पंजाब में विशेष ऑपरेशन से गैंगस्टरों से जुड़ी हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी की घटनाएं 69 प्रतिशत घटीं
पंजाब पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘गैंगस्टरां ते वार’ की सफलता केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और नशे की बरामदगी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस अभियान ने गैंगस्टर नेटवर्क की जड़ों पर प्रहार किया है, जिससे पूरे राज्य में अपराध दर में महत्वपूर्ण कमी आई है. पंजाब पुलिस के निरंतर प्रयासों के चलते ‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के तीन महीनों के भीतर ही संगठित अपराध में भारी कमी दर्ज की गई है. राज्य में गैंगस्टरों से संबंधित हत्या के मामलों में 100 प्रतिशत कमी आई है. जहां जनवरी महीने में ऐसे चार मामले दर्ज हुए थे, वहीं मार्च में यह संख्या शून्य हो गई है.
सिर्फ हत्याएं ही नहीं, बल्कि गैंगस्टरों से जुड़ी फायरिंग की घटनाओं में भी 69 प्रतिशत की बड़ी कमी देखी गई है. वर्ष के पहले माह में फायरिंग की 29 घटनाओं के मुकाबले 20 अप्रैल तक यह संख्या घटकर केवल 9 रह गई.
इसी तरह जबरन वसूली के मामलों में भी 10.9 प्रतिशत की कमी आई है. जनवरी में 110 मामलों के मुकाबले मार्च में यह संख्या घटकर 98 रह गई है.
जबरन वसूली से संबंधित कॉलों की शिकायत
टोल-फ्री एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन (93946-93946) की स्थापना के बाद, जबरन वसूली से संबंधित कॉलों की शिकायत करने के लिए अधिक नागरिक आगे आ रहे हैं. पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “पंजाब पुलिस ने न केवल राज्य में अपराध दर को नियंत्रित किया है, बल्कि ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान के माध्यम से लोगों का विश्वास भी जीता है. रिकॉर्ड से पता चलता है कि अपराधी नेटवर्क को खत्म करने के लिए कितनी गंभीरता से काम किया गया है. यह तो सिर्फ शुरुआत है, क्योंकि पंजाब पुलिस गैंगस्टर कल्चर के पूर्ण उन्मूलन के लिए निरंतर कार्रवाई कर रही है.”
जबरन वसूली के मामलों में 11 प्रतिशत की कमी आई
विश्लेषण के अनुसार, इस अवधि के दौरान जबरन वसूली के कुल मामलों में भी लगभग 11 प्रतिशत की कमी आई है. इस अभियान का प्रभाव हिंसक आपराधिक गतिविधियों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. इसकी सफलता केवल शहरों और जिलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में भी देखी जा रही है.
आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि संगठित अपराध में महत्वपूर्ण कमी आई है, जो पहले गैंगस्टर कल्चर के बढ़ने का एक बड़ा कारण बन रहा था. इस संबंध में डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “यह ऑपरेशन केवल बड़े गैंगस्टरों पर नकेल कसने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब में उनके पूरे नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा रही है. छोटे अपराधों में शामिल लोगों को गैंग में भर्ती करने की संभावना अधिक होती है. ऐसे तत्वों पर सख्ती से कार्रवाई करके हमने उनके नेटवर्क को कमजोर किया है और राज्य में अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मजबूत किया है.”
नासा ने बाह्य ग्रहों और डार्क मैटर की खोज के लिए 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' का किया अनावरण
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का अनावरण किया है। यह एक खास तरह का टेलीस्कोप है, जो सौर मंडल के बाह्य ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की खोज करेगा और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्यों को समझने में मदद करेगा।
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने मैरीलैंड के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, रोमन टेलीस्कोप पृथ्वी को ब्रह्मांड का एक नया नक्शा देगा।
12 मीटर लंबा यह सिल्वर रंग का टेलीस्कोप बड़े सोलर पैनल के साथ बनाया गया है और इसे सितंबर में स्पेसएक्स के रॉकेट से फ्लोरिडा से लॉन्च किया जा सकता है।
इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है, जिन्हें हबल स्पेस टेलीस्कोप की मां कहा जाता है।
नासा के अनुसार, इसका व्यू एरिया हबल टेलीस्कोप से करीब 100 गुना ज्यादा होगा और यह अपने जीवनकाल में एक अरब (बिलियन) आकाशगंगाओं की रोशनी को माप सकता है।
यह टेलीस्कोप तारों की रोशनी को ब्लॉक करके सीधे एक्सोप्लैनेट और ग्रह बनने वाली डिस्क को देख सकेगा। साथ ही यह हमारी गैलेक्सी में ग्रहों की संख्या और प्रकार का बड़ा डेटा तैयार करेगा और डार्क एनर्जी, एक्सोप्लैनेट और इन्फ्रारेड एस्ट्रोफिजिक्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने में मदद करेगा।
रोमन टेलीस्कोप को बनाने में 10 साल से ज्यादा समय और 4 अरब डॉलर से अधिक की लागत आई है। इसे पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा, ताकि यह ब्रह्मांड के बड़े हिस्से का अध्ययन कर सके।
इसे अंतरिक्ष के एक खास स्थान, दूसरे सन-अर्थ लाग्रांज पॉइंट (एल2) पर रखा जाएगा, जहां गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित रहते हैं और वस्तुएं कम ऊर्जा में स्थिर कक्षा में बनी रह सकती हैं।
एल2 पर मौजूद रहने से टेलीस्कोप को तापमान स्थिरता मिलेगी, जिससे हबल की तुलना में डेटा की गुणवत्ता लगभग 10 गुना बेहतर होगी।
गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के सिस्टम इंजीनियर मार्क मेल्टन के अनुसार, यह टेलीस्कोप हर दिन करीब 11 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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