Gwalior Clean City Mission: ग्वालियर नगर निगम की नई मुहिम ने जगाई अलख, देखिए जनता से सीधा संवाद
Gwalior Clean City Mission: ग्वालियर शहर को देश के मानचित्र पर स्वच्छता के शिखर पर ले जाने के लिए नगर निगम ने अपनी कमर कस ली है. इसी कड़ी में ग्वालियर के वार्ड नंबर 13 में एक भव्य स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में न केवल नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए, बल्कि स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई. अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता को यह समझाना था कि ग्वालियर को नंबर वन बनाने का सपना तभी पूरा होगा जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझेगा.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अभियान के दौरान मौजूद विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने कचरा प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला. अक्सर देखा जाता है कि लोग घर का सारा कचरा एक ही डब्बे में डाल देते हैं. लेकिन इस कार्यक्रम में बताया गया कि कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना कितना जरूरी है. गीले कचरे के लिए हरा डब्बा और सूखे कचरे के लिए नीले डब्बे का इस्तेमाल करना अनिवार्य है. इसके अलावा, सेनेटरी नैपकिन और पट्टियों जैसे संक्रमित कचरे के लिए लाल डब्बे का उपयोग करने की सलाह दी गई.
अस्पतालों में कचरा प्रबंधन कैसे होता है?
अस्पतालों में कचरा प्रबंधन कैसे होता है, इस पर जानकारी देते हुए डॉक्टरों ने बताया कि वहां कचरे को बेहद सावधानी से अलग किया जाता है. जो कचरा खतरनाक होता है, उसे इंसिनेटर में भेजकर नष्ट किया जाता है. घरों में भी इसी तरह की सावधानी बरतनी चाहिए. खतरनाक कचरे जैसे पुरानी बैटरी, सिरिंज और टूटे कांच के लिए काले डब्बे का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि सफाई कर्मियों को किसी तरह की चोट या संक्रमण का खतरा न रहे.
स्वास्थ्य का मुद्दा भी अभियान का अहम हिस्सा
स्वच्छता के साथ-साथ स्वास्थ्य का मुद्दा भी इस अभियान का एक अहम हिस्सा रहा. डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि सिंगल यूज प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को दावत दे रहा है. प्लास्टिक की बोतलों में रखा गर्म पानी पीने और प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से शरीर में हानिकारक केमिकल्स पहुंचते हैं, जिससे आंतों के कैंसर का खतरा 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. लोगों से अपील की गई कि वे घर से कपड़े का थैला लेकर निकलें और प्लास्टिक का मोह त्याग दें.
जनता की ओर से सामने आए सुझाव
कार्यक्रम में जनता की ओर से भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए. एक जागरूक नागरिक ने कहा कि बच्चों को स्वच्छता की शिक्षा केवल किताबों से नहीं, बल्कि बड़ों के व्यवहार से मिलती है. अगर माता-पिता घर में कचरा सही जगह डालेंगे, तो बच्चे खुद-ब-खुद यह सीख जाएंगे. इसके साथ ही नगर निगम को सुझाव दिया गया कि कचरा गाड़ियों का समय तय किया जाए ताकि ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी न हो और पार्कों में सफाई कर्मियों के नाम और नंबर भी लिखे होने चाहिए.
जनता का योगदान भी जरूरी
अंत में यह बात निकलकर सामने आई कि ग्वालियर को स्वच्छ बनाने की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम की नहीं है. जिस तरह चुनाव के समय लोग अपना कीमती वोट देकर जिम्मेदारी निभाते हैं, उसी तरह स्वच्छता के लिए भी सजग रहना होगा. जब तक जनता और प्रशासन मिलकर कदम नहीं बढ़ाएंगे, तब तक कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता. ग्वालियर के वार्ड नंबर 13 से उठी यह आवाज अब पूरे शहर में स्वच्छता की नई लहर पैदा करने के लिए तैयार है.
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वित्त वर्ष 26 में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक जुटाए : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 में 153 इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के जरिए 2,01,442 करोड़ रुपए जुटाए हैं। यह जानकारी सोमवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनियों ऐसे समय पर आईपीओ के जरिए पूंजी जुटाने में सफल रही हैं, जब वैश्विक कारणों के चलते बाजार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा था।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत बना हुआ है और वित्त वर्ष 27 में अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
सरकार द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे पर व्यय की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है, और वित्त वर्ष 2027 में कुल व्यय का लगभग एक तिहाई हिस्सा पूंजीगत व्यय का होने की संभावना है।
मुद्रास्फीति लगभग 4.5 प्रतिशत पर नियंत्रण में रहने की उम्मीद है, साथ ही राजकोषीय घाटा भी 4.3 प्रतिशत के लक्षित स्तर पर रहेगा।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि बाहरी दबाव बना हुआ है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के कमजोर प्रवाह और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली के कारण भारतीय रुपए पर दबाव बना रह सकता है।
इन सभी कारकों ने 2022 की शुरुआत से रुपए में दबाव बनाने का दाम किया है।
आय के मोर्चे पर, रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कुल कॉर्पोरेट आय में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी, हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन भिन्न हो सकता है।
बैंक, उपभोक्ता विवेकाधीन वस्तुएं, धातु और दूरसंचार क्षेत्रों में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र पर कुछ दबाव पड़ सकता है।
हाल के महीनों में, विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में, मूल्यांकन में गिरावट आई है, हालांकि वे अभी भी दीर्घकालिक औसत से ऊपर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बेंचमार्क सूचकांक ऐतिहासिक रूप से आकर्षक स्तरों के करीब पहुंच गए हैं।
बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है। डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 222 मिलियन से अधिक हो गई है, जबकि फरवरी 2026 में सक्रिय इक्विटी व्यापारियों की संख्या 1.48 करोड़ से अधिक हो गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि म्यूचुअल फंड में एसआईपी के माध्यम से निवेश मजबूत बना हुआ है और यह सालाना 30,000 करोड़ रुपए से अधिक है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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