घर पर बना खाना क्यों माना जाता है सबसे अच्छा? जानिए कारण
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल बाहर का खाना जितना आसान और जल्दी मिलने वाला हो गया है, उतना ही लोगों की सेहत पर असर भी डाल रहा है। फास्ट फूड, होटल का खाना या पैक्ड फूड भले ही स्वाद में अच्छा लगे, लेकिन सेहत के मामले में घर का बना खाना हमेशा सबसे आगे रहता है।
इसका सबसे बड़ा कारण है ताजगी और शुद्धता। घर में खाना बनाते समय हम खुद सामग्री चुनते हैं। हम मौसमी और ताजी सब्जियां, साफ दालें, अच्छे अनाज और जरूरत के अनुसार मसालों का उपयोग करते हैं। हमें पता होता है कि हम क्या खा रहे हैं। वहीं बाहर के खाने में तेल, मसाले और सामग्री की गुणवत्ता पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता।
घर में खाना बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान हम खुद रखते हैं। बर्तन, रसोई और हाथ को साफ रखते हैं। लेकिन बाहर के खाने में यह तय नहीं होता कि सफाई का स्तर कितना अच्छा है। यही वजह है कि कई बार पेट की दिक्कतें बाहर का खाना खाने से हो जाती हैं।
घर में हम अपनी जरूरत के हिसाब से तेल, नमक और मसाले डालते हैं। अगर किसी को कम तेल वाला खाना पसंद है तो वह वैसा ही बन सकता है। लेकिन बाहर के खाने में अक्सर ज्यादा तेल, ज्यादा मसाले और ज्यादा नमक होता है, जो धीरे-धीरे शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
पोषण का संतुलन भी जरूरी होता है। घर के खाने में हम आसानी से दाल, सब्जी, रोटी, चावल और सलाद को संतुलित तरीके से शामिल कर सकते हैं। इससे शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। बाहर के खाने में अक्सर यह संतुलन नहीं होता, जिससे सेहत पर असर पड़ सकता है।
घर का खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, उसमें परिवार का प्यार भी जुड़ा होता है। जब कोई अपने हाथों से हमारे लिए खाना बनाता है, तो उसमें एक भावनात्मक जुड़ाव होता है, जो मानसिक सुकून भी देता है।
घर का खाना खाने से मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। क्योंकि इसमें हम जरूरत से ज्यादा तेल-चीनी या अनहेल्दी चीजों से बच सकते हैं। इसके अलावा, घर का खाना पचने में आसान होता है। बाहर का भारी और तला-भुना खाना पेट पर ज्यादा बोझ डालता है, जबकि घर का खाना हल्का और प्राकृतिक होता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिकी विदेश विभाग ने एयरस्पेस फिर से खुलने के बाद अमेरिकियों को ईरान छोड़ने की दी सलाह
वाशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है, क्योंकि मध्य पूर्वी देश ने आंशिक रूप से अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) फिर से खोल दिया है।
सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में, विदेश विभाग के कांसुलर मामलों के ब्यूरो ने अमेरिकियों से कहा कि वे स्थानीय मीडिया पर नजर रखें और देश से बाहर जाने वाली उड़ानों की जानकारी के लिए वाणिज्यिक एयरलाइंस से संपर्क करें।
इस सलाह में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक आर्मेनिया, अजरबैजान, तुर्किये और तुर्कमेनिस्तान के रास्ते भूमि मार्ग से भी ईरान छोड़ सकते हैं। हालांकि इसमें अफगानिस्तान, इराक या पाकिस्तान-ईरान सीमा क्षेत्र की यात्रा से बचने की चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था।
देश ने शनिवार को अपने पूर्वी हवाई क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए फिर से खोल दिया, जिससे हवाई अड्डों के आंशिक संचालन की शुरुआत हुई।
रविवार को ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक ब्रॉडकास्टिंग ने नागरिक उड्डयन संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि देश का हवाई क्षेत्र चार चरणों में फिर से खोला जाएगा।
इस बीच, बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है। सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की है…और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुके एक शासन को कुछ लचीलापन भी दिया है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई रोकने का मतलब दबाव कम करना नहीं है। उन्होंने कहा, “सैन्य और प्रत्यक्ष हमलों पर युद्धविराम है, लेकिन ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ जारी है और प्रभावी नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी है।”
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नाकेबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लीविट ने कहा, “हम इस नाकेबंदी के जरिए उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं… उन्हें रोज़ 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है,” और जोड़ा कि ईरान तेल निर्यात और भुगतान बनाए रखने में असमर्थ है।
इसके बावजूद, प्रशासन ने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है… और अंतिम निर्णय कमांडर इन चीफ के हाथ में होगा,” और उन्होंने छोटी समय-सीमा की खबरों को खारिज किया।
--आईएएनएस
पीएम
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