पहलगाम की आतंकी घटना पूरी मानवता पर हमला थी : यूके सांसद बॉब ब्लैकमैन
लंदन, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। यूके के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने बुधवार को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि जो आतंकवाद लोगों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाता है, वह पूरी मानवता पर हमला है।
भारत ने बुधवार को उस भयावह पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी मनाया, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 मासूम पर्यटकों की उनके धर्म की पहचान करने के बाद गोली मार दी थी। यह हाल के वर्षों की सबसे क्रूर नागरिकों पर हुए हमलों में से एक था।
ब्लैकमैन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “पहलगाम नरसंहार को एक साल हो गया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। पीड़ितों को उनके धर्म के आधार पर पहचाना गया और मार दिया गया। जो आतंकवाद लोगों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाता है, वह पूरी मानवता पर हमला है।”
भारत में ब्रिटिश उच्चायोग ने भी कहा कि यूके हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है और पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देता है।
ब्रिटिश उच्चायोग ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “आज हम पहलगाम में हुए उस भयावह आतंकी हमले को एक साल होने पर याद कर रहे हैं। हम पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हैं और उन सभी लोगों के साथ हमारी संवेदनाएं हैं, जो इससे प्रभावित हुए। यूके हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है। हम शांति और सुरक्षा के लिए साझेदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
यह हमला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ था, जिसमें 26 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस हमले को द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक हिस्सा माना जाता है।
आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर और ‘कलमा’ पढ़वाकर गैर-मुस्लिमों की पहचान की और उन्हें निशाना बनाया। मारे गए लोगों में 25 पर्यटक और एक स्थानीय पोनी (घोड़ा) चलाने वाला व्यक्ति शामिल था, जिसने पर्यटकों को बचाने की कोशिश की थी।
कई पीड़ित हाल ही में शादीशुदा थे और कुछ को उनके परिवार वालों के सामने ही बेहद करीब से गोली मार दी गई।
इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने 6 और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंक के बड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान: बलूच छात्रा के अपहरण के खिलाफ क्वेटा में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
क्वेटा, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में आम लोगों के जबरन गायब किए जाने के खिलाफ बुधवार को प्रांतीय राजधानी क्वेटा में बोलान मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने कॉलेज के बाहर धरना दिया। उन्होंने छात्रा की सुरक्षित वापसी की मांग की, जिसे कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उठा लिया है।
बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने मंगलवार को क्वेटा में बीएमसी के गर्ल्स हॉस्टल से खदीजा बलूच को जबरन उठा लिया और किसी अज्ञात जगह पर ले गए। उनके गायब होने के बाद से अब तक उनके परिवार या दोस्तों को उनकी हालत या लोकेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
बीवाईसी ने कहा, “यह विरोध प्रदर्शन जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को खत्म करने और राज्य को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग है। साथ ही खदीजा बलूच की तुरंत और सुरक्षित रिहाई की भी मांग है।”
कमेटी ने यह भी कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। पाकिस्तानी राज्य लंबे समय से बलूच परिवारों के खिलाफ जबरन गायब करने को सजा के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। इसमें छात्र, पत्नियां, बेटियां और पहले से पीड़ित लोग तक निशाना बनते हैं। खदीजा, जो पहले ही विधवा हैं, अब इसी सिस्टम की शिकार बनी हैं।
बीवाईसी ने बलूचिस्तान के लोगों से अपील की कि वे इस कथित दमन के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।
बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी छात्रा को शैक्षणिक संस्थान के अंदर से उठाया जाना “मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन” है और यह दिखाता है कि अब पढ़ाई की जगहें भी खासकर महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गई हैं।
बीडब्ल्यूएफ ने कहा, “यह घटना एक डरावनी सच्चाई को सामने लाती है कि अब शैक्षणिक संस्थान भी सुरक्षित नहीं हैं। हॉस्टल के अंदर से एक छात्रा का उठाया जाना कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि यह उस माहौल को दिखाता है जिसमें बलूच महिला छात्राएं डर और असुरक्षा के बीच पढ़ाई कर रही हैं।”
फोरम ने छात्रों के इस विरोध का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि अगर इस मामले में चुप्पी, देरी या लापरवाही जारी रही, तो लोगों का गुस्सा और बढ़ेगा और कानून और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठेंगे।
बीडब्ल्यूएफ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक संस्थाओं से अपील की कि वे इस मामले पर तुरंत ध्यान दें, चुप्पी तोड़ें और न्याय, जवाबदेही और बलूच महिला छात्रों की सुरक्षा के लिए दबाव बनाएं।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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