गोल्ड ज्वेलरी लूट की साज़िश कर बहन ने नाबालिग भाई को ही बना डाला लुटेरा, चप्पल और गाड़ी से हुआ खुलासा
कहते हैं बदमाश कितनी भी होशियारी दिखा ले लेकिन पुलिस की नजरों से बच नहीं सकता…ग्वालियर में ये बात बिलकुल सच साबित हुई है… मामला सोने के जेवरात की लूट से जुड़ा है खास बात ये है कि इसमें फरियादी ही साजिशकर्ता और उसके भाई आरोपी निकले हैं, पुलिस लू तकी साजिश रचने वाली महिला से पूछताछ कर रही है और उसके दोनों लुटेरे भाइयों को पकड़ लिया है इसमें नाबालिग है।
ग्वालियर में शनिवार को दिन दहाड़े बैंक के बाहर एक ग्राहक से उसके 10 तोला वजनी सोने के जेवर की लूट की घटना ने पुलिस के कान खड़े कर दिए थे, फरियादी महिला सेजू सिकरवार (सेजल) ने बहोड़ापुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसने कैप्री गोल्ड लोन कंपनी ( कैप्री ग्लोबल कैपिटल लिमिटेड Capri Global Capital Limited) शाखा बहोड़ापुर में गिरवी रखी अपनी ज्वेलरी निकाली थी और आईआईएफएल (इंडिया इंफोलाइन फाइनेंस लिमिटेड, India Infoline Finance Limited) में गोल्ड रखकर लोन लेने के लिए जा रही थी तभी बहोड़ापुर तिराहे पर एक्टिवा पर दो नकाबपोश लड़के आये और बैग छीन कर भाग गए।
दिन दहाड़े हुई लूट की घटना ने पुलिस को चौका दिया, पुलिस ने तत्काल सीसीटीवी चैक किये तो लड़के भागते दिखाई दिए, पुलिस महिला के हाव भाव और एफआईआर दर्ज कराने की जल्दबाजी को भी नोटिस कर रही थी, इस बीच पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज अपने मुखबिरों को भेजे और कहा तत्काल मालूम करें, मुखबिरों ने अपना काम किया और पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा दी।
बहोड़ापुर थाना टी आई आलोक सिंह परिहार ने बताया कि शक की सुई जब फरियादी महिला सेजू पर टिकी तो पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल निकाली जिसने पुलिस के शक को और मजबूती दे दी, कॉल डिटेल से मालूम चला कि महिला घटना से पहले लगातार अपने भाइयों से बात कर रही थी उन्हें लोकेशन बता रही थी, पुलिस को जब कहानी में झोल दिखाई दिए तो उसने महिला से कड़ी पूछताछ शुरू की उससे उसकी एक्टिवा के बार में पुचतच शुरू की तो सकपका गई।
पुलिस ऐसे पहुंची आरोपियों तक
इस बीच पुलिस ने एक्टिवा ढूढ़ निकाली और कपड़ों चप्पलों की मदद से महिला के मददगार दोनों आरोपी भाइयो तक पहुंच गई, पुलिस ने उन्हें उठा लिया और सलाखों के पीछे भेज दिया, महिला को थाने बैठा लिया, पूछताछ में महिला ने ऑनलाइन गेम में पैसा हारने , पति से बदला लेना जैसी कई कहानी सुनाई जिसपर पुलिस पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही है, महिला ने कल रात को थाने में फिनाइल पीने की कोशिश कर हंगामा भी किया लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से वो फिनाइल पीने में कामयाब नहीं हो पाई।
एक आरोपी नाबालिग, बाल सुधर गृह भेजा
पुलिस के तत्काल एक्शन से स्पष्ट हो गया कि लूट जैसी कोई घटना हुई ही नहीं थी फरियादी महिला सेजू सिकरवार ने ही भाइयों के साथ मिलकर लूट की साजिश रची थी, पुलिस ने घटना में शामिल दो आरोपियों में एक को जेल और दूसरे नाबालिग को बाल सुधार गृह भेज दिया है, महिला की औपचारिक गिरफ़्तारी होना शेष है।
महिला ने पुलिस को ये बताई थी लूट की कहानी
सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम् सुराग
टीआई आलोक परिहार ने बताई घटना की सच्चाई
क्या बालकनी में मंदिर रखना सही है? जानिए वास्तु और धर्म के छुपे हुए नियम
आजकल छोटे घरों और फ्लैट्स में जगह की कमी के कारण लोग कई बार मंदिर को बालकनी में रख देते हैं। यह आसान समाधान तो लगता है, लेकिन क्या यह सही भी है, यही सवाल हर किसी के मन में आता है।
हम सभी अपने घर में भगवान के लिए एक खास जगह बनाना चाहते हैं, लेकिन जब जगह कम हो जाती है, तो बालकनी का विकल्प सामने आता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि क्या बालकनी में मंदिर रखना सही है या नहीं।
क्या बालकनी में मंदिर रखना सही है?
अगर हम धार्मिक मान्यताओं की बात करें, तो मंदिर को घर की सबसे पवित्र जगह माना जाता है। ऐसे में मंदिर को घर के अंदर रखना ज्यादा शुभ माना जाता है। माना जाता है कि जिस भगवान की कृपा से हमें घर मिला है, उन्हें घर के बाहर यानी बालकनी में रखना थोड़ा अनुचित माना जाता है। बालकनी में मंदिर रखने से पूजा का स्थान घर की मुख्य ऊर्जा से अलग हो जाता है, जिससे आध्यात्मिक जुड़ाव थोड़ा कम महसूस हो सकता है।
वास्तु के अनुसार मंदिर की सही जगह
क्या बालकनी में मंदिर रखना सही है, तो वास्तु शास्त्र भी इसका स्पष्ट जवाब देता है। वास्तु के अनुसार, मंदिर को घर के उत्तर-पूर्व कोने यानी ईशान कोण में रखना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होती है, जहां पूजा करने से मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
अगर ईशान कोण में जगह नहीं हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा भी अच्छी मानी जाती है।
बालकनी में मंदिर रखने के नुकसान
क्या बालकनी में मंदिर रखना सही है इस सवाल का जवाब समझने के लिए इसके नुकसान जानना भी जरूरी है। बालकनी एक खुली जगह होती है, जहां धूल, मिट्टी और प्रदूषण का असर सीधे मूर्तियों पर पड़ता है। बारिश, धूप और पक्षियों की गंदगी भी पूजा स्थल की पवित्रता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भगवान की मूर्तियों को साफ और सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है, जो धार्मिक दृष्टि से सही नहीं माना जाता।
अगर बालकनी में मंदिर रखना ही पड़े तो क्या करें
कई बार मजबूरी में बालकनी में मंदिर रखना पड़ता है। ऐसे में कुछ सावधानियां अपनाकर आप इसकी पवित्रता बनाए रख सकते हैं। मंदिर को पूरी तरह खुला न रखें, उसके चारों ओर कांच या लकड़ी का कवर जरूर लगाएं ताकि धूल और गंदगी अंदर न आए। शाम के समय मंदिर को पर्दे से ढकना भी अच्छा माना जाता है। बालकनी को हमेशा साफ रखें और वहां जूते-चप्पल बिल्कुल न रखें।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।
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