IndiGo Air Taxi: ट्रैफिक जाम की टेंशन खत्म, अब हवा में उड़कर पहुंचेंगे ऑफिस; इंडिगो ने Air Taxi में लगाया पैसा
IndiGo Air Taxi: भारत के बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक जाम एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जिससे हर कोई रोजाना जूझता है. चाहे दिल्ली की सड़कें हों या बेंगलुरु का ट्रैफिक, ऑफिस पहुंचने या एयरपोर्ट जाने में घंटों बर्बाद होना आम बात है. लेकिन अब इस समस्या का एक हाईटेक समाधान सामने आया है. भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने एक भारतीय स्टार्टअप 'सरला एविएशन' में निवेश किया है, जो देश में एयर टैक्सी सेवा शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. इस सेवा के शुरू होने से दिल्ली से गुरुग्राम या जेवर से ग्रेटर नोएडा का सफर घंटों के बजाय चंद मिनटों में पूरा हो सकेगा.
ट्रैफिक की समस्या का हवाई समाधान
महानगरों में सफर करना आज के समय में किसी चुनौती से कम नहीं है. सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें और ऊपर से बढ़ता प्रदूषण, इन सबने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है. सरला एविएशन इसी समस्या को हल करने के लिए इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी लाने की तैयारी में है. इंडिगो वेंचर्स ने इस स्टार्टअप में करीब 10 करोड़ रुपये का रणनीतिक निवेश किया है. कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना है जो 0 से 300 किलोमीटर के दायरे में लोगों को सुरक्षित और तेजी से उनके गंतव्य तक पहुंचा सके. यह सेवा विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं.
#IndiGo has made a strategic equity investment in Bengaluru-based #SarlaAviation for building India's first nationwide air taxi network. pic.twitter.com/Riq1VHeELh
— News IADN (@NewsIADN) April 16, 2026
प्रमुख शहरों में बदलेगी सफर की तस्वीर
कल्पना कीजिए कि आप दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते हैं और आपको ग्रेटर नोएडा के ऑटो एक्सपो जाना है. कार से जाने पर आपको ट्रैफिक के कारण घंटों लग सकते हैं, लेकिन एयर टैक्सी से आप इसे बहुत कम समय में तय कर लेंगे. इसी तरह बेंगलुरु में एयरपोर्ट से इलेक्ट्रॉनिक सिटी या इंदिरानगर जाने के लिए अब सड़क के लंबे रास्तों पर निर्भर नहीं रहना होगा. मुंबई जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में भी बीकेसी जैसे बिजनेस हब तक पहुंचना अब आसान हो जाएगा. यह तकनीक न केवल समय बचाएगी बल्कि शहरों के बीच की दूरी को भी मानसिक रूप से कम कर देगी.
मेडिकल इमरजेंसी में मिलेगी बड़ी मदद
एयर टैक्सी सेवा सिर्फ दफ्तर जाने या एयरपोर्ट ट्रांसफर तक सीमित नहीं रहेगी. इसका सबसे बड़ा फायदा मेडिकल इमरजेंसी के दौरान देखने को मिलेगा. अक्सर गंभीर मरीजों को एक शहर से दूसरे शहर के बड़े अस्पताल में ले जाने के लिए एंबुलेंस का सहारा लिया जाता है, जो ट्रैफिक में फंस सकती है. लेकिन एयर टैक्सी के जरिए मरीज को बहुत कम समय में अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा. पुणे से मुंबई या दिल्ली के पास के शहरों से बड़े अस्पतालों तक पहुंचने के लिए यह सेवा जीवन रक्षक साबित हो सकती है. मध्यम दूरी की यात्रा के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव होगा.
क्या है इंडिगो का नजरिया?
हालांकि सरला एविएशन ने इंडिगो के निवेश को लेकर काफी उत्साह दिखाया है, लेकिन इंडिगो ने इस पर संभलकर प्रतिक्रिया दी है. इंडिगो वेंचर्स का कहना है कि यह एक सामान्य निवेश है जो वे विभिन्न स्टार्टअप्स में करते रहते हैं. कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अभी सीधे तौर पर किसी ईवीटीओएल (eVTOL) प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर रहे हैं. फिर भी, एक बड़ी एयरलाइन का इस क्षेत्र में पैसा लगाना यह दर्शाता है कि भविष्य में शहरी विमानन का बाजार काफी बड़ा होने वाला है.
मध्यम दूरी की यात्रा की बड़ी चुनौती
भारत ने पिछले कुछ दशकों में रेलवे, हाईवे और एक्सप्रेसवे का बड़ा जाल बिछाया है. लेकिन आज भी शहरों के अंदर 30 से 50 किलोमीटर की यात्रा या दो नजदीकी शहरों के बीच 100-200 किलोमीटर का सफर तय करना काफी थकाऊ होता है. सरला एविएशन के मुताबिक, देश की इसी समस्या को दूर करने के लिए एयर टैक्सी डिजाइन की गई है. यह दूरी कार के लिए बहुत लंबी और पारंपरिक हवाई जहाज के लिए बहुत कम होती है. ऐसे में एयर टैक्सी इस खाली जगह को भरने का काम करेगी और लाखों भारतीयों के कीमती घंटों को बर्बाद होने से बचाएगी.
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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में टैरिफ बड़ा मुद्दा, सेब आयात पर चर्चा जारी: ग्रीर
वाशिंगटन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने दफ्तर के बजट पर एक कांग्रेस सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा कि अमेरिका पिछले एक साल से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि एक “पारस्परिक व्यापार ढांचा” तैयार किया जा सके। इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर सामने आया है।
उन्होंने कहा, “हम पिछले एक साल से भारतीयों के साथ काम कर रहे हैं। मैंने इस हफ्ते उनके राजदूत से भी मुलाकात की ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।”
उन्होंने कहा कि एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका का दौरा करने वाला है।
उन्होंने यह भी बताया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी बड़ी समस्या हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की पकड़ कमजोर हुई है। “हमने सेब के बारे में कई बार बात की है। मैंने खुद यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है,” उन्होंने कहा, जिससे साफ है कि यह मामला उच्च स्तर पर भी उठाया गया है।
अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत की ओर से सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो एक बड़ा उदाहरण है। इस वजह से अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी भारत के बाजार में काफी कम हो गई है। 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है। इस बीच ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।
ग्रीर ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि एक ऐसा संतुलित समझौता हो जिसमें अमेरिकी निर्यातकों को भी उन बाजारों में बराबर मौका मिले जहां भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।
उन्होंने कहा, “अगर भारत सेब आयात करता है, तो हम चाहते हैं कि वह अमेरिका से भी सेब खरीदे,” लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका भारत के घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा है।
ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापक रणनीति के तहत टैरिफ का इस्तेमाल करके व्यापार समझौतों को अपने पक्ष में करने और व्यापार संबंधों को नए तरीके से बनाने की कोशिश कर रहा है।
ग्रीर ने सांसदों को बताया कि अमेरिका कई देशों के साथ समझौते कर चुका है और अब अमेरिकी किसानों और उद्योगों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने पर काम कर रहा है।
सांसदों ने कहा कि टैरिफ की वजह से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ी है, और साथ ही दूसरे देशों की तरफ से जवाबी कदमों ने निर्यात बढ़ाने को और मुश्किल बना दिया है।
अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए भारत एक बड़ा अवसर भी है और एक बड़ी चुनौती भी।
सांसदों ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ कम नहीं किए गए, तो अमेरिकी निर्यातक उन देशों से और पीछे रह जाएंगे जिन्हें भारत के साथ बेहतर व्यापारिक समझौते मिले हुए हैं।
ग्रीर ने जोर देकर कहा कि बातचीत अभी चल रही है और अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, “इन बातचीत में तब तक कुछ तय नहीं होता, जब तक सब कुछ फाइनल न हो जाए।”
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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