बाजार की पाठशाला: अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की सोच रहे हैं? जानिए 24 कैरेट और 22 कैरेट गोल्ड की शुद्धता पहचानने के ये आसान तरीके
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू और जैन धर्म में बेहद शुभ दिन माना जाता है। इस वर्ष रविवार यानी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी निवेश या शुभ कार्य कभी कम नहीं होता और लगातार बढ़ता रहता है।
इसीलिए, इस दिन सोना खरीदना अक्षय धन यानी कभी न खत्म होने वाली संपत्ति का संकेत माना जाता है। साथ ही, सोने को मां लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है, इसलिए इसे घर में लाना समृद्धि का प्रतीक समझा जाता है। सोना एक ऐसा निवेश भी है जो समय के साथ अपनी कीमत बनाए रखता है और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा देता है।
यही कारण है कि अक्षय तृतीया नजदीक आते ही देश भर में सोने की खरीदारी बढ़ने लगती है। लेकिन सोना खरीदते समय इसकी असली पहचान और शुद्धता जांचना बेहद जरूरी होता है। सही जानकारी के बिना कई बार लोग सोने की जगह गोल्ड-प्लेटेड या कम शुद्धता वाला सोने का आभूषण खरीद लेते हैं। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप सुरक्षित और समझदारी भरी खरीदारी कर सकते हैं।
जानकारों के मुताबिक, सोना खरीदते समय सबसे पहले तीन जरूरी निशान जरूर देखें।
पहला है बीआईएस का लोगो, जो एक छोटा त्रिकोणीय निशान होता है और यह बताता है कि आभूषण भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा प्रमाणित है।
दूसरा है शुद्धता और फाइननेस, जिसमें 22के916 का मतलब होता है कि उसमें 91.6 प्रतिशत सोना है, जबकि 18के750 का मतलब 75 प्रतिशत शुद्धता होता है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण है एचयूआईडी नंबर, जो 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है और हर ज्वेलरी के लिए यूनिक होता है।
इसके साथ ही, आज के डिजिटल दौर में सोने की शुद्धता की जांच आप अपने मोबाइल से भी कर सकते हैं। इसके लिए सरकार का बीआईएस केयर ऐप डाउनलोड करें और उसमें वेरिफाई एचयूआईडी ऑप्शन में ज्वेलरी पर लिखा कोड डालें। इसके बाद आपको ज्वेलर का नाम, हॉलमार्किंग सेंटर, तारीख और शुद्धता की पूरी जानकारी मिल जाएगी। अगर ऐप में दी गई जानकारी और ज्वेलर के दावे में अंतर हो, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
इसके अलावा, सोने की शुद्धता जांचने के लिए आप ज्वेलर से कैरेट मीटर टेस्ट भी करवा सकते हैं। यह एक एक्सआरएफ मशीन होती है, जो बिना नुकसान पहुंचाए सोने में मौजूद धातुओं की सही जानकारी देती है। यह टेस्ट कुछ सेकंड में हो जाता है, इसलिए बिलिंग से पहले इसे अपने सामने करवाना आपका अधिकार है।
इसके अलावा, एक आसान तरीका मैग्नेट टेस्ट भी है। असली सोना चुंबक से चिपकता नहीं है। अगर आपका आभूषण मैग्नेट की ओर खिंचता है, तो उसमें दूसरी धातुओं की मात्रा ज्यादा हो सकती है।
जानकारों के अनुसार, सोना खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लेना भी बेहद जरूरी है। बिल में एचयूआईडी नंबर, सोने की शुद्धता, वजन (ग्राम में), उस दिन का गोल्ड रेट, मेकिंग चार्ज और जीएसटी का पूरा विवरण होना चाहिए। यह आपकी खरीद का सबसे मजबूत प्रमाण होता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे की जांच करेगी केंद्रीय टीम
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले की डभरा तहसील स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे की जांच के लिए केंद्र सरकार की एक टीम द्वारा जल्द ही जांच शुरू किए जाने की संभावना है, जिसमें कई श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस टीम में औद्योगिक सुरक्षा विभाग और बॉयलर निरीक्षक विभाग के अधिकारी शामिल हैं।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह टीम शनिवार को दिल्ली से सक्ती पहुंचकर हादसे की जांच करेगी। यह कदम राज्य के बॉयलर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसके आधार पर केंद्रीय स्तर पर जांच का फैसला लिया गया।
इधर, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस हादसे की अलग से जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए बिलासपुर संभाग के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
यह हादसा 14 अप्रैल को प्लांट के बॉयलर यूनिट-1 में हुआ था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, स्टीम पाइपलाइन से जुड़े पानी की सप्लाई पाइप के जोड़ में तकनीकी खराबी के कारण विस्फोट हुआ। इस हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और अलग-अलग अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है।
राज्य सरकार ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच में यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि हादसा कब और कैसे हुआ, इसके पीछे क्या कारण थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
आदेश के अनुसार, जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और इसे बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही अधिकारियों को निष्पक्ष और तेजी से जांच पूरी करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट में मुख्य बॉयलर निरीक्षक ने बताया कि फर्नेस के अंदर अत्यधिक ईंधन जमा होने से दबाव बढ़ गया, जिससे पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा और विस्फोट हुआ। सक्ती की फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) ने भी इस निष्कर्ष की पुष्टि की है और ईंधन के ओवरलोड को हादसे की मुख्य वजह बताया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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