राजस्थान सरकार ने 2 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी को मंजूरी दी, 12.46 लाख लोगों को होगा फायदा
जयपुर, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, राज्य सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
इस बदलाव के साथ, 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जो 1 जनवरी, 2026 से लागू होगा।
इस फैसले से पूरे राज्य में लगभग 7.02 लाख कर्मचारियों और 5.44 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होने की उम्मीद है।
पंचायत समितियों और जिला परिषदों के कर्मचारियों को भी इस बढ़ोतरी के दायरे में लाया जाएगा।
आदेश के अनुसार, राज्य कर्मचारियों को संशोधित महंगाई भत्ता मई 2026 के वेतन के साथ नकद रूप में मिलेगा, जिसका भुगतान जून 2026 में किया जाएगा।
इसके अलावा, 1 जनवरी से 30 अप्रैल, 2026 तक की अवधि का बकाया कर्मचारियों के जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) खातों में जमा किया जाएगा।
दूसरी ओर, पेंशनभोगियों को बढ़ा हुआ महंगाई राहत नकद रूप में मिलेगा, जो 1 जनवरी, 2026 से लागू होगा, जिससे उन्हें तत्काल वित्तीय लाभ सुनिश्चित होगा।
यह फैसला राज्य सरकार की अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वित्तीय हितों और कल्याण की रक्षा करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, खासकर बढ़ती जीवन लागत के संदर्भ में।
महंगाई भत्ते में संशोधन करके, सरकार का उद्देश्य महंगाई से राहत देना और घरेलू खर्चों में सहायता करना है। इस बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर लगभग 1,156 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय बोझ पड़ेगा।
वित्तीय प्रभावों के बावजूद, सरकार ने कर्मचारियों के कल्याण और समय पर वित्तीय सहायता को प्राथमिकता दी है।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, जिससे यह 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया। यह संशोधन 1 जनवरी से लागू होगा, जिससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया राशि मिलेगी।
इस कदम से 1.17 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा होने की उम्मीद है और सरकार पर सालाना 6,791 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इस बढ़ोतरी से लगभग 49.19 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और 68.72 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा।
चूंकि संशोधित दर इस साल 1 जनवरी से प्रभावी होगी, इसलिए दोनों समूहों को पिछले महीनों का बकाया मिलेगा।
--आईएएनएस
एससीएच
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जम्मू-कश्मीर में स्टेटहुड पर सियासी संग्राम, उमर अब्दुल्ला को ‘शहजादा’ कहने पर गरमाई राजनीति
जम्मू-कश्मीर में स्टेटहुड को लेकर एक बार फिर सियासी तलवारें खिंच गई हैं. प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है. जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तंज कसते हुए कहा है कि अगर “शहजादा” जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बन गया है, तो क्या इसी वजह से राज्य को स्टेटहुड मिल जाना चाहिए? सुनील शर्मा का यह बयान उस वक्त सामने आया है, जब दो दिन पहले राजौरी में उमर अब्दुल्ला ने स्टेटहुड को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे.
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा था?
दो दिन पहले राजौरी के नौशेरा दौरे के दौरान उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था कि आपके वादे इतने हल्के हैं कि आप सुप्रीम कोर्ट, संसद और रैलियों में बड़े-बड़े वादे करते हैं और बाद में उनसे पीछे हट जाते हैं. उन्होंने कहा कि पहले वादा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर में डिलिमिटेशन होगी, फिर चुनाव होंगे और उसके बाद स्टेटहुड मिलेगा. लेकिन दो चुनाव होने के बावजूद अब तक राज्य को स्टेटहुड नहीं दिया गया है. डेढ़ साल बीत चुका है और लोग अब भी अपने वादे के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने बीजेपी से सवाल किया कि आखिर “सही समय” का मतलब क्या है और यह कब आएगा.
"शहजादा" बयान पर सियासी घमासान तेज
उमर अब्दुल्ला के इस बयान पर बीजेपी नेता सुनील शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें “शहजादा” करार दे दिया. उन्होंने कहा कि अगर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के परिवार का शहजादा मुख्यमंत्री बन गया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि जम्मू-कश्मीर को तुरंत स्टेटहुड मिल जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड सही समय पर ही मिलेगा और इसमें किसी तरह की जल्दबाजी नहीं होगी.
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सुनील शर्मा ने आगे उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले उन्हें अपने किए गए वादों का हिसाब देना चाहिए. खास तौर पर मुफ्त बिजली, मुफ्त गैस सिलेंडर, राशन और नौकरियों को लेकर किए गए वादों पर जवाब देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में इस समय सरकार नाम मात्र की है, कोई भी मंत्री जमीनी स्तर पर काम करता नजर नहीं आ रहा है और आम जनता के काम ठप पड़े हुए हैं.
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