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इजरायल और लेबनान युद्धविराम के बीच अमेरिका में राजदूत स्तरीय दूसरी वार्ता करेंगे

वॉशिंगटन, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, इज़राइल और लेबनान वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में अपनी दूसरी राजदूत-स्तरीय वार्ता करने की उम्मीद है।

इजरायल और लेबनान की ओर से एक बार फिर संयुक्त राज्य अमेरिका में उनके राजदूत येचिएल लीटर और नादा हमादेह मोआवद प्रतिनिधित्व करेंगे।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध के बीच कई हफ्तों तक सीमा पार बढ़ी हुई झड़पों के बाद, इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि से लागू हुआ।

हालांकि, यह युद्धविराम नाजुक बना हुआ है क्योंकि लेबनान की दक्षिणी सीमा पर तनाव जारी है। लेबनान की आधिकारिक नेशनल न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि मंगलवार सुबह इज़रायली बलों ने दक्षिणी लेबनान में अपने अभियानों को तेज कर दिया, व्यापक ध्वस्तीकरण किए, हवाई निगरानी बढ़ाई और युद्धविराम के बावजूद लोगों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी जारी की।

इजरायल और लेबनान के बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं है और हिजबुल्ला को लंबे समय से इज़रायल द्वारा ईरान का “प्रॉक्सी” माना जाता रहा है। इज़रायल के साथ बातचीत करने वाला पक्ष लेबनानी सरकार है न कि हिज़्बुल्ला।

इस बीच, हिजबुल्ला ने कहा कि उसने मंगलवार शाम कफ़र गिलादी बस्ती में एक इज़रायली तोपखाने की स्थिति पर रॉकेट और हमलावर ड्रोन से हमला किया, जो जारी युद्धविराम के बावजूद तनाव बढ़ने का संकेत है।

समूह ने एक बयान में कहा कि यह हमला हाल ही में लेबनान के शहर यहमर अल-शाक़ीफ़ की ओर हुई इजरायली तोपखाने की गोलीबारी के स्रोत को निशाना बनाकर किया गया। उसने इसे युद्धविराम लागू होने के बाद से इजरायल द्वारा बार-बार उल्लंघों जिसमें नागरिकों पर हमले और दक्षिणी लेबनान में घरों का विनाश शामिल है, का जवाब बताया।

अमेरिका समर्थित 10 दिन का युद्धविराम, जो कई हफ्तों की सीमा पार लड़ाई के बाद लागू हुआ, अब भी नाजुक स्थिति में बना हुआ है।

--आईएएनएस

पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिका के जहाजों की जब्ती से ईरान संघर्ष का नया चरण शुरू: रिपोर्ट

वाशिंगटन, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच समुद्र में अमेरिकी कार्रवाई अब एक नए चरण में प्रवेश करती दिख रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने फारस की खाड़ी से दूर हिंद महासागर तक अपने ऑपरेशन बढ़ाते हुए ईरानी तेल आपूर्ति को रोकने की रणनीति तेज कर दी है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने मंगलवार को हिंद महासागर में एक ऐसे तेल टैंकर को जब्त किया, जिस पर ईरानी तेल ले जाने का संदेह था। यह कार्रवाई श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट से बाहर भी सक्रिय रूप से दखल दे रहा है।

यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस व्यापक निर्देश का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान के तथाकथित “डार्क फ्लीट” को निशाना बनाया जा रहा है। यह फ्लीट कथित तौर पर प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात में मदद करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किया गया टैंकर करीब 20 लाख बैरल तेल ले जाने में सक्षम था। अमेरिकी सैनिकों ने बिना किसी प्रतिरोध के जहाज पर चढ़कर उसे कब्जे में लिया, जिससे अमेरिका की बढ़ती सैन्य पहुंच का संकेत मिलता है।

यह समुद्री अभियान ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का हिस्सा है, जिसे अमेरिकी नौसेना और वायुसेना लागू कर रही हैं। फॉक्स न्यूज और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, 13 अप्रैल से शुरू हुई इस नाकेबंदी के बाद अब तक करीब 28 जहाजों को वापस लौटने या मार्ग बदलने के लिए मजबूर किया गया है।

ट्रंप ने इस अभियान को “बेहद सफल” बताते हुए कहा है कि अमेरिका अब होर्मुज पर “पूरी तरह नियंत्रण” रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्धविराम को आगे बढ़ाते हुए सैन्य तैयारियां जारी रहेंगी।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा, “ मैंने अपनी सेना को नाकाबंदी जारी रखने और बाकी सभी मामलों में तैयार रहने का निर्देश दिया है।”

दूसरी ओर, ईरान ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। देश के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे “युद्ध का कदम” करार देते हुए कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।

ईरान से जुड़े मीडिया शीर्ष नेताओं के जरिए यह चेतावनी भी दी जा रही है कि अगर नाकेबंदी जारी रही, तो देश “बलपूर्वक इसे तोड़ने” की कोशिश कर सकता है।

हिंद महासागर तक अमेरिकी कार्रवाई का विस्तार क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम है, क्योंकि इससे दक्षिण एशिया से जुड़े प्रमुख व्यापारिक और ऊर्जा मार्ग सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल कूटनीतिक प्रयास ठप पड़े हैं। ईरान ने बातचीत में शामिल होने से इनकार करते हुए नाकेबंदी हटाने को पूर्व शर्त बना दिया है।

28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों के नियंत्रण पर केंद्रित हो गया है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।

--आईएएनएस

केआर/

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