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व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक किया जाएगा
बीना विधायक निर्मला सप्रे मामला, हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने सुनवाई के निर्देश दिए
सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे ने कहा था कि- मैं अब भी कांग्रेस में हूं, इस बयान को हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड में लिया है। मामले पर याचिकाकर्ता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सप्रे के बीजेपी में शामिल होने के सबूत पेश करने के लिए भी कहा गया था। जिस पर कि सिंघार ने जवाब दिया है कि वे 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप की प्रतियां पेश करेंगे।
इसी मामले से जुड़ी तय सुनवाई आज 20 अप्रैल को हुई जिसमें सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सुनवाई नहीं पाई है, क्योंकि प्रशासनिक व्यस्तता के चलते उनके पास समय नहीं था। राज्य सरकार ने जवाब पेश करने के लिए कोर्ट से समय मांगा था, कोर्ट ने 2 दिन बाद, याने मामले पर विधानसभा अध्यक्ष के समाने 22 अप्रैल को सुनवाई का समय दिया है। इसके बाद 29 अप्रैल को अब हाईकोर्ट सुनवाई करेगा।
कांग्रेस से विधायक बनीं, भाजपा के कार्यक्रम में शामिल हुई
बता दें लोकसभा चुनाव में बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने भाजपा का दामन थाम लिया था जिसे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल कहते हुए निर्मला सप्रे की विधायकी शून्य करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से मांग की थी, पर जब इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। 2023 में बीना सीट से निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे सीएम मोहन यादव के साथ बीजेपी के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने के दावे किए गए थे।
सिंघार ने सदस्यता समाप्त करने की मांग की है
5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिका लगाई। इसमें कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी बदलने पर विधायक की सदस्यता खुद-ब-खुद समाप्त हो जाती है। जब इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो सिंघार ने नवंबर 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इससे पहले चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की थी, तब निर्मला सप्रे के वकील संजय अग्रवाल ने उनके कांग्रेस में ही होने का दावा किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे में निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता।
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