर सतर्क है। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से साफ कह दिया गया है कि ऐसी कोई खबर नहीं है। यह फेक न्यूज़ है।
स्टेट ऑफ मलक्का इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच से गुजरता है और इसे एशिया की लाइफ लाइन कहा जाता है। करीब 40% ग्लोबल ट्रेड यहीं से गुजरता है जिसमें तेल, गैस और जरूरी सामान शामिल हैं। अब जब हॉरर्मज में टोल की बात उठी तो इंडोनेशिया के फाइनेंस मिनिस्टर पुरब्या युधी सदेवा ने एक सवाल उठाया। क्या यह सही है कि हम इतने अहम रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से कोई चार्ज नहीं लेते? इस सवाल ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी। लेकिन अब इंडोनेशिया के विदेश मंत्री ने साफ कर दिया इंडोनेशिया ऐसा कोई टोल लगाने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया एक ट्रेंडिंग नेशन है और वो फ्रीडम ऑफ नेविगेशन यानी समुद्री रास्तों की आजादी का समर्थन करता है। सीधे शब्दों में मलक्का स्टेट में टोल लगाने का कोई प्लान नहीं है। अब इस मुद्दे पर सिंगापुर ने भी अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है।
स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। सिंगापुर के विदेश मंत्री वीविए ने साफ कह दिया है कि मलक्का और सिंगापुर स्टेट खुले हैं और फ्री रहने चाहिए। यानी इस पूरे इलाके के बड़े देश यह नहीं चाहते कि यहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई अतिरिक्त बोझ डाल दिया जाए। अब सबसे बड़ा सवाल कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? यहां आता है अंतरराष्ट्रीय कानून यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी। इस कानून के तहत दुनिया के सभी देशों के जहाजों को ट्रांजिट पैसेज का अधिकार है। खासकर समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट गुजरने की छूट है। किनारे पर मौजूद देश आसानी से टोल या रोक नहीं लगा सकते हैं। यानी नियम साफ है। मलक्का जैसे इंटरनेशनल चेक पॉइंट पर टोल लगाना आसान नहीं है। अब जरा कल्पना कीजिए अगर मलक्का स्टेट में टोल लग जाता है तो क्या होगा? पहला शिपिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी। दूसरा तेल और गैस महंगे हो जाएंगे।
Continue reading on the app
नॉर्वे ने शुक्रवार को कहा कि वह साल के आखिर तक संसद में एक बिल पेश करेगा, जिसके तहत 16 साल की उम्र तक बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाएगी। इस काम के लिए उम्र की पुष्टि करने की ज़िम्मेदारी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर डाली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर रोक लगाकर दुनिया में सबसे पहले इस दिशा में कदम उठाया था। इसके बाद कई यूरोपीय देश भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने एक बयान में कहा, "हम यह कानून इसलिए ला रहे हैं, क्योंकि हम ऐसा बचपन चाहते हैं जिसमें बच्चे सचमुच बच्चे बनकर रह सकें।
खेल-कूद, दोस्ती और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर एल्गोरिदम और स्क्रीन का कब्ज़ा नहीं होना चाहिए। बच्चों की डिजिटल ज़िंदगी को सुरक्षित रखने के लिए यह एक अहम कदम है। सरकार ने यह नहीं बताया कि किन ऐप्स को टारगेट किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के बैन में मेटा के ऐप्स जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक के साथ-साथ टिकटॉक, Snapchat, Google का YouTube और Elon Musk का X (पहले Twitter) भी शामिल हैं। नॉर्वे की अल्पसंख्यक लेबर सरकार ने कहा कि वह 2026 के आखिर तक संसद में अपना बिल पेश करेगी।
Continue reading on the app