Ethanol नीति पर Rewa से BJP MP Janardan Mishra का विवादित बयान, ब्राजील का दिया उदाहरण
रीवा (मप्र), नौ अगस्त देश में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने को लेकर जारी विवाद के बीच मध्यप्रदेश के रीवा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार को इस नीति के बचाव में विरोधियों पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की। रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए नयी उड़ान सेवाओं के उद्घाटन पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते मिश्रा ने कहा कि भारत में केवल 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन होता है, जबकि 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करना पड़ता है। वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि तेल आपूर्ति के लिए जहाजों को 18,000 किलोमीटर के करीब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने की बात करते हैं तो कुछ लोग विरोध में आंदोलन करने लगते हैं।’’ उन्होंने आक्रामक अंदाज में बघेली में कहा, ‘‘आंदोलन हो रहा है एथनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?’’ मिश्रा ने कहा कि भारत में वाहन एथनॉल मिश्रित ईंधन से चल सकते हैं, लेकिन कुछ लोग एथनॉल के इस्तेमाल का विरोध करते हुए इसे पेट्रोल में नहीं मिलाने की बात कह रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एथनॉल नहीं बनेगा तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?’’ पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राजील में तो गाडियां 100 प्रतिशत एथनॉल से चल रहीं, लेकिन इसके बावजूद वहां वाहनों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा एथनॉल का उत्पादन करता है और यही वजह है कि वहां 100 फीसदी एथनॉल से गाड़ियां चल रही हैं। अक्सर अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत में भी विशेषज्ञों की राय है कि एथनॉल से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता लेकिन इसके बावजूद ‘बेवजह विरोध’ किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया में सबसे कम महंगाई और सबसे अधिक रोजगार कहीं है तो वह भारत में है।
West Bengal के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने आपातकाल बंदियों के लिए मासिक Pension का ऐलान किया
कोलकाता, नौ अगस्त पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आपातकाल के दौरान जेल गए 325 लोगों के लिए 10,000 रुपये की मासिक पेंशन, सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और चिकित्सा सहायता की रविवार को घोषणा की। राज्य सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु ने कहा कि इन लोगों ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेक कष्ट सहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘इन वीर सेनानियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
राज्य की नई सरकार इन वीर सेनानियों के आदर्शों पर ही आधारित है।’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने आपातकाल के दौरान विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण जेल भेजे गए 325 लोगों को ‘पश्चिमबंग लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ के लिए चिह्नित किया है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चिन्हित किए गए इन 325 लोगों में से प्रत्येक को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी और वे सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा के हकदार होंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए उन्हें 1,000 रुपये की मासिक चिकित्सा सहायता भी दी जाएगी।
अधिकारी ने कहा कि यदि किसी लाभार्थी का निधन हो चुका है, तो उक्त लाभ उनके जीवनसाथी को प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नयी सरकार देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों के मूल्यों और सिद्धांतों पर बनी है। केंद्र की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार 1975 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की याद में हर साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मनाती है।
भाजपा शासित कई राज्यों ने भी आपातकाल का विरोध करने की वजह से जेल गए लोगों को पुरस्कार और पेंशन देकर सम्मानित किया है। इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई है।
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