मारवाड़ में मानसून का देसी संकेत, 200 साल पुरानी घड़ा परंपरा से लगाया बारिश का अनुमान
Marwar Rain Prediction: मारवाड़ के तिंवरी क्षेत्र में हाली अमावस्या पर सदियों पुरानी घड़ा परंपरा एक बार फिर किसानों की उम्मीदों का केंद्र बनी. करीब 200 साल पुरानी इस अनोखी परंपरा में पांच घड़ों के जरिए मानसून और बारिश का अनुमान लगाया जाता है. चार घड़े ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण और भाद्रपद महीनों का प्रतीक माने जाते हैं, जबकि बीच का घड़ा आकाश का प्रतिनिधित्व करता है. पूजा-अर्चना के बाद घड़ों में धान और पानी भरकर इंद्र देव का स्मरण किया गया. इसके बाद घड़ों के फूटने के समय के आधार पर बारिश का आकलन किया गया. ग्रामीणों का मानना है कि कई बार यह अनुमान वास्तविक मौसम के काफी करीब साबित हुआ है. आधुनिक दौर में भी किसान इस परंपरा को आस्था, अनुभव और खेती की उम्मीद से जोड़कर निभा रहे हैं. इस बार भी अच्छे मानसून के संकेत मिलने से किसानों में उत्साह देखा गया.
Lenskart Controversy: तिलक-कलावा बैन वाले विवाद पर सफाई... अचानक कंपनी ने क्यों लिया यू टर्न?
Lenskart Controversy: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक खबर तेजी से वायरल हो रही थी. Lenskart कंपनी के स्टोर्स में बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक, लेकिन हिजाब को मंजूरी. बस फिर क्या था, विवाद ने तूल पकड़ लिया और लोगों के बीच सवालों की झड़ी लग गई. बताया जा रहा था कि कंपनी की एक गाइडलाइन में कर्मचारियों को कुछ धार्मिक पहचान दिखाने से रोका गया, जबकि कुछ को अनुमति दी गई. जैसे ही ये दस्तावेज वायरल हुआ, लोगों ने इसे लेकर नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. लेकिन अब कहानी में बड़ा ट्विस्ट आ गया है. कंपनी ने इस पूरे विवाद पर यू-टर्न लेते हुए साफ कर दिया है कि अब सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को अनुमति दी जाएगी. यानी अब कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, हिजाब, पगड़ी जो चाहें पहन सकते हैं. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने लोगों की भावनाओं को ध्यान से सुना है और अगर किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है. साथ ही उन्होंने ये भी साफ किया कि उनकी सोच कभी किसी की आस्था को दबाने की नहीं रही.
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