पाकिस्तान में प्रॉपर्टी वैल्यूएशन कटौती से उजागर हुई रियल एस्टेट लॉबी की ताकत, टैक्स सुधारों पर सवाल
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) द्वारा प्रॉपर्टी वैल्यूएशन टेबल में हालिया संशोधन ने एक बार फिर देश में रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूत पकड़ और सरकार की प्रभावी टैक्स सुधार लागू करने की सीमित क्षमता को उजागर कर दिया है। यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में इस कदम को सरकारी जमीन मूल्यों को बाजार दरों के करीब लाने की कोशिश बताया गया था, लेकिन समय के साथ यह फैसला लगातार नरम पड़ता गया। इसमें कई बार बदलाव, स्थगन और रियायतें दी गईं।
संशोधित वैल्यूएशन, खासकर इस्लामाबाद में, 10 से 35 प्रतिशत तक कम कर दिए गए हैं। यह कटौती डेवलपर्स और बिल्डर्स के कड़े विरोध के बाद की गई। इससे पहले बढ़ाए गए मूल्यांकन को भी बाजार कीमतों से काफी कम माना जा रहा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि घोषित कीमतों और वास्तविक लेनदेन मूल्यों के बीच अंतर कम करने के बजाय ताजा संशोधनों ने इस खाई को और बढ़ा दिया है। इससे कम कीमत दिखाकर सौदे करने, टैक्स चोरी और बिना हिसाब-किताब वाले धन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन संशोधनों को चुनिंदा इलाकों तक सीमित रखने पर भी सवाल उठे हैं। पूरे देश में पारदर्शी तरीके से पुनर्मूल्यांकन करने के बजाय एफबीआर ने कुछ खास क्षेत्रों में ही बदलाव किए हैं। इससे यह धारणा बनी है कि वैल्यूएशन में बदलाव प्रभावशाली समूहों से बातचीत के बाद किए गए, न कि निष्पक्ष और आंकड़ों पर आधारित प्रक्रिया के तहत।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समस्या की जड़ पाकिस्तान की राजनीतिक अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट सेक्टर का गहरा दबदबा है। इसे देश के सबसे प्रभावशाली कारोबारी लॉबी में से एक माना जाता है, जिसकी पहुंच राजनीति, नौकरशाही और संस्थागत ढांचे तक है।
सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों की हिस्सेदारी के कारण इस क्षेत्र पर प्रभावी टैक्स लगाने की कोशिशों को बार-बार विरोध का सामना करना पड़ा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रियल एस्टेट पाकिस्तान में बिना टैक्स वाले या अवैध धन को खपाने का पसंदीदा माध्यम बना हुआ है। इससे उत्पादक निवेश की बजाय सट्टेबाजी को बढ़ावा मिलता है।
यह असंतुलन पाकिस्तान के लगातार कम टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात और अप्रत्यक्ष करों पर भारी निर्भरता की बड़ी वजह है, जिसका बोझ आम नागरिकों पर पड़ता है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गुजरात: एक दशक में मलेरिया के मामलों में 92 प्रतिशत की गिरावट, पॉजिटिविटी रेट भी कम दर्ज
गांधीनगर, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को बताया कि पिछले 10 सालों में मलेरिया के मामलों में लगभग 92 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर विभाग ने लगातार निगरानी और रोकथाम के प्रयासों पर जोर दिया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाने वाला यह दिन, मलेरिया नियंत्रण के बारे में जागरूकता बढ़ाने और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
इस साल की थीम मलेरिया खत्म करने का पक्का इरादा: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में प्रयासों को तेज करने पर केंद्रित है।
विभाग के अनुसार, ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में व्यापक उपाय लागू किए गए हैं। इनमें घर-घर जाकर निगरानी करना, बुखार की जांच करना, लार्वा-रोधी अभियान चलाना, निर्माण स्थलों का निरीक्षण करना, मजदूरों के खून की जांच करना और रुके हुए पानी के स्रोतों में लार्वा खाने वाली मछलियां छोड़ना शामिल है।
सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया की जांच और इलाज मुफ्त में उपलब्ध कराया जा रहा है।
अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में 1.81 लाख से ज्यादा बुखार के मरीजों की जांच की गई और पॉजिटिव पाए गए मरीजों को तुरंत इलाज दिया गया।
सभी जिलों और नगर निगमों में मलेरिया पॉजिटिविटी दर प्रति 1 हजार आबादी पर एक से भी कम दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप, गुजरात मलेरिया उन्मूलन फ्रेमवर्क के तहत कैटेगरी-2 से कैटेगरी-1 में आ गया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है और यह संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है, जो मुख्य रूप से साफ और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं।
इसके लक्षणों में तेज ठंड लगना, कंपकंपी के साथ बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना और बुखार उतरने के बाद बहुत ज्यादा पसीना आना शामिल हैं।
विभाग ने बचाव के उपायों को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शनियों, रैलियों, स्कूलों और कॉलेजों में शैक्षिक कार्यक्रमों, सोशल मीडिया, टेलीविजन और एफएम रेडियो के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाए हैं।
इन उपायों में पानी के बर्तनों को ढककर रखना, घरों के आस-पास पानी जमा न होने देना, खिड़कियों पर जाली लगवाना, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना और बुखार होने पर तुरंत खून की जांच करवाना शामिल है।
अधिकारियों ने आगे कहा, मलेरिया से बचाव का एकमात्र तरीका है - बीमारी का जल्दी पता लगाना और उसका पूरा इलाज करवाना।
--आईएएनएस
पीएसके
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