Operation Mahadev: पहलगाम के गुनहगारों का अंत, 93 दिनों तक जारी रहे ऑपरेशन की इनसाइड स्टोरी
जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के बैसरन में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला पूरे देश को झकझोर गया था. पहचान के आधार पर निर्दोष लोगों की हत्या ने इस हमले को और भी क्रूर बना दिया. यह सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं थी बल्कि इंसानियत और मानवता को झकझोर देने वाली वारदात थी जिसने सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया कि दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए. वारदात के कुछ हीं घंटों में शुरू हुआ एक्शन, आतंकियों की पहचान पुख्ता हमले के तुरंत बाद इंडियन आर्मी ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की. चश्मदीदों और मौके पर मौजूद सैन्य अधिकारी के इनपुट्स के आधार पर तीन आतंकियों की पहचान की गई. खुफिया एजेंसियों ने ह्यूमन इंट और टेक ईंट के जरिए पुष्टि की कि हमले के पीछे लश्कर से जुड़े तीन आतंकी सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई शामिल थे.
300 वर्ग किमी में फैला ऑपरेशन, हर रास्ता किया गया बंद
हमले के बाद तुरंत बड़े स्तर पर काउंटर-टेरर ऑपरेशन शुरू किया गया. शुरुआती रणनीति आतंकियों के संभावित भागने के रास्तों को सील करने और घाटी से बाहर निकलने से रोकने पर केंद्रित रही. खुफिया इनपुट्स के आधार पर सुरक्षा बलों ने आतंकियों की मूवमेंट को ट्रैक किया, जो दक्षिण कश्मीर के हपट्नार, बुगमार और त्राल इलाकों से होते हुए दाचीगाम के घने जंगलों और महादेव रिज की ओर बढ़ रहे थे. यह इलाका घने जंगलों और ऊंचाई के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसी कठिन भूभाग में आतंकियों को घेरने की रणनीति बनाई गई.
मई के अंत तक साफ हुई तस्वीर, ऑपरेशन का दायरा बढ़ा
जैसे-जैसे जानकारी सामने आई, यह स्पष्ट हो गया कि आतंकी कठिन इलाकों का फायदा उठाकर बच निकलने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच अमरनाथ यात्रा नजदीक आने के कारण खतरा और बढ़ गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन का विस्तार किया गया और पैरा स्पेशल फोर्सेस की टुकड़ियों को शामिल किया गया. जम्मू कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर एक मल्टी-एजेंसी ऑपरेशन शुरू हुआ.
ड्रोन, सेंसर और टेक्नोलॉजी से कसा शिकंजा
ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका रही. ड्रोन, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर के जरिए घने जंगलों में भी आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई. लगातार निगरानी और खुफिया सूचनाओं के सत्यापन से आतंकियों पर दबाव बढ़ता गया और उनके विकल्प सीमित होते गए. करीब 300 वर्ग किलोमीटर में फैले ऑपरेशन एरिया को धीरे-धीरे घटाकर 25 वर्ग किलोमीटर तक सीमित कर दिया गया.
10 जुलाई: निर्णायक चरण की शुरुआत
10 जुलाई 2025 को ताजा खुफिया इनपुट्स के आधार पर ऑपरेशन महादेव निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया. लिदवास, हरवन और दाचीगाम क्षेत्रों में बड़े स्तर पर संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई. सुरक्षा बलों ने तेजी से अपनी तैनाती बदली और सभी संभावित रास्तों को ब्लॉक कर आतंकियों को एक सीमित इलाके में घेर लिया.
28 जुलाई को 10 घंटे की खामोश मूव, आतंकियों का अंत
करीब 93 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 250 किलोमीटर से ज्यादा इलाके में आतंकियों का पीछा किया. 28 जुलाई 2025 को PARA स्पेशल फोर्सेस की एक टीम ने बेहद कठिन इलाके में 10 घंटे तक पैदल चलकर लक्ष्य तक पहुंच बनाई. लगभग 3 किलोमीटर की यह खामोश मूवमेंट पूरी तरह रणनीतिक थी. इसके बाद हुई सटीक और तेज कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया.
मुझे इजरायल ने ईरान युद्ध के लिए नहीं उकसाया : ट्रंप
वाशिंगटन, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्हें ईरान के खिलाफ इजरायल ने नहीं बरगलाया है। सोमवार को अपने ट्रुथ सोशल पर ये नई बात कही। ईरान को क्यों परमाणु संपन्न होने नहीं देना चाहते इसकी वजह भी ट्रंप ने बताई।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में पुष्टि की कि इजरायल ने उनको ईरान के साथ युद्ध करने के लिए कभी नहीं उकसाया। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर किए गए सरप्राइज अटैक का जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार यही वजह है कि ईरान को न्यूक्लियर संपन्न देश नहीं होने दिया जा सकता।
दरअसल, हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन पर फरवरी के आखिर में ईरान पर अपना संयुक्त हमला शुरू करने के लिए दबाव डाला था।
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने उन दावों को फर्जी करार देते हुए कहा, मैं फेक न्यूज (फर्जी खबरों) फैलाने वालों और इस आधार पर पोल करने वालों पर रत्ती भर भरोसा नहीं करता। वे जो 90 बातें कहते हैं, वे झूठ और मनगढ़ंत कहानियां होती हैं, और उनके पोल्स में भी धांधली होती है। ठीक वैसे ही, जैसे 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। वेनेज़ुएला के नतीजों की तरह ही। ये ऐसे मामले हैं जिनके बारे में मीडिया बात करना पसंद नहीं करता।
अपनी बातों को विराम देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान का भविष्य शानदार होगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के नए नेता समझदार हैं, तो देश का भविष्य उज्जवल और समृद्ध हो सकता है।
ये पोस्ट इस्लामाबाद टॉक्स के राउंड टू की संभावानाओं और आशंकाओं के बीच सामने आई है। इस्लामाबाद वार्ता के दूसरे चरण को लेकर सब पसोपेश में हैं। दरअसल, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान की राजधानी पहुंचने की बात तो कही जा रही है लेकिन ईरान लगातार होर्मुज पर अमेरिकी नाकेबंदी को सीजफायर उल्लंघन बता दूरी बना रहा है। स्पीकर एमबी गालिबाफ का कहना है कि ईरान संवाद कर रहा है लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है।
--आईएएनएस
केआर/
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