नेपाल के लुंबिनी प्रांत में दलित कल्याण बिल को मंजूरी; मुफ्त इलाज, सस्ते कर्ज और छात्रावास का प्रावधान
काठमांडू, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल में दलित अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए पहले से राष्ट्रीय कानून है, लेकिन अब लुंबिनी प्रांत दलित समुदाय के जीवन और भलाई को बेहतर बनाने के लिए एक बिल पास किया है। ऐसा करने वाला यह देश का पहला प्रांत बन गया है।
लुंबिनी प्रांत की इस नई पहल में खास तौर पर दलितों के लिए घर, इलाज और शिक्षा जैसी सुविधाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है।
लुंबिनी के अलावा नेपाल में छह और प्रांत-कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम हैं। नेपाल के संविधान के मुताबिक प्रांतीय और स्थानीय सरकारें अपने कानून बना सकती हैं, बस उन्हें ये ध्यान रखना होता है कि वे केंद्र के कानूनों के खिलाफ न हों।
इस बिल में दलित परिवारों के लिए घर की व्यवस्था करने की बात कही गई है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर दलित छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दौरान हॉस्टल की सुविधा देने का भी प्रावधान है। साथ ही सरकारी, निजी और सामुदायिक स्कूलों और विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में दलित छात्रों को प्राथमिकता देने की बात भी शामिल है।
इस बिल के तहत गरीब दलित नागरिकों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुफ्त सुविधा देने का वादा किया गया है, जैसा कि प्रांतीय सरकार तय करेगी। इसके अलावा, दलितों के पारंपरिक कामों को बचाने, आगे बढ़ाने और आधुनिक बनाने के लिए मशीनों, औजारों और कच्चे माल पर सब्सिडी, छूट और सस्ते कर्ज देने का भी प्रावधान है।
प्रांत के सामाजिक विकास मंत्री जनमजय तिमिल्सिना ने इस प्रस्ताव को विधानसभा में पेश किया था, जिसे सभी सदस्यों ने मिलकर मंजूरी दे दी।
मंत्री तिमिल्सिना ने कहा, इससे दलित समुदाय के मानव अधिकार और सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी। साथ ही सरकार के हर स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक में मौका मिलेगा। इससे आर्थिक संसाधनों और अवसरों तक उनकी बराबर पहुंच भी सुनिश्चित होगी।”
लुंबिनी प्रांतीय विधानसभा के प्रवक्ता लोकमणि पांडे ने आईएएनएस को बताया कि गवर्नर की मंजूरी मिलने के बाद यह बिल कानून बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें दलित समुदाय के लिए कई तरह की सुविधाएं शामिल हैं।
2021 की जनगणना के मुताबिक, लुंबिनी प्रांत की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी 14.30 प्रतिशत है। पूरे नेपाल में यह समुदाय करीब 13.44 प्रतिशत है, जो लगभग तीन करोड़ की आबादी का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 30 मार्च को अपनी 100-दिवसीय कार्ययोजना में घोषणा की कि वह ऐतिहासिक अन्याय के लिए दलित समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेगी और इन समस्याओं को दूर करने के लिए सुधार-उन्मुख कार्यक्रम शुरू करेगी।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चौथी तिमाही में एसबीआई लाइफ का मुनाफा घटा, प्रीमियम इनकम में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी
मुंबई, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (क्यू4) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा (पीएटी) करीब 1 प्रतिशत घटकर 804.64 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 813.5 करोड़ रुपए था।
हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा करीब 40 प्रतिशत बढ़ा है, जो तीसरी तिमाही के 576.74 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
जबकि, कंपनी की नेट प्रीमियम इनकम साल-दर-साल 16 प्रतिशत बढ़कर लगभग 27,684 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 23,860 करोड़ रुपए थी। इससे कंपनी के कारोबार में अच्छी बढ़त का संकेत मिलता है।
हालांकि, कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो घटकर 190 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 196 प्रतिशत था।
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी की पर्सिस्टेंसी (पॉलिसी जारी रहने की दर) में सुधार देखने को मिला है।
शेयरधारकों के खाते में ट्रांसफर की गई राशि भी बढ़कर चौथी तिमाही में 2.36 लाख करोड़ रुपए हो गई, जो पिछली तिमाही में 1.94 लाख करोड़ रुपए थी। यह बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन को दर्शाता है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी की ग्रॉस प्रीमियम इनकम 27,683.8 करोड़ रुपए रही, जो तीसरी तिमाही (30,245.3 करोड़ रुपए) से कम लेकिन पिछले साल की समान अवधि (23,860.7 करोड़ रुपए) से ज्यादा है।
इस दौरान सॉल्वेंसी रेशियो थोड़ा घटकर 190 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल 191 प्रतिशत था, लेकिन यह अभी भी नियामकीय जरूरतों से काफी ऊपर है।
नए कारोबार (न्यू बिजनेस) का प्रीमियम 20 प्रतिशत बढ़कर 42,500 करोड़ रुपए हो गया, जबकि रिन्यूअल प्रीमियम 19 प्रतिशत बढ़कर 58,700 करोड़ रुपए पहुंच गया।
इसके अलावा, एनुअलाइज्ड प्रीमियम इक्विवेलेंट (एपीई) 13 प्रतिशत बढ़कर 24,270 करोड़ रुपए हो गया।
कंपनी के एमडी और सीईओ अमित झिंगरान ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री में अच्छा सुधार देखने को मिला है, जिसे हाल के नियामकीय कदमों और ग्राहकों की सुरक्षा-आधारित (प्रोटेक्शन) उत्पादों की ओर बढ़ती रुचि ने समर्थन दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत पॉलिसियों पर जीएसटी में छूट मिलने से बीमा लेना लोगों के लिए ज्यादा किफायती हो गया।
नेटवर्क की बात करें तो एसबीआई लाइफ पूरे देश में 1,230 ऑफिस और 3,58,506 प्रशिक्षित बीमा पेशेवरों के जरिए अपनी सेवाएं दे रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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