अमेरिका का लक्ष्य चीन के साथ संतुलित व्यापार और निर्भरता पर है: ग्रीर
वॉशिंगटन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका, चीन के साथ एक संतुलित और नियंत्रित ट्रेड रिलेशनशिप बनाना चाहता है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने सांसदों से कहा कि वॉशिंगटन का लक्ष्य बीजिंग पर अपनी निर्भरता कम करना है, साथ ही दोनों आर्थिक ताकतों के बीच तनाव बढ़ने से भी बचना है।
कांग्रेस की एक कमेटी के सामने बोलते हुए ग्रीर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ (शुल्क) नीति से ट्रेड के तरीके बदलने लगे हैं, खासकर चीन के साथ, जो अब भी अमेरिका की इकोनॉमी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है।
उन्होंने कहा, “अमेरिका का सामानों का ट्रेड डेफिसिट 24 प्रतिशत कम हुआ है… और खास तौर पर चीन के साथ यह 30 प्रतिशत से ज्यादा घटा है, यानी हम धीरे-धीरे उस पर निर्भरता कम कर रहे हैं।”
ग्रीर ने बताया कि सरकार का लक्ष्य ऐसा ट्रेड सिस्टम बनाना है जो संतुलित हो और जिसमें दोनों तरफ से बराबरी हो।
उन्होंने कहा, हम ऐसा नतीजा चाहते हैं जो चीन के साथ संतुलित व्यापार और एक मैनेज्ड व्यापारिक संबंध की ओर ले जाए... ताकि कोई अचानक की दिक्कत न आए, तनाव न बढ़े, और यह सुनिश्चित हो सके कि व्यापारिक संबंध अमेरिकियों के फायदे के लिए हों।
साथ ही उन्होंने साफ किया कि अमेरिका चीन पर दबाव बनाए रखेगा, खासकर मार्केट एक्सेस और खरीद से जुड़े मुद्दों पर। अमेरिका चाहता है कि चीन, अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदे जैसे खेती से जुड़े प्रोडक्ट, हवाई जहाज और मेडिकल डिवाइस।
इसके अलावा, अमेरिका यह भी चाहता है कि उसे जरूरी चीजें मिलती रहें, जैसे दुर्लभ-पृथ्वी खनिज, जिन पर दुनिया काफी हद तक चीन पर निर्भर है।
ग्रीर ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमें दुर्लभ-पृथ्वी खनिज मिलते रहें, जिन पर दुनिया का बड़ा हिस्सा निर्भर करता है।”
सुनवाई के दौरान, फेंटानिल बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स की सप्लाई में चीन की भूमिका भी एक बड़ी चिंता के तौर पर सामने आई। ग्रीर ने कहा कि अमेरिका ने बीजिंग पर इन निर्यातों को रोकने का दबाव बनाने के लिए टैरिफ (आयात शुल्क) का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर किया है; उन्होंने यह भी बताया कि द्विपक्षीय बातचीत में इस मुद्दे को नियमित रूप से उठाया जाता है।
उन्होंने कहा कि जब भी हमारी चीन से बात होती है… हम उनसे कहते हैं कि फेंटानिल ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े केमिकल्स को भी कंट्रोल करें। उन्होंने माना कि इस मामले में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है।
यह मुद्दा जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत में भी उठेगा। ग्रीर के मुताबिक, इन बातचीत का मकसद रिश्तों में स्थिरता बनाए रखना और अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाना है।
दोनों पार्टियों के सांसदों ने माना कि अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी में चीन की भूमिका काफी अहम है।
रिपब्लिकन नेताओं ने इस नीति का समर्थन किया और कहा कि इससे देश में मैन्युफैक्चरिंग मजबूत हुई है और चीन पर निर्भरता कम हुई है।
वहीं, डेमोक्रेट नेताओं ने चेतावनी दी कि टैरिफ की वजह से अमेरिकी लोगों और बिजनेस पर ज्यादा खर्च का बोझ पड़ा है और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस रणनीति से वाकई नौकरियां और इंडस्ट्रियल ग्रोथ बढ़ी है या नहीं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
क्षेत्रीय अनिश्चितता के बीच खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों ने निभाई स्थिरता की अहम भूमिका: रिपोर्ट
अबू धाबी, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और अनिश्चितताओं के बीच खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासी एक “शांत लेकिन मजबूत ताकत” के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने ऊर्जा बाजार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और प्रवासी समुदायों में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समुदाय को आमतौर पर केवल रेमिटेंस और श्रम आंकड़ों के जरिए आंका जाता है, लेकिन इस बार उनकी भूमिका इससे कहीं आगे बढ़कर दिखाई दी। उन्होंने अपनी मजबूती, एकजुटता और संकट के समय सहयोग की भावना से न केवल मेजबान देशों बल्कि अन्य प्रवासियों को भी संभालने में अहम योगदान दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि संयुक्त अरब अमीरात इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र रहा, जिसने एक बार फिर खुद को अस्थिर क्षेत्र में स्थिरता के वैश्विक केंद्र के रूप में साबित किया। खाड़ी क्षेत्र में 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनमें से करीब 35 लाख केवल यूएई में हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक है, जिसने दशकों से अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत किया है और शहरों के निर्माण में योगदान दिया है।
हालिया तनाव के दौरान, जब यात्रा मार्ग प्रभावित हुए, संघर्ष की आशंका बढ़ी और गलत सूचनाएं फैलने लगीं, तब भारतीय समुदाय के नेटवर्क ने तेजी से सक्रिय होकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार, अनौपचारिक सहायता समूह, व्यापारिक संगठन और रेजिडेंट वेलफेयर नेटवर्क तुरंत जुट गए। उन्होंने फंसे हुए श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की और खाड़ी क्षेत्र के भीतर स्थानांतरण के लिए परिवहन समन्वय किया।
इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों ने जरूरी सेवाओं को सुचारू बनाए रखा। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय डॉक्टरों और नर्सों ने अस्पतालों की सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रखीं, जबकि लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और खुदरा क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीयों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित नहीं होने दिया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ऊर्जा ढांचे और बंदरगाह संचालन में भारतीय विशेषज्ञता ने खाड़ी देशों की महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई, जिसका असर केवल इन देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा।
आर्थिक योगदान से परे, इस दौरान मानवीय पहल सबसे उल्लेखनीय रही। भारतीय प्रवासियों ने मिलकर दैनिक मजदूरों, नए आए लोगों और रोजगार अनिश्चितता का सामना कर रहे लोगों की मदद की। सामुदायिक रसोई, आपातकालीन फंड और स्वयंसेवी नेटवर्क जरूरतमंदों के लिए सहारा बने।
यूएई में भारतीय स्कूलों और सांस्कृतिक संगठनों ने भी समन्वय के लिए अपने दरवाजे खोले। डिजिटल युग में फैल रही गलत सूचनाओं के बीच समुदाय के नेताओं ने सही जानकारी फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे घबराहट को रोका जा सका।
रिपोर्ट में कहा गया कि अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में यह “लोगों द्वारा संचालित स्थिरता” का एक प्रभावशाली मॉडल है, जो दिखाता है कि विदेशों में किसी देश की ताकत केवल उसकी कूटनीति से नहीं, बल्कि उसके लोगों के चरित्र से भी मापी जाती है।
--आईएएनएस
डीएससी
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