भोपाल की सड़कों पर उतरीं मंत्री-सांसद और बीजेपी कार्यकर्ता:जन आक्रोश महिला पद यात्रा में सीएम भी शामिल, बोले- नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती
लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पास नहीं हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश बीजेपी की जन आक्रोश महिला पद यात्रा शुरू हो गई है। भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत मंत्री- सांसद और बीजेपी महिला मोर्चा की नेता रोशनपुरा चौराहे की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- नारी सब भूल सकती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। संसद में बहनों के हक पर डाका डालने के खिलाफ वे आज भोपाल की सड़कों पर लड़ने आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संसद में हमारे पास दो तिहाई आंकड़ा भले न हो लेकिन हमारे पास इच्छाशक्ति की कमी नहीं है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकार का बिल गिरने पर खुशियां मनाई। जश्न मनाया। प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती थीं कि मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं। लेकिन वह बड़ी-बड़ी बातें कहां गईं, जब आपने बहनों के अधिकारों को फांसी देने का काम किया। राहुल गांधी के पिताजी ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू कर बहनों के अधिकारों पर डाका डाला था। यह कांग्रेस का अतीत है। बहनों के अधिकार को कुचलने के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे। मुख्यमंत्री ने ये बात भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड में जन आक्रोश महिला पद यात्रा के मंच से कही। इसका आयोजन बीजेपी ने महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाने के विरोध में किया है। अपडेट्स… देखिए, तस्वीरें…
मारवाड़ में मानसून का देसी संकेत, 200 साल पुरानी घड़ा परंपरा से लगाया बारिश का अनुमान
Marwar Rain Prediction: मारवाड़ के तिंवरी क्षेत्र में हाली अमावस्या पर सदियों पुरानी घड़ा परंपरा एक बार फिर किसानों की उम्मीदों का केंद्र बनी. करीब 200 साल पुरानी इस अनोखी परंपरा में पांच घड़ों के जरिए मानसून और बारिश का अनुमान लगाया जाता है. चार घड़े ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण और भाद्रपद महीनों का प्रतीक माने जाते हैं, जबकि बीच का घड़ा आकाश का प्रतिनिधित्व करता है. पूजा-अर्चना के बाद घड़ों में धान और पानी भरकर इंद्र देव का स्मरण किया गया. इसके बाद घड़ों के फूटने के समय के आधार पर बारिश का आकलन किया गया. ग्रामीणों का मानना है कि कई बार यह अनुमान वास्तविक मौसम के काफी करीब साबित हुआ है. आधुनिक दौर में भी किसान इस परंपरा को आस्था, अनुभव और खेती की उम्मीद से जोड़कर निभा रहे हैं. इस बार भी अच्छे मानसून के संकेत मिलने से किसानों में उत्साह देखा गया.
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