रूस और यूक्रेन की जंग को 4 साल से ज्यादा बीत चुका है। दुनिया को लगा था कि यह युद्ध थमेगा लेकिन यह तो और भी भयानक होता जा रहा है। तबाही का मंजर ऐसा है कि इसका असर सिर्फ कीव या फिर मॉस्को पर नहीं है बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। पड़ता दिखाई दे रहा है। लेकिन अब इस जंग में एक ऐसी एंट्री हुई है जिसने नाटो से लेकर अमेरिका तक की रातों की नींद उड़ा दी है। पुतिन के सबसे भरोसेमंद दोस्त किम जोंग उन ने अब सिर्फ मिसाइलों से ही नहीं बल्कि अपने 50000 खूंखार सैनिकों को युद्ध के मैदान में उतारने का बड़ा ऐलान कर दिया है। बहुत बड़ा फैसला ले ली है। इस खबर ने राष्ट्रपति जेलेंस्की को हिला कर रख दिया है।
पिछले कुछ सालों से रूस और यूक्रेन के बीच हमले फिर से भीषण हो गए। रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने यूक्रेन के 150 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया और रूस ने यूक्रेन के खारकीव और ओसा जैसे बड़े शहरों पर बारूद की ऐसी बारिश की है कि चारों तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा नजर आ रहा है। लेकिन यूक्रेन भी शांत नहीं बैठा है। कुछ ही घंटे पहले यूक्रेन ने सीमा के करीब 12,000 कि.मी. दूर रूस के एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी सेंटर पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया है। इस हमले में 12 लोगों की जान भी गई है और 39 घायल बताए जा रहे हैं। जैसा कि रटर्स की रिपोर्ट में है। यानी जंग अब सीमा से निकल कर रूस के दिल तक पहुंच गई है।
नाटो की मदद और किम जोन की एंट्री?
जब अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश यूक्रेन को घातक हथियार भेज रहे हैं तो पुतिन ने भी अपना सबसे बड़ा पत्ता खोल दिया है और रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया ने रूस में 300 से 500 सैनिक तैनात करने का फैसला किया है। जेलस्की अब बुरी तरह से घबराए हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि कैसे उत्तर कोरियाई सैनिक अब सीधे रूस की तरफ से लड़ेंगे। जेलंस्की ने दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम लेने के लिए मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने साफ कह दिया है कि हमें ड्रोन और एयर डिफेंस के मामले में तुरंत सहयोग चाहिए क्योंकि खतरा अब दो गुना हो चुका है। अब बात सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं है दोस्तों। उत्तर कोरिया ने अपनी एक घातक मिसाइल यूनिट भी रूस भेज दी है। करीब 90 जांबाज सैनिक वाली यह यूनिट रूस की 112वीं मिसाइल ब्रिगेड के साथ मिलकर काम करेगी। इतना ही नहीं रूस इस तैनाती के जरिए 120 उत्तर कोरियाई बैलेस्टिक मिसाइलें और छह भारी भरकम लांचर युद्ध में झोंकने वाला है। पहले किम जोंग सिर्फ गोला बारूद भेज रहे थे लेकिन अब पहली बार उत्तर कोरिया की पूरी मिसाइल यूनिट रूसी धरती पर तैनात है। यह रूस और उत्तर कोरिया के सैन्य संबंधों का सबसे बड़ा और खतरनाक विस्तार है।
आखिर किम जोंग उन इतना रिस्क क्यों ले रहे हैं?
जून 2024 में जब राष्ट्रपति पुतिन पयोंग योंग पहुंचे थे तब दोनों देश के बीच एक ऐतिहासिक रक्षा संधि हुई। इस संधि में साफ लिखा है कि अगर किसी भी देश पर बाहरी हमला होता है तो दूसरा देश तुरंत सैन्य मदद करेगा। यह ठीक वैसा ही है जैसा नाटो का आर्टिकल पांच काम करता है। साल 204 की शुरुआत में भी उत्तर कोरिया ने रूस के कुछ क्षेत्र में 14,000 सैनिक भेजे थे जिन्होंने यूक्रेनी सेना को पीछे धकेलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।
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ढाका से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी डीजीएफआई के गुप्त बुलावे पर भारत के चार शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का खुफिया डेलीगेशन अचानक ढाका उतर चुका है। एक तरफ शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। तो वहीं दूसरी तरफ भारत के उच्चायुक्त की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ होने वाली हाई वोल्टेज मुलाकात से पहले इस सीक्रेट विजिट ने कूटनीतिक गलियारों में इस वक्त हड़कंप मचा कर रख दिया है। रविवार की दोपहर को एयर इंडिया की फ्लाइट से भारत के चार सुरक्षा अधिकारियों का एक डेलीगेशन ढाका पर उतरता है। हैरानी की बात यह है कि इन अधिकारियों की सुरक्षा और मेहमान नवाजी का सारा इंतजाम बांग्लादेश की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी डीजीएफआई यानी कि डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्स इंटेलिजेंस ने खुद किया और इन्हें सीधे होटल में ठहराया गया।
यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ भारतीय उच्चायुक्त की आमने-सामने की बैठक पहले से ही तय है। हालांकि अधिकारियों के नाम और पद पूरी तरह गोपनीय रखे गए हैं। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बहुत बड़ा सुरक्षा समझौता या फिर बातचीत चल रही है। लेकिन इस गरमागरर्मी माहौल के पीछे की असली वजह क्या है? शेख हसीना का वो विस्फोटक बयान। बांग्लादेश छोड़ने के ठीक 2 साल बाद 5 अगस्त को नई दिल्ली से शेख हसीना ने वर्चुअल मीडिया के जरिए जो हुंकार भरी उसने ढाका की नीव हिला कर रख दी। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार और विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी अपनी नाराजगी जताई। उनका यह तर्क था, कहना था कि भारत द्वारा हसीना को मंच देना बांग्लादेश की संप्रभुता और जुलाई विद्रोह के शहीदों का अपमान है।
जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक यह साफ कर दिया है कि यह कार्यक्रम किसी निजी मीडिया संगठन का था और भारत सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह उन बयानों का समर्थन नहीं करता। लेकिन इस बयानबाजी के बाद जो कूटनीतिक तनाव पैदा हुआ उसकी आग को बुझाने के लिए अब सुरक्षा अधिकारियों का यह डेलीगेशन ढाका में मौजूद है? यह दावा किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री तारिक रहमान सितंबर में होने वाली बीआईएमएस टीईईसी मीटिंग के लिए नई दिल्ली आएंगे?
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