अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में शांतिदूत की भूमिका निभाने की पाकिस्तान की चाहत का एक अनचाहा नतीजा सामने आया है। राजधानी इस्लामाबाद के साथ-साथ देश के सैन्य तंत्र का केंद्र माने जाने वाले रावलपिंडी को भी एक तरह से पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरी ओर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का भविष्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। यह स्थिति कोविड-काल के लॉकडाउन की यादें ताज़ा कर रही है और कारोबार व आमदनी के नुकसान के चलते लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। ब्रिटेन के न्यूज़ आउटलेट द गार्डियन ने बताया कि पाकिस्तानी राजधानी की सड़कें कई दिनों से खाली पड़ी हैं। सड़कों पर सिर्फ़ सेना और पुलिस की वर्दी पहने लोग ही नज़र आ रहे हैं। रिपोर्ट में शहर भर में बंद दुकानों, ठप पड़े पब्लिक ट्रांसपोर्ट और 'वर्क-फ़्रॉम-होम' के आदेशों का ज़िक्र किया गया है। कई लोगों को ऐसा लग रहा है, जैसे वे फिर से महामारी के दौर में लौट आए हों। फ़र्क बस इतना है कि "इस बार वजह कोई वायरस नहीं है," बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित बातचीत है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
इस्लामाबाद और पाकिस्तान के अधिकारियों ने VVIP ज़ोन में मुख्य सड़कों और बाज़ारों को सील कर दिया है, और 10,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। लेकिन प्रतिनिधिमंडलों के लिए कोई पक्का कार्यक्रम न होने के कारण, ये पाबंदियाँ अनिश्चित काल तक खिंच गई हैं। नूर खान एयरबेस और इस्लामाबाद के रेड ज़ोन के आस-पास के मुख्य इलाके बंद हैं, और दफ़्तरों का काम रिमोटली चल रहा है। शहरों को जोड़ने वाला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोक दिया गया है, जबकि सामान का ट्रांसपोर्ट 19 अप्रैल से रुका हुआ है। हालाँकि रावलपिंडी में कुछ भारी ट्रैफिक को थोड़ी-बहुत इजाज़त दी गई है, लेकिन इस्लामाबाद में ज़्यादातर जगहों पर आने-जाने की मनाही है। स्कूल कागज़ों पर तो खुले हैं, लेकिन कई यूनिवर्सिटी ऑनलाइन हो गई हैं।
लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा बुरा असर दोनों शहरों के मज़दूर वर्ग पर पड़ा है। 'द गार्डियन' ने बताया, "इस्लामाबाद और पास के रावलपिंडी में कई मज़दूर, जो फ़्लैट का किराया नहीं दे पा रहे थे, उन्हें शनिवार को एक सरकारी आदेश के बाद, बिना किसी सूचना के उनके हॉस्टल से निकाल दिया गया; और हज़ारों लोगों को जल्दबाज़ी में रहने के लिए कोई जगह ढूँढ़नी पड़ी। जैसे-जैसे वे बातचीत बार-बार नाकाम होती गई, गुस्सा और गहराता गया। एक हेल्थ ऑफिसर, अरीज अख्तर ने 'द गार्डियन' को बताया, "ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिंजरे में रह रहे हैं
आजकल कई लोगों को विवाह संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कभी अच्छे रिश्ते की तलाश में तो कभी करियर व कारोबर के चक्कर में उम्र निकलती जाती है, लेकिन सही समय पर विवाह नहीं हो पाता. कभी कुंडली नहीं मिल पाती तो कभी कोई दोष लग जाता है. ऐसे में अगर आप भारत के इन मंदिरों के दर्शन करेंगे तो आपकी जल्द ही योग्य जीवनसाथी की इच्छा पूरी होगी...
न्यूज़ीलैंड के पूर्व तेज-मध्यम गेंदबाज डग ब्रेसवेल पर काउंटी क्रिकेट खेलने से दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के क्रिकेट नियामक ने उन्हें कोकीन का इस्तेमाल करने के मामले में दोषी पाया। यह दूसरी बार है जब ब्रेसवेल प्रतिबंधित पदार्थ जांच में फंसे। इस फैसले के बाद वह नवंबर 2027 तक किसी भी अधिकृत क्रिकेट गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
यह मामला सितंबर में खेले गए काउंटी मुकाबले से जुड़ा है। 25 सितंबर को चेल्म्सफोर्ड में एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब और समरसेट के बीच डिवीजन एक मैच खेला गया था। इसी मुकाबले के दौरान ब्रेसवेल का नमूना लिया गया था।
लंदन की विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी से मान्यता प्राप्त लैब में जांच के बाद नमूने में कोकीन और उसके मेटाबोलाइट बेंजोयलेक्गोनिन की मौजूदगी पाई गई। ये दोनों पदार्थ टूर्नामेंट के दौरान प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेसवेल के पास इस पदार्थ के इस्तेमाल के लिए किसी तरह की चिकित्सीय मंजूरी नहीं थी। बाद में उन्होंने माना कि 24 सितंबर की शाम से लेकर 25 सितंबर की सुबह तक उन्होंने कोकीन का सेवन किया था। यानी मैच शुरू होने से ठीक पहले उन्होंने प्रतिबंधित पदार्थ लिया था।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने उनके खिलाफ डोपिंग नियमों के अनुच्छेद 2.1 और 2.2 के तहत कार्रवाई की। इसमें शरीर में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने और उसके उपयोग दोनों को उल्लंघन माना गया। क्रिकेट नियामक ने माना कि यह सेवन खेल प्रदर्शन बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं था, बल्कि नशे की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर नियमों के तहत उन्हें दो साल का प्रतिबंध दिया गया।
ब्रेसवेल ने इस सजा को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद मामले की सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। उनका निलंबन 24 नवंबर से प्रभावी माना गया है, जिस दिन उन पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। यह प्रतिबंध 23 नवंबर 2027 तक चलेगा। जांच अवधि के दौरान 25 सितंबर से 24 नवंबर के बीच उनके सभी परिणाम रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
डग ब्रेसवेल ने 2011 से 2023 के बीच न्यूज़ीलैंड के लिए 69 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे। उन्होंने दिसंबर में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी। बावजूद इसके यह प्रतिबंध लागू रहेगा और वह इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड या विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के अधीन किसी भी क्रिकेट गतिविधि से दूर रहेंगे। यह मामला क्रिकेट जगत के लिए एक बड़ा संदेश है कि संन्यास के बाद भी नियम उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रह सकती है।