स्माइल योजना के तहत करीब 10 हजार लोगों का किया गया पुनर्वास, 21 गरिमा गृह कार्यरत: सरकार
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि स्माइल (एसएमआईएलई-आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता) योजना के भिक्षावृत्ति उप-योजना के तहत अब तक 31,055 लोगों की पहचान की गई है और 9,935 लोगों का पुनर्वास किया गया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, देश के 17 राज्यों में 21 गरिमा गृह संचालित हो रहे हैं, जबकि अगस्त 2025 में तीन और गरिमा गृहों को मंजूरी दी गई थी।
गरिमा गृह ऐसे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास प्रदान करते हैं, जो परिवार या समाज के कारण बेघर हो जाते हैं। इन आश्रय स्थलों में रहने, खाने, चिकित्सा सुविधा, मनोरंजन और स्किल डेवलपमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
इनका संचालन कम्युनिटी बेस्ड ऑर्गेनाइजेशन (सीबीओ) द्वारा किया जाता है, जिन्हें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है।
2022 में शुरू की गई स्माइल योजना देश का पहला ऐसा राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य समाज के वंचित लोगों की पहचान करना, उन्हें बचाना और उनका पुनर्वास करना है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, काउंसलिंग, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
सरकार ने बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आयुष्मान भारत टीजी प्लस के तहत हर साल 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है। इसमें जेंडर-अफर्मिंग ट्रीटमेंट, हार्मोन थेरेपी और सर्जरी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
2021 से 2026 के बीच स्माइल योजना के लिए सरकार ने 390 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है।
सरकार का कहना है कि यह योजना पारंपरिक तरीके से अलग है, क्योंकि यह सिर्फ एक समस्या पर नहीं बल्कि पहचान, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आवास जैसे सभी पहलुओं को एक साथ जोड़कर समाधान देती है।
स्माइल योजना के तहत ट्रांसजेंडर छात्रों को कक्षा 9 से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएशन तक स्कॉलरशिप भी दी जाती है।
इसके अलावा, भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए विशेष उप-योजना भी चलाई जा रही है, जिसका लक्ष्य भिक्षावृत्ति मुक्त भारत बनाना है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश भर में 18 एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किए गए हैं, जिनके जरिए 1,800 ट्रांसजेंडर लोगों को बिजनेस प्लानिंग, मार्केटिंग, फाइनेंस और बैंकिंग से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
उज्बेकिस्तान में युद्धाभ्यास, दोनों हाथों से फायरिंग, रॉकेट, ड्रोन व आतंकी ठिकानों पर वार
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना के जवान उज्बेकिस्तान में दोनों हाथों से पिस्तौल चलाने का जौहर दिखा रहे हैं। सेना के ये जवान बेहद तेज गोलीबारी, रॉकेट से हमले, बिना हथियार का युद्ध व संगीन से लड़ाई जैसे घातक मिशन पूरे कर रहे हैं।
दरअसल यह मिशन उज्बेकिस्तान सेना के साथ एक महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास में अंजाम दिए जा रहे हैं। यहां दोनों देशों की सेना युद्ध क्षेत्र में मानव रहित यंत्रों का उपयोग, शहरी क्षेत्र में ‘फायर एंड मूव’, घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने जैसे अभ्यास भी कर रही है। इसके अलावा ठिकानों की टोही और निगरानी, आतंकियों के भवन में घुसकर कार्रवाई, पर्वतारोहण, रस्सी के सहारे उतरना, स्नाइपर प्रशिक्षण और दिशा ज्ञान भी इस युद्धाभ्यास में शामिल है।
उज्बेकिस्तान में दोनों सेनाओं का यह संयुक्त युद्धाभ्यास 25 अप्रैल तक जारी रहेगा। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास “डस्टलिक 2026” का यह सातवां संस्करण है। यह युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सामरिक दक्षता और संयुक्त अभियान क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेना के मुताबिक इस सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों की क्षमता को बढ़ाना है।
इसके अंतर्गत दोनों देशों की सेनाएं दुश्मन के खिलाफ संयुक्त योजना निर्माण कर रही हैं। सामरिक अभ्यास किए जा रहे हैं। वहीं विशेष सैन्य हथियारों के उपयोग और अवैध सशस्त्र समूहों के विरुद्ध अभियान चलाने की रणनीतियों पर फोकस किया जा रहा है। अब तक के अभ्यास में जवानों ने क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने, एक-दूसरे की कार्यप्रणालियों और रणनीतियों का आदान-प्रदान करने के अलावा कई प्रकार के युद्ध कौशलों का अभ्यास किया है। भारत और उज्बेकिस्तान की सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास ‘डस्टलिक’ में आतंकवादी कार्रवाई का जवाब देने, छापेमारी, खोज और आतंकवादी ठिकाने नष्ट करने के सैन्य अभियान किए जा रहे हैं।
दरअसल, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास डस्टलिक 2026 दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभ्यास का मुख्य फोकस संयुक्त योजना और संचालन क्षमता को विकसित करना है। इसमें सैनिकों को सर्च ऑपरेशन, घेराबंदी, छापेमारी, और बंधकों को सुरक्षित निकालने जैसे जटिल कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, आधुनिक युद्धक तकनीक जैसे ड्रोन और निगरानी प्रणालियों का उपयोग भी सिखाया जा रहा है।
डस्टलिक 2026 के दौरान दोनों देशों की सेनाएं अपने अनुभवों और रणनीतियों का आदान-प्रदान कर रही हैं। इससे न केवल उनकी युद्धक दक्षता में सुधार होगा, बल्कि आपसी समझ और समन्वय भी मजबूत होगा। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के जवानों की शारीरिक क्षमता और टीम भावना को मजबूत करने के लिए दौड़, व्यायाम, योग तथा आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं। आने वाले दिनों में यह अभ्यास और जटिल चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त मिशनों को अंजाम दिया जाएगा।
--आईएएनएस
जीसीबी/एएस
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