Summer Health Tips: तेज गर्मी में बढ़ जाते हैं हीट स्ट्रोक के मामले, जानें ORS पीना कितना और कब सही, Stroke से बचने के उपाय
Summer Health Tips: देश में लगातार तापमान बढ़ता जा रहा है. ऐसे में भीषण गर्मी के बीच हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अक्सर लोग इसे डिहाइड्रेशन या हीट एग्जॉशन समझकर घर पर ही इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक या ORS पी लेते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी चीजें हर स्थिति में पर्याप्त नहीं होती है और कई मामलों में तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी होता है. आइए जानते हैं गर्मियों में ओआरएस कब पीना चाहिए.
माइल्ड केस में ORS फायदेमंद, लेकिन हीट स्ट्रोक में काफी नहीं
एशियन अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन (यूनिट-I) के चेयरमैन डॉक्टर प्रांजित भौमिक कहते हैं कि हल्के हीट-रिलेटेड मामलों जैसे हीट एग्जॉशन में, जब मरीज होश में हो और उल्टी न हो रही हो, तब ओरल इलेक्ट्रोलाइट्स यानी ORS काफी देना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन अगर मरीज पानी नहीं पी पा रहा या डिहाइड्रेशन ज्यादा है, तो IV फ्लूइड्स तत्काल प्रभाव से देना चाहिए. वे साफ कहते हैं कि 'हीट स्ट्रोक में सिर्फ फ्लूइड देना पर्याप्त नहीं होता है. इसमें सबसे पहले शरीर का तापमान तेजी से कम करना जरूरी होता है और कई बार दवाओं की भी जरूरत पड़ती है.
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हीट एग्जॉशन vs हीट स्ट्रोक में क्या फर्क है?
डॉ. भौमिक के अनुसार, हीट एग्जॉशन में मरीज को ज्यादा पसीना, कमजोरी, चक्कर और हल्का बढ़ा हुआ तापमान जैसे लक्षण दिखते हैं. इस स्थिति में इंसान को आराम करना चाहिए, अपने शरीर को ठंडा करना चाहिए और इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ फ्लूइड देना चाहिए. इस इलाज से मरीज आमतौर पर जल्दी रिकवर हो जाता है.
हीट स्ट्रोक क्या है?
हीट स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी होती है, जिसमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है और मरीज को भ्रम, बेहोशी या मानसिक स्थिति में बदलाव महसूस हो सकता है. ऐसे मामलों में इलाज का तरीका पूरी तरह बदल जाता है. इसमें मरीज को तुरंत कूलिंग, लगातार मॉनिटरिंग और अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है. हीट स्ट्रोक के इलाज में देरी करने से ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है.
इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन vs IV फ्लूइड, क्या ज्यादा सही?
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ORS और अन्य इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक शुरुआती और हल्के मामलों में काफी उपयोगी होते हैं. यह शरीर में पानी और सोडियम का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं और थकान, चक्कर और मांसपेशियों में ऐंठन को कम कर सकते हैं.
IV फ्लूइड कब जरूरी?
हालांकि, ज्यादा डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक आने पर IV फ्लूइड ज्यादा प्रभावी माना जाता है. डॉक्टर कहते हैं कि IV फ्लूइड सीधे शरीर में जाकर तेजी से अपना असर दिखाते हैं और डॉक्टर को फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट की मात्रा नियंत्रित करने में मदद करता है. यह किडनी डैमेज होने के जोखिम को भी कम करता है.
हीट स्ट्रोक में दवाओं की क्या भूमिका होती है?
हीट स्ट्रोक में दवाएं मुख्य इलाज नहीं होती है बल्कि सहायक भूमिका निभाती हैं. अगर मरीज को दौरे या ज्यादा बेचैनी हो रही है, तो बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं दी जा सकती हैं. कुछ मामलों में शरीर की गर्मी कम करने के लिए सेडेटिव्स का इस्तेमाल भी किया जाता है. इसके अलावा, इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस, हार्ट से जुड़ी समस्याएं या ऑर्गन फंक्शन बिगड़ने पर भी दवाएं दी जाती हैं.
क्या ज्यादा इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक नुकसान पहुंचा सकते हैं?
डॉक्टरों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक लेना भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ सकता है या शुगर का लोड ज्यादा हो सकता है, जिससे पेट से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
हीट स्ट्रोक में तुरंत क्या करें?
डॉ. भौमिक सलाह देते हैं कि हीट स्ट्रोक का शक होने पर सबसे पहले शरीर का तापमान कम करना जरूरी है.
- मरीज को तुरंत छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं
- तंग कपड़े ढीले करें या हटा दें
- गर्दन, बगल और जांघों पर बर्फ या ठंडे पानी से ठंडक पहुंचाएं
- अगर मरीज होश में है तो थोड़ी-थोड़ी मात्रा में उसे पानी दें
- तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सर्विस पर कॉल करें
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