Trump Attack Cuba: ट्रंप ने अगला टारगेट किया सेट! क्या यहां भी होंगे वेनेजुएला जैसा हालात?
ईरान के बाद क्या क्यूबा का नंबर है? इस खबर से ही दुनिया परेशान है क्योंकि जिस तरह से ट्रंप लगातार दुनिया के तमाम देशों को धमकियां दे रहे हैं. उससे अब अमेरिका के सहयोगी देश भी परेशान हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लेटिन अमेरिकी देश पर कब्जे की रणनीति क्यों बना रहे हैं ट्रंप? एक-एक डिटेल इस रिपोर्ट में आपको बताते हैं.
ट्रंप ने क्यूबा को धमकाना शुरू कर दिया है
ईरान पर हमला, वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण, ग्रीनलैंड पर कब्जा की धमकी और अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को धमकाना शुरू कर दिया है. अमेरिकी सत्ता को जब से डोनाल्ड ट्रंप ने संभाला है, पूरे जियोपॉलिटिक्स को बदल कर रख दिया है. पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची है. पूरी दुनिया टेंशन में है और अब एक देश को और टारगेट करने वाले हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. यूएसए टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक क्यूबा में पेंटागन के नेतृत्व में संभावित अभियान के लिए सैन्य योजना को चुपचाप गति दी जा रही है ताकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वहां हस्तक्षेप करने का आदेश दिए जाने की स्थिति में कारवाई की जा सके. यह निर्देश संयुक्त राज्य अमेरिका और क्यूबा के बीच हालिया तनाव में वृद्धि का संकेत दे रहा है.
ऐतिहासिक आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत
अमेरिका और क्यूबा ने स्वीकार किया है कि वो संकट से निकलने का रास्ता खोजने के शुरुआती चरण में हैं. लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष कितना समझौता करने को तैयार हैं. मार्च में यूएसए टुडेट ने खबर दी थी कि दोनों देश एक संभावित ऐतिहासिक आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत कर रहे थे जिससे संबंधों में सुधार आ सके. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारों इशारों में ही क्यूबा को लेकर बड़ा बयान दे दिया है. जब उनसे एक रिपोर्टर ने क्यूबा के खिलाफ एक्शन लेने का सवाल पूछा. क्यूबा और अमेरिका के बीच मुख्य विवाद
की क्यूबा क्रांति के बाद से विचारधारा वाली लड़ाई है. पूंजीवाद और कम्युनिस्ट के बीच की लड़ाई है जो वक्त के
साथ और आगे बढ़ती गई.
दो देशों के बीच साधारण मतभेद नहीं
क्यूबा और अमेरिका के संबंध दुनिया की सबसे जटिल और लंबे समय तक चले राजनीतिक संघर्षों में से एक रहे हैं. यह दुश्मनी केवल दो देशों के बीच साधारण मतभेद नहीं है. बल्कि इसमें शीत युद्ध की राजनीति, विचारधारा का टकराव और आर्थिक हित और रणनीतिक महत्व जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं. कैरेबियन देश क्यूबा पर 1898 से लेकर 1950 के बीच में अमेरिका का परोक्ष या अप्रत्यक्ष कंट्रोल रहा. दरअसल 1898 से पहले क्यूबा एक उपनिवेश था जिस पर स्पेन की अधिसत्ता चलती थी. लेकिन 1898 में युद्ध हुआ. अमेरिकन फोर्सेस ने क्यूबा की आजादी में हस्तक्षेप किया. स्वतंत्रता मिली और स्वतंत्रता के साथ ही क्यूबा परोक्ष रूप से अमेरिका का ही उपनिवेश बनता हुआ नजर आया. क्यूबा में जो उद्योग थे खासतौर पर अगर चीनी मिल की बात करें तो उनका स्वामित्व पूरी तरीके से अमेरिकन कंपनियों के कंट्रोल में था. यहां तक कि क्यूबा के अंदर एक नौसैनिक अड्डा भी अमेरिकन फोर्सेस ने बनाकर दिखाया. लेकिन 1950 के बाद स्थितियां काफी प्रतिकूल हो गई और 1950 के बाद क्यूबा में अमेरिका का हस्तक्षेप और अमेरिका का प्रभाव खत्म होता हुआ नजर आया. क्यूबा अमेरिका के प्रभाव से निकलना चाहता था. लेकिन यह इतना आसान नहीं था. 1950 के दशक में क्यूबा में फुलगेंशओ बतिषता की तानाशाही सरकार थी. जिसे अमेरिका का समर्थन हासिल था. लिहाजा कोई दिक्कत नहीं लेकिन असली परेशानी तब शुरू हुई जब 1959 में क्यूबा में सरकार बदली. 1959 में फिदेल कास्तो के नेतृत्व में एक क्रांति हुई जिसने फुलगेंशियो बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया.
ट्रंप ने ईरान को दी धमकी, बोले- 'नहीं माने तो हर पावर प्लांट और ब्रिज कर देंगे तबाह'
वाशिंगटन, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर धमकाया है। सीजफायर उल्लंघन का आरोप ईरान पर लगाते हुए कहा है कि अगर डील नहीं की तो देश का हरेक पावर प्लांट और ब्रिज तबाह कर दिया जाएगा।
ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर धमकी दी। उन्होंने ईरान पर संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान में शनिवार को गोली बरसा उन्होंने सीजफायर एग्रीमेंट को पूरी तरह से नकारा है। दावा किया कि उनमें से कई गोलियां एक फ्रेंच शिप और यूनाइटेड किंगडम के एक मालवाहक जहाज पर निशाना साधकर चलाई गईं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके साथ ही इस्लामाबाद में बातचीत की पुष्टि की। कहा कि उनके प्रतिनिधि सोमवार शाम को पाकिस्तान जाएंगे।
इसके साथ ही ट्रंप ने होर्मुज बंद करने के आईआरजीसी के दावे की भी खिल्ली उड़ाई। उनके अनुसार, ईरान की ये बात अजीब है क्योंकि अमेरिकी नाकेबंदी के चलते पहले ही स्ट्रेट बंद है और ऐसा करके वो अमेरिका की ही मदद कर रहे हैं। उन्हें (ईरान) ही इस मद में रोज 500 मिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ट्रंप ने डील और डील पर सहमति न बनने की सूरत में ईरान को बर्बाद कर देने वाली बात कही। उन्होंने कहा, हम एक बहुत ही सही और वाजिब डील दे रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि वे इसे मानेंगे क्योंकि, अगर वे नहीं मानते हैं, तो यूनाइटेड स्टेट्स ईरान में हर एक पावर प्लांट और हर एक ब्रिज को उड़ा देगा। अगर वे डील नहीं लेते हैं, तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी, क्योंकि मैं वह करूंगा जो पिछले 47 साल से अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति ईरान के साथ नहीं कर पाए।
28 फरवरी को इजरायल-यूएस की संयुक्त एयर स्ट्राइक शुरू हुई थी। 8 अप्रैल को दो हफ्ते की अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा की गई। इसके बाद स्थायी समाधान ढूंढने के लिए इस्लामाबाद में वार्ता का आयोजन किया गया जो बेनतीजा रही। इसके बाद से दूसरे दौर के संवाद की चर्चा थी। आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई थी लेकिन डॉन मीडिया आउटलेट ने पुलिस के हवाले रविवार को बताया कि विदेशी डेलीगेशन के राजधानी आगमन को देखते हुए इस्लामाबाद का रेड जोन ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। अब ट्रंप की पोस्ट ने इस्लामाबाद टॉक्स 2 की तस्दीक कर दी है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















