महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के बीपीओ (BPO) सेंटर में चल रहे गंभीर विवाद के बाद कामकाज को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण के चौंकाने वाले खुलासों के बाद, कंपनी ने गुरुवार को निर्देश जारी किया कि सभी कर्मचारी अगले आदेश तक घर से काम (Work From Home) करेंगे।
TCS सेंटर तब जाँच के दायरे में आया जब एक बड़ा घोटाला सामने आया, जिसमें यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप लगे थे। इसके बाद एक विशेष जाँच दल (SIT) ने जाँच शुरू की। कम से कम आठ महिला कर्मचारी सामने आई हैं, जिन्होंने कई सालों से चले आ रहे यौन उत्पीड़न और ज़बरन धर्मांतरण के पैटर्न का आरोप लगाया है। आरोपों में यह भी दावा किया गया है कि स्टाफ़ पर उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ कुछ खास तरह का खाना खाने और धार्मिक रीति-रिवाजों में हिस्सा लेने का दबाव डाला जाता था।
नासिक के पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक के अनुसार, जाँच से पता चलता है कि सात पुरुष आरोपी काम की जगह पर एक संगठित गिरोह की तरह काम करते थे और कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे। उन्होंने कहा, "ये सातों पुरुष कर्मचारी ज़्यादातर मामलों में सह-आरोपी हैं, जिससे पता चलता है कि उन्होंने एक समूह के तौर पर काम किया।"
पुलिस ने अब तक नौ FIR दर्ज की हैं, जिनमें से एक एक पुरुष कर्मचारी ने दर्ज कराई है, जिसमें उसने धार्मिक उत्पीड़न और धर्मांतरण की कोशिश का आरोप लगाया है। आठ आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें सात पुरुष और एक महिला शामिल हैं, जबकि एक अन्य महिला आरोपी अभी भी फ़रार है।
गिरफ़्तार किए गए पुरुष आरोपियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ़ अत्तार, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफ़ी शेख, आसिफ़ आफ़ताब अंसारी और शाहरुख शेख के तौर पर हुई है।
पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी ऊँचे पदों पर थे, जैसे टीम लीडर, और कथित तौर पर उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके सहकर्मियों को परेशान किया। अधिकारी ने आगे बताया कि महिला आरोपियों में से एक, जो HR हेड थी, ने कथित तौर पर एक पीड़ित को शिकायत दर्ज कराने से रोका। उसने पीड़ित से कहा कि "ऐसी चीज़ें होती रहती हैं" और आरोपियों का पक्ष लिया। एक अन्य महिला का नाम धार्मिक उत्पीड़न के एक मामले में आया है।
पुलिस ने कई एजेंसियों से संपर्क किया है, जिनमें राज्य खुफिया विभाग (SID), आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) शामिल हैं, ताकि किसी भी संभावित बड़े जुड़ाव या फंडिंग के पहलुओं की जाँच की जा सके। कार्णिक ने कहा, "जैसे ही हमें सबूत मिलेंगे, हम किसी नतीजे पर पहुँच पाएँगे।" उन्होंने बताया कि पहली शिकायतकर्ता शुरू में हिचकिचा रही थी, लेकिन पुलिस की काउंसलिंग और मदद मिलने के बाद, और भी पीड़ित सामने आए, जिसके चलते कई FIR दर्ज की गईं। कर्मचारियों से बातचीत को आसान बनाने और उन्हें शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से, ऑफिस में एक महिला डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस और महिला कर्मियों को भी तैनात किया गया था।
इस बीच, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और 18 अप्रैल को TCS BPO यूनिट में मौके पर जाकर जांच करने के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।
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भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों ने समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर गंभीर विचार विमर्श किया है। मंगलवार से आरंभ हुए कमांडरों के सम्मेलन में नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने अपने संबोधन में वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों को अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज समुद्री सुरक्षा का वातावरण एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां अनेक कारक एक साथ सक्रिय हो रहे हैं। इनमें समानांतर संघर्ष, विरोधी ताकतों की बढ़ती क्षमता, वैश्विक संस्थाओं का कमजोर होना और गैर राज्य तत्वों के लिए हथियार तथा संसाधन जुटाने की लागत में कमी जैसे तत्व शामिल हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर समुद्री क्षेत्र को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और संवेदनशील बना दिया है, जिससे भारतीय नौसेना को प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एडमिरल त्रिपाठी ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उत्पन्न अस्थिरता का सीधा प्रभाव समुद्री यातायात पर पड़ रहा है। उन्होंने इसे इस बात का स्पष्ट संकेत बताया कि सुरक्षा अब सीमाओं से बंधी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न संघर्ष के परिणाम दूर दराज के देशों तक महसूस किए जा सकते हैं। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि संघर्ष से दूरी का अर्थ यह नहीं है कि उसके प्रभावों से भी दूरी बनी रहेगी।
उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन में आए परिवर्तन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विश्व व्यवस्था प्रतिस्पर्धा के चरण से आगे बढ़कर सीधे संघर्ष की स्थिति में प्रवेश कर चुकी है। यह बदलाव केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़ा जाता, बल्कि विचारों और कथाओं के माध्यम से भी लड़ा जा रहा है, जिसे उन्होंने कथा युद्ध का नाम दिया।
सम्मेलन के दौरान कमांडरों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इनमें विभिन्न सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, युद्ध क्षमता में वृद्धि, जहाजों और उपकरणों के रखरखाव तथा मरम्मत, बहु आयामी सुरक्षा उपाय, प्रशिक्षण व्यवस्था, विदेशी सहयोग, मानव संसाधन प्रबंधन और स्वदेशीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नौसेना की कार्य क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में योजनाएं तैयार की गईं।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना की तैनाती पर भी विशेष ध्यान दिया गया। हम आपको बता दें कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से आता है, इसलिए इन मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी से निकलने वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नौसेना की उपस्थिति ने न केवल जहाजों की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि भारतीय नाविकों के मनोबल को भी बढ़ाया है। युद्धपोतों की सक्रिय तैनाती से यह संदेश गया है कि भारत अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सम्मेलन में एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी बताया कि पिछले पांच से दस वर्षों में नौसेना के संचालन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समुद्र की सतह, जल के नीचे और आकाश तीनों क्षेत्रों में युद्ध क्षमता को निरंतर मजबूत किया गया है। इसके लिए आधुनिक उपकरणों का समावेश, आधारभूत ढांचे का विकास, प्रभावी रखरखाव प्रणाली और स्वदेशी तकनीकी विकास जैसे कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयास नौसेना की दीर्घकालिक मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। स्वदेशी तकनीक और उपकरणों के उपयोग से न केवल लागत में कमी आती है, बल्कि आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी बढ़ती है।
देखा जाये तो यह स्पष्ट है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय नौसेना को सतर्क, सक्षम और समन्वित रहना होगा। समुद्री सुरक्षा अब केवल रक्षा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय हितों से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है। इसलिए माना जा रहा है कि नौसेना की रणनीतिक तैयारी और दूरदर्शिता आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
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