बृजभूषण सिंह बोले- हम भार हैं तो बता दो:2027 या 2029 के चुनाव में दिखा देंगे, अब समझाने का वक्त नहीं
‘आज की सरकारों की नजरों में हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। हम अनुपयोगी लगते हैं। अगर किसी को ऐसा लगता है कि हम भार बन चुके हैं तो बस एक बार कह दो कि हमारी जरूरत नहीं। 2027 में कह दो। 2029 में कह दो। जब भी मन करे आकर कह दो। हम दिखा देंगे कि हमारी उपयोगिता है या नहीं।’ ये बातें कैसरगंज सीट से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गुरुवार को चुनौती भरे लहजे में कहीं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए सभी राजनीतिक दलों को खुली चेतावनी दी। बिहार के भागलपुर टाउन हॉल में गुरुवार को बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव के दौरान मंच से क्षत्रियों को नजरअंदाज करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा- अब समय ज्यादा समझाने का नहीं रह गया है। अब समय अपनी ताकत पहचानने का है। बृजभूषण ने कहा- ये हमारी गलती है कि जब-जब हमें दबाया गया, हम मौन रहे। यही वजह है कि हमें तवज्जो नहीं दी जाती। ये हमारी कमी है कि हम अपने महापुरुषों कुंवर सिंह, महाराजा देवी बक्श सिंह, झांसी की रानी, बिरसा मुंडा को उचित स्थान नहीं दिलवा सके। ‘आजादी का श्रेय कुछ लोगों तक सीमित कर दिया गया’ पूर्व सांसद ने कहा- देश की आजादी का श्रेय केवल कुछ लोगों तक सीमित कर दिया गया। कई क्रांतिकारियों को नजरअंदाज किया गया। झांसी की रानी, कुंवर सिंह, महाराजा देवी बक्श सिंह, बिरसा मुंडा, किसी को भी श्रेय नहीं दिया गया। सिर्फ एक ही नारा गूंजा- साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल। बृजभूषण ने एक दोहा पढ़ा- ‘नहीं पाप का भागी केवल व्याध, केवल जो तटस्थ है, जो मौन है, समय लिखेगा उनका भी अपराध।’ उन्होंने कहा- उस समय समाज का मौन रहना घातक साबित हुआ। ये हमारा अपराध है कि हम अपने महापुरुषों को उनका उचित सम्मान ना दिला सके। संविधान का श्रेय अकेले बाबा साहब को ही क्यों? बृजभूषण ने कहा- संविधान निर्माण को लेकर भी गलत धारणा बनाई गई। संविधान सभा में 242 सांसद थे, केवल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर नहीं थे। आज एक बार फिर बिहार की धरती पर खड़ा होकर जिम्मेदारी से कहता हूं कि उस समय संविधान सभा में बिहार के लोगों की संख्या सबसे अधिक थी। लेकिन, बिहारियों को श्रेय नहीं मिला। जिसको बुरा लगा हो, आओ चर्चा कर लो। ‘सरकारों की नजरों में आपका कोई अस्तित्व नहीं’ समाज से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए बृजभूषण ने कहा- अगर आप भगवान राम के बताए रास्ते पर चले होते, बप्पा रावल के बताए रास्ते पर चले होते या महाराणा प्रताप के रास्ते पर चले होते, तो आज आप अनुपयोगी न होते। आज सरकारों की नजरों में आपका कोई अस्तित्व नहीं है। ‘2023 में मेरे खिलाफ विश्वव्यापी षड्यंत्र हुआ’ अपने खिलाफ हुए विवादों का जिक्र करते हुए बृजभूषण ने कहा- 2023 में मेरे साथ एक विश्वव्यापी षड्यंत्र हुआ था, लेकिन मैं नहीं झुका। मैं सामने वाले को नहीं जानता था, लेकिन अपने आप को जानता था। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता का पढ़ी- “है कौन काम ऐसा जग में टिक सके आदमी के मन में… जिसने मरना सीख लिया है जीने का अधिकार उसी को।” इसके साथ ही उन्होंने हनुमान चालीसा की चौपाई भी पढ़ी- ‘जय हनुमान ज्ञान गुण सागर…’। उन्होंने कहा- रामधारी सिंह दिनकर को मानने वाला, बजरंगबली को पूजने वाला व्यक्ति कहां झुकेगा? वीर कुंवर सिंह का अनुयायी कहां झुकेगा? समय समझाने का नहीं, अपनी ताकत पहचानने का बृजभूषण ने अपने संबोधन के अंत में उन्होंने क्षत्रिय समाज से आह्वान करते हुए कहा- आज हमें अपनी कमी तलाशनी है। बल, बुद्धि और विद्या अर्जित करनी है। ये तीन चीज हर हाल में अर्जित करनी होंगी। समाज को न निराश होने की जरूरत है और न ही डरने की। यह समय ज्यादा समझाने का नहीं, बल्कि अपनी ताकत पहचानने का है। पहले भी दबदबा दिखाते रहे हैं बृजभूषण -------------------------------- भास्कर सर्वे… यूपी- 403 में से 256 सीटों पर भाजपा पहली पसंद:सपा को 135 सीटें; NDA के सहयोगी दलों को सबसे ज्यादा नुकसान यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर एप के सबसे बड़े सर्वे में फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। यूपी की 403 सीटों में 256 पर भाजपा पहली पसंद बनी। 135 सीटों पर सपा मजबूत दिख रही है। सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा की सहयोगी पार्टियों को होता दिख रहा है। ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा अपनी सभी 6 सीटों पर पिछड़ती दिख रही है। पूरी खबर पढ़िए
सपाइयों की पिटाई ने खोल दी ‘जातिवाद राजनीति’ की पोल, जानिए कैसे गाजीपुर में अखिलेश यादव के खिलाफ दिखा जनता का ‘खुला विद्रोह’
गाजीपुर में नाबालिग लड़की की मौत के बाद गाँव पहुँचे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को लोगों ने बाहर रोक दिया। यह अखिलेश यादव की 'जातिवाद राजनीति' के खिलाफ जनता का 'विद्रोह' है।
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