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NALSAR Hyderabad के छात्रों ने CJI Surya Kant को दीक्षांत समारोह में बुलाने का विरोध किया

हैदराबाद, नौ अगस्त हैदराबाद स्थित ‘राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी’ के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और शिक्षकों को पत्र लिखकर आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया है। विश्वविद्यालय के 2026 बैच के कुछ छात्रों ने 23 जुलाई को भेजे गए एक ई-मेल में कहा कि उनकी चिंता इसको लेकर उपजी है कि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादती से संबंधित याचिका तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति नहीं दी। छात्रों ने कहा कि वे आगामी दीक्षांत समारोह के लिए सीजेआई को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रस्ताव को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं।

इस मामले में विश्वविद्यालय के अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन तत्काल कोई जवाब नहीं मिला। छात्रों ने सीजेआई की कथित टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि पीठ वीडियो देखने में रुचि नहीं रखती, जब याचिकाकर्ता के वकील ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो साक्ष्य दिखाने की पेशकश की थी। छात्रों ने ई-मेल में कहा, “कानून के छात्रों के रूप में हमारी चिंता सीमित और विशेष रूप से हमारे स्नातक बैच से जुड़ी है।

दीक्षांत समारोह ऐसा अवसर होता है, जहां विश्वविद्यालय के अपने मूल्यों, जिनमें संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत विचार-विमर्श शामिल है, का चयन में स्पष्ट रूप से प्रतिबिंब दिखना चाहिए।” उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि ऐसे किसी सम्मानित व्यक्ति से डिग्री प्राप्त करना, जिनके हालिया सार्वजनिक आचरण के बारे में सामने आई खबरों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने प्रदर्शनकारी नागरिकों पर पुलिस ज्यादती के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज किया, राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी में हमें सिखाए गए मूल्यों के साथ असहज स्थिति पैदा करता है।” छात्रों ने कहा कि संसद तक निकाला गया शांतिपूर्ण मार्च कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आयोजित किया गया था और प्रदर्शनकारियों ने नीट परीक्षा के संचालन तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार जैसे मुद्दे उठाए थे। उन्होंने कहा, “हम यह मुद्दा अब उठा रहे हैं, जब तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, ताकि हमारे विचारों को समय रहते ध्यान में रखा जा सके।” छात्रों ने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया कि वह दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन पर “गंभीरता से पुनर्विचार” करे और अंतिम निर्णय लेने या निमंत्रण भेजने से पहले स्नातक बैच से परामर्श करे। एक छात्र ने रविवार को बताया कि उन्हें इस ई-मेल पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

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Ethanol नीति पर Rewa से BJP MP Janardan Mishra का विवादित बयान, ब्राजील का दिया उदाहरण

रीवा (मप्र), नौ अगस्त देश में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने को लेकर जारी विवाद के बीच मध्यप्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार को इस नीति के बचाव में विरोधियों पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की। रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए नयी उड़ान सेवाओं के उद्घाटन पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते मिश्रा ने कहा कि भारत में केवल 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है, जबकि 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि तेल आपूर्ति के लिए जहाजों को 18,000 किलोमीटर के करीब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने की बात करते हैं तो कुछ लोग विरोध में आंदोलन करने लगते हैं।’’ उन्होंने आक्रामक अंदाज में बघेली में कहा, ‘‘आंदोलन हो रहा है एथनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?’’ मिश्रा ने कहा कि भारत में वाहन एथनॉल मिश्रित ईंधन से चल सकते हैं, लेकिन कुछ लोग एथनॉल के इस्तेमाल का विरोध करते हुए इसे पेट्रोल में नहीं मिलाने की बात कह रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एथनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?’’ पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील में तो गाडियां 100 प्रतिशत एथनॉल से चल रहीं, लेकिन इसके बावजूद वहां वाहनों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा एथनॉल का उत्पादन करता है और यही वजह है कि वहां 100 फीसदी एथनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। अक्सर अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत में भी विशेषज्ञों की राय है कि एथनॉल से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता लेकिन इसके बावजूद ‘बेवजह विरोध’ किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया में सबसे कम महंगाई और सबसे अधिक रोजगार कहीं है तो वह भारत में है।

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