अब भीम यूपीआई ऐप पर भी चेक कर पाएंगे क्रेडिट स्कोर, एनपीसीआई ने सिबिल के साथ किया करार
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने सोमवार को कहा कि उसकी इकाई भीम सर्विसेज और ट्रांसयूनियन सिबिल के बीच करार हुआ है। इसके बाद अब यूजर्स भीम ऐप पर अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर पाएंगे।
इस एकीकरण के साथ, यूजर्स सीधे भीम ऐप पर अपना सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट देख सकते हैं, जिससे वे प्लेटफॉर्म छोड़े बिना अपनी क्रेडिट स्थिति पर आसानी से नजर रख सकते हैं।
एनपीसीआई ने बताया कि क्रेडिट डेटा तक पहुंच सहमति-आधारित मॉडल द्वारा नियंत्रित होगी, जिसके तहत जानकारी केवल यूजर्स की स्पष्ट स्वीकृति के बाद ही प्राप्त की जाएगी।
यह फीचर भीम ऐप के वर्जन 4.0.19 और उससे ऊपर के वर्जनों पर उपलब्ध है।
क्रेडिट स्कोर की जानकारी जोड़ने का उद्देश्य ऐप की उपयोगिता को रोजमर्रा के भुगतानों से आगे बढ़ाकर व्यापक वित्तीय जागरूकता तक फैलाना है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा, जैसे-जैसे भारत क्रेडिट के लिए लेन-देन आधारित दृष्टिकोण से अधिक योजनाबद्ध दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, यह उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है।
एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड की एमडी और सीईओ ललिता नटराज ने कहा कि यह सहयोग ऐप के मूल सिद्धांत, यानी सरलता और उपयोगकर्ता नियंत्रण को क्रेडिट क्षेत्र में आगे बढ़ाता है।
इससे पहले मार्च में, एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड ने ऐप पर यूपीआई भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शुरू किया था, जिससे उपयोगकर्ता फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान का उपयोग करके 5,000 रुपए तक के लेनदेन को स्वीकृत कर सकते हैं।
एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड द्वारा विकसित भारत का स्वदेशी यूपीआई भुगतान ऐप, भीम, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से अधिक भारतीय भाषाओं में उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करता है। ऐप में खर्च विभाजन, फैमिली मोड और खर्च विश्लेषण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हाल ही में, भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) को 10 वर्ष पूरे हो गए हैं और इसकी ग्लोबल रियल टाइम लेनदेन में हिस्सेदारी 49 प्रतिशत हो गई है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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सप्लाई चेन में नई उपलब्धि आईआईटी की मदद से ड्रोन द्वारा हुई सामान की डिलीवरी
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस) भारत के सप्लाई चेन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि दर्ज की गई है। देश में ड्रोन के जरिए हवाई मार्ग से सामान पहुंचाने की नई तकनीक को परखा गया। इस काम में एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूरियर कंपनी और मद्रास का प्रमुख तकनीकी संस्थान एक साथ आए।
इस परीक्षण का मकसद यह देखना था कि भीड़भाड़ वाले शहरी माहौल में ड्रोन के जरिए सामान कितनी तेजी और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकता है। आईआईटी के मुताबिक आम तौर पर जहां किसी पैकेज को पहुंचाने में एक घंटे या उससे ज्यादा समय लग जाता है, वहीं ड्रोन की मदद से यह काम केवल कुछ मिनटों में पूरा हो गया। सोमवार को इस विषय में जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने बताया कि यह परीक्षण बैंगलुरु में किया गया।
परीक्षण के दौरान ड्रोन ने तय रास्ते पर उड़ान भरकर एक जगह से दूसरी जगह तक पैकेज पहुंचाया। इसमें खास बात यह रही कि ड्रोन ने ट्रैफिक, सिग्नल और सड़कों की भीड़ जैसी समस्याओं से पूरी तरह बचते हुए सीधी उड़ान भरी। आईआईटी मद्रास का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य भविष्य में सप्लाई चेन यानी सामान पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को तेज, सस्ता और ज्यादा भरोसेमंद बनाना है।
यह तकनीक खास तौर पर जीवन रक्षक दवाइयों, जरूरी सामान और इमरजेंसी डिलीवरी के लिए यह बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की ड्रोन सेवा बड़े स्तर पर शुरू होती है, तो शहरों में डिलीवरी का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इससे समय की बचत होगी, लागत कम होगी और लोगों को तेजी से सेवाएं मिल सकेंगी। फिलहाल यह परीक्षण देश में शहरी ड्रोन डिलीवरी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आने वाले समय में इसके और बड़े स्तर पर इस्तेमाल की उम्मीद जताई जा रही है। इस पहल का एक उद्देश्य जटिल शहरी क्षेत्रों में उच्च गति वाले ड्रोन संचालन की व्यवहारिकता को परखना भी था। इसके अलावा हवाई मार्गों के उपयोग को समझना और पारंपरिक सड़क आधारित आपूर्ति का विकल्प विकसित करना भी इसका लक्ष्य है। यह तरीका भीड़भाड़ वाले मार्गों पर निर्भरता कम करेगा और सामान आपूर्ति की गति को बढ़ाएगा। यह ड्रोन परीक्षण बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी चरण 2 से लेकर बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र के पास स्थित एक स्थान के बीच किया गया।
यह एक मध्यम दूरी (मिड माइल) लॉजिस्टिक्स सेवा का परीक्षण था, जिसमें शहर के भीतर सामान को एक प्रमुख बिंदु से दूसरे बिंदु तक पहुंचाने की क्षमता परखी गई। यह परीक्षण एक विशेष अनुसंधान ढांचे के अंतर्गत किया गया, जहाँ शहरी हवाई क्षेत्र में ड्रोन की सुरक्षित और कुशल उड़ान का मूल्यांकन किया गया।आईआईटी के अनुसार, सड़क मार्ग से लगभग 53 किलोमीटर की दूरी तय करने में सामान्यत 60 मिनट से अधिक समय लगता है। लेकिन ड्रोन के माध्यम से यह दूरी हवाई मार्ग से लगभग 39 से 42 किलोमीटर रह गई।
परीक्षण के दौरान एक तरफ की यात्रा लगभग 21 मिनट में पूरी की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि समय संवेदनशील आपूर्ति के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी हो सकती है और इसमें बड़े स्तर पर सुधार की संभावना है। हालाँकि ड्रोन ने हवाई अड्डे के ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में उड़ान भरी जिन्हें येलो और रेड जोन कहा जाता है। इसके लिए बकायदा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की गई थीं। ड्रोन संचालन 120 मीटर की ऊंचाई पर किया गया, जो निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुरूप है। यह पूरा परीक्षण एक विशेष अनुसंधान केंद्र के अंतर्गत किया गया।
यहां यह कार्य हवाई माल परिवहन, विद्युत वाहन एकीकरण और उन्नत मांग पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कैसे शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और नीति निर्माता मिलकर भविष्य की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सक्षम व टिकाऊ बना सकते हैं। इसके सबसे बड़े लाभ यह हैं कि इससे डिलीवरी समय में भारी कमी आएगी, ट्रैफिक पर निर्भरता कम होगी, लागत और ईंधन की बचत होगी, पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़ेगा व आपातकालीन सेवाओं में तेज आपूर्ति संभव हो सकेगी।
--आईएएनएस
जीसीबी/पीएम
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