ताइवान स्ट्रेट से गुजरा जापानी विध्वंसक युद्धपोत, चीन ने जताया विरोध
टोक्यो, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल (एमएसडीएफ) का डेस्ट्रॉयर जहाज जे एस इकाज़ुची शुक्रवार को ताइवान स्ट्रेट से होकर गुजरा।
जापान की प्रमुख न्यूज एजेंसी क्योडो के मुताबिक, टोक्यो पहले इस रास्ते से अपने जहाज भेजने से बचता था, ताकि चीन को उकसाया न जाए। लेकिन सितंबर 2024 में साजानामी नाम का डेस्ट्रॉयर ऐसा करने वाला पहला जहाज बना। इसके बाद फरवरी और जून 2025 में भी दो जापानी जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे।
क्योडो समाचार एजेंसी ने बताया प्रधानमंत्री साने ताकाइची के पिछले अक्टूबर में पदभार संभालने के बाद यह इस तरह का पहला मामला है। इससे दोनों एशियाई पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में और तनाव आ सकता है, जो नवंबर में ताइवान से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति के बारे में उनकी टिप्पणियों के बाद से ही बिगड़ गए थे।
यह भी बताया गया कि यह जहाज फिलीपींस में होने वाले बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यास “बालिकातन” में हिस्सा लेने जा रहा है, जो सोमवार से शुरू होकर आठ मई तक चलेगा।
वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जापान की ये कार्रवाई उकसाने वाली है। उन्होंने दोहराया कि ताइवान का मुद्दा एक “रेड लाइन” है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए।
चीन की न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में जापान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जापानी जहाज का इस रास्ते से गुजरना ताइवान में अलगाववादी ताकतों को गलत संकेत देता है। उन्होंने जापान से कहा कि वह सही रास्ते पर लौटे, “वन चाइना” नीति का पालन करे और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का सम्मान करे। साथ ही उन्होंने कहा कि चीनी सेना किसी भी बाहरी दखल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार और सतर्क है।
चीन के ईस्टर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता शू चेंगहुआ ने बताया कि पीएलए (चीनी सेना) ने जहाज पर नजर रखने के लिए हवाई और नौसेना संसाधन तैनात किए हैं, ताकि हालात पर पूरा नियंत्रण बना रहे।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इजरायल-लेबनान सीजफायर के बाद आईडीएफ ने हटाए ज्यादातर प्रतिबंध
यरूशलम, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि उसने ईरान और लेबनान मोर्चे पर चल रहे युद्ध की वजह से लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया है। ये प्रतिबंध लेबनान में सीजफायर (युद्धविराम) शुरू होने के बाद हटाए गए।
नए नियम शुक्रवार शाम चार बजे (इजरायल समय) से लागू हो गए। अब देश के ज्यादातर इलाकों में लोगों के इकट्ठा होने की कोई सीमा नहीं है। हालांकि, लेबनान की उत्तरी सीमा के पास के इलाकों में अभी भी शनिवार शाम तक अधिकतम 1,000 लोगों के जुटने की सीमा रहेगी।
इन प्रतिबंधों के हटने से अब ज्यादातर जगहों पर स्कूल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद के आयोजन बिना किसी रोक-टोक के हो सकेंगे।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच दस दिन का युद्धविराम गुरुवार और शुक्रवार की आधी रात से लागू हो गया। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया था। यह समझौता इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच एक महीने से ज्यादा समय से चल रही हिंसा को रोकने के लिए किया गया है, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने शुक्रवार को कहा कि सीजफायर के बावजूद इजरायली सेना उन सभी इलाकों पर कब्जा बनाए रखेगी जिन्हें उसने “साफ करके अपने नियंत्रण में लिया है।” उन्होंने साफ किया कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि जमीनी ऑपरेशन और लेबनान में किए गए हमलों से “काफी नतीजे” मिले हैं, लेकिन अभी काम पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने इस बात को दोहराया कि हिज़्बुल्लाह को निहत्था करना, चाहे वह सैन्य तरीकों से हो या राजनीतिक तरीकों से, इस अभियान का मुख्य मकसद बना रहेगा।
इससे पहले, इजरायली सेना के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दक्षिणी लेबनान के लोगों को लितानी नदी के दक्षिण वाले इलाकों में वापस न लौटने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वहां अभी भी इजरायली सेना मौजूद है क्योंकि हिज़्बुल्लाह की गतिविधियां जारी हैं।
वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि सीजफायर के दौरान इजरायल दक्षिणी लेबनान में दस किलोमीटर का एक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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