महिला आरक्षण विधेयक को लेकर पटना में महिलाओं की 'आक्रोश रैली', CM सम्राट ने विपक्ष पर साधा निशाना
पटना - महिला आरक्षण विधेयक सदन से पास नहीं होने के विरोध में बीजेपी महिला मोर्चा ने पटना में जन आक्रोश और महिला सम्मेलन किया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बीजेपी और एनडीए की महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं. सम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सराबगी भी मौजूद रहे.
हजारों महिलाओं की भागीदारी
इस महिला सम्मेलन में हजारों की संख्या में NDA की महिला कार्यकर्ता जुटीं. कार्यक्रम में महिलाओं ने विपक्ष के खिलाफ नाराजगी जताई और महिला आरक्षण लागू करने की मांग उठाई.
विपक्ष पर बीजेपी का हमला
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सराबगी ने कहा कि विपक्ष के कारण महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष कभी भी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए गंभीर नहीं रहा. इसी वजह से आज देश की महिलाओं में आक्रोश है. नरेंद्र मोदी की सरकार महिलाओं के उत्थान के लिए यह विधेयक लाई थी जिसमें नकाबले महिलाओं को 33% आरक्षण मिलता है बल्कि लोकसभा और विधानसभा के परिसीमन होने के बाद इसकी संख्या भी बढ़ती. लेकिन विपक्षी दल खासकर कांग्रेस आरजेडी टीएमसी सपा के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका. विपक्षी दलों के इस निर्णय का जवाब देश की महिला देगी.
महिला आरक्षण पर सीएम का बयान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को अधिकार देने के लिए महिला आरक्षण विधेयक लाए थे. लेकिन विपक्ष ने इसे पास नहीं होने दिया. उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पास हो जाता तो लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ती. बिहार में अभी 19 महिला विधायक है यह बिल यदि पास हो जाता तो बिहार के सदन में 122 महिला विधायक आती.
विपक्ष के नेता पर निशाना
सम्राट चौधरी ने विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, लालू प्रसाद और अखिलेश यादव जैसे नेता आम महिलाओं को आगे नहीं लाना चाहते, बल्कि अपने परिवार के लोगों को ही राजनीति में देखना चाहते हैं. लालू प्रसाद पर निशाना चाहते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी पत्नी बिहार में विधान परिषद के नेता बने और बेटी सांसद लेकिन आम महिला सदन में न जाए यही उनकी सोच है. राहुल गांधी पर निशाना चाहते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी बहन सांसद बने लेकिन आम महिला कौन का हक नहीं मिले अखिलेश यादव की पत्नी सांसद बने और जब आम महिला की बात हो तो यह लोग महिला बिल पर अरंगा लगते हैं.
महिला सशक्तिकरण के लिए बिहार सरकार का काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है. आज राज्य में बड़ी संख्या में महिलाएं मुखिया और अन्य पदों पर काम कर रही हैं. यह महिलाओं के सशक्तिकरण का उदाहरण है.
महिलाओं को दिया भरोसा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि जब तक वह सत्ता में हैं, महिलाओं पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा. राज्य में कानून का राज कायम है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अब जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक अभियान चलाया जाएगा. महिलाओं को बताया जाएगा कि उनके साथ विपक्ष ने नाइंसाफी की है.
Operation Mahadev: पहलगाम के गुनहगारों का अंत, 93 दिनों तक जारी रहे ऑपरेशन की इनसाइड स्टोरी
जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के बैसरन में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला पूरे देश को झकझोर गया था. पहचान के आधार पर निर्दोष लोगों की हत्या ने इस हमले को और भी क्रूर बना दिया. यह सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं थी बल्कि इंसानियत और मानवता को झकझोर देने वाली वारदात थी जिसने सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया कि दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए. वारदात के कुछ हीं घंटों में शुरू हुआ एक्शन, आतंकियों की पहचान पुख्ता हमले के तुरंत बाद इंडियन आर्मी ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की. चश्मदीदों और मौके पर मौजूद सैन्य अधिकारी के इनपुट्स के आधार पर तीन आतंकियों की पहचान की गई. खुफिया एजेंसियों ने ह्यूमन इंट और टेक ईंट के जरिए पुष्टि की कि हमले के पीछे लश्कर से जुड़े तीन आतंकी सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई शामिल थे.
300 वर्ग किमी में फैला ऑपरेशन, हर रास्ता किया गया बंद
हमले के बाद तुरंत बड़े स्तर पर काउंटर-टेरर ऑपरेशन शुरू किया गया. शुरुआती रणनीति आतंकियों के संभावित भागने के रास्तों को सील करने और घाटी से बाहर निकलने से रोकने पर केंद्रित रही. खुफिया इनपुट्स के आधार पर सुरक्षा बलों ने आतंकियों की मूवमेंट को ट्रैक किया, जो दक्षिण कश्मीर के हपट्नार, बुगमार और त्राल इलाकों से होते हुए दाचीगाम के घने जंगलों और महादेव रिज की ओर बढ़ रहे थे. यह इलाका घने जंगलों और ऊंचाई के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसी कठिन भूभाग में आतंकियों को घेरने की रणनीति बनाई गई.
मई के अंत तक साफ हुई तस्वीर, ऑपरेशन का दायरा बढ़ा
जैसे-जैसे जानकारी सामने आई, यह स्पष्ट हो गया कि आतंकी कठिन इलाकों का फायदा उठाकर बच निकलने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच अमरनाथ यात्रा नजदीक आने के कारण खतरा और बढ़ गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन का विस्तार किया गया और पैरा स्पेशल फोर्सेस की टुकड़ियों को शामिल किया गया. जम्मू कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर एक मल्टी-एजेंसी ऑपरेशन शुरू हुआ.
ड्रोन, सेंसर और टेक्नोलॉजी से कसा शिकंजा
ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका रही. ड्रोन, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर के जरिए घने जंगलों में भी आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई. लगातार निगरानी और खुफिया सूचनाओं के सत्यापन से आतंकियों पर दबाव बढ़ता गया और उनके विकल्प सीमित होते गए. करीब 300 वर्ग किलोमीटर में फैले ऑपरेशन एरिया को धीरे-धीरे घटाकर 25 वर्ग किलोमीटर तक सीमित कर दिया गया.
10 जुलाई: निर्णायक चरण की शुरुआत
10 जुलाई 2025 को ताजा खुफिया इनपुट्स के आधार पर ऑपरेशन महादेव निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया. लिदवास, हरवन और दाचीगाम क्षेत्रों में बड़े स्तर पर संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई. सुरक्षा बलों ने तेजी से अपनी तैनाती बदली और सभी संभावित रास्तों को ब्लॉक कर आतंकियों को एक सीमित इलाके में घेर लिया.
28 जुलाई को 10 घंटे की खामोश मूव, आतंकियों का अंत
करीब 93 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 250 किलोमीटर से ज्यादा इलाके में आतंकियों का पीछा किया. 28 जुलाई 2025 को PARA स्पेशल फोर्सेस की एक टीम ने बेहद कठिन इलाके में 10 घंटे तक पैदल चलकर लक्ष्य तक पहुंच बनाई. लगभग 3 किलोमीटर की यह खामोश मूवमेंट पूरी तरह रणनीतिक थी. इसके बाद हुई सटीक और तेज कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया.
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