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गर्मियों में खतरनाक डायबिटीज को लेकर लापरवाही, संतुलित आहार और सही कैलोरी काउंट से बनेगी बात

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान के साथ-साथ डायबिटीज की समस्या भी बढ़ जाती है। देश में डायबिटीज के मरीज बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ऐसे में गर्मी में लापरवाही से यह और खतरनाक हो सकती है। अच्छी खबर यह है कि सही खान-पान और सही कैलोरी काउंट से इसे बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, गर्मियों में सही खान-पान और कैलोरी काउंट पर ध्यान देकर डायबिटीज को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार और उचित मात्रा में कैलोरी का सेवन डायबिटीज प्रबंधन का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। सही कैलोरी काउंट ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और दवाओं की जरूरत को भी कम कर सकता है।

डायबिटीज में ब्लड शुगर बढ़ने से आंखों की समस्या, किडनी खराब होना, नसों में दिक्कत और दिल की बीमारी जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। गर्मियों में पसीना ज्यादा आने और डिहाइड्रेशन की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है। इसलिए लापरवाही बिल्कुल न करें।

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अपने भोजन की थाली का आधा हिस्सा सब्जियों से भरें। एक चौथाई हिस्सा दाल या प्रोटीन से भरें बाकी हिस्सा साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस से भरें। ज्यादा चावल, आलू, मैदा और मीठे पदार्थों से परहेज करें। फाइबर युक्त आहार, पालक, ब्रोकली, भिंडी, लौकी, करेला और दालें रोजाना खाएं।

वहीं, चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जूस और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से ना कहें। फल का सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके लिए सेब, अमरूद, पपीता, जामुन व मौसमी फल अच्छे विकल्प हैं। हालांकि, मिठास वाले फलों के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

खाने का समय भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए चार्ट बनाएं—नाश्ता सुबह 8-9 बजे के बीच, दोपहर का भोजन 1 से 2 बजे के बीच लें, व रात का भोजन 7 से 8 बजे के बीच करें। बीच में भूख लगे तो कुछ हल्का स्नैक ले सकते हैं, जैसे मुट्ठी भर मखाना या दही। नियमित 30 मिनट की सैर, हल्का व्यायाम और तनाव कम करना भी डायबिटीज नियंत्रण में मदद करता है। अगर ब्लड शुगर बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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खाड़ी संकट से भारत के रेमिटेंस पर दस अरब डॉलर तक नुकसान की आशंका: वी. अनंत नागेश्वरन

वॉशिंगटन, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत में आने वाले विदेशों से पैसे पर दबाव पड़ सकता है। इससे भारत को करीब दस अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

उन्होंने यह बात यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कही। नागेश्वरन ने बताया कि भारत को मिलने वाले विदेश से भेजे गए पैसों पर उन देशों की राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी का सीधा असर पड़ सकता है, जहां भारतीय कामगार रहते हैं।

भारत को वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला था, जो दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है। इसमें करीब आधा हिस्सा खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय श्रम‍िकों से आया था।

उन्होंने कहा क‍ि अगर सामान्य आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू होने में समय लगता है, तो खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस पर कुछ असर जरूर पड़ेगा।

उन्होंने अनुमान लगाया कि यह असर हालात की गंभीरता और कितने समय तक दिक्कत रहती है, इस पर निर्भर करेगा और नुकसान पांच अरब डॉलर से दस अरब डॉलर तक हो सकता है।

नागेश्वरन ने कहा कि यह जोखिम कई वजहों से हैं, जैसे कि संघर्ष की वजह से श्रम‍िकों का लौटना, मेजबान देशों में आर्थिक गतिविधियों का धीमा होना, और रोजगार की स्थिति को लेकर अनिश्चितता।

खाड़ी क्षेत्र भारतीय प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत बड़ा काम का केंद्र है, खासकर निर्माण, सेवा क्षेत्र और ऊर्जा जैसे सेक्टरों में। अगर लंबे समय तक दिक्कत रहती है, तो लोगों की कमाई कम हो सकती है और काम पर लौटने में भी देरी हो सकती है।

यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में व्यापार, ऊर्जा बाजार और पूंजी प्रवाह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नागेश्वरन ने कहा कि इन बाहरी झटकों का भारत पर असर जिन चार बड़े रास्तों से हो सकता है, उनमें रेमिटेंस भी एक है।

इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार अच्छा है और अलग-अलग स्रोतों से पैसा आ रहा है।

उन्होंने कहा क‍ि हम इस स्थिति में एक मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार के साथ प्रवेश कर रहे हैं।

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी आबादी वाला देश है, और लाखों भारतीय विदेशों में काम करते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के देश भारतीय कामगारों के लिए सबसे बड़े गंतव्यों में से एक हैं, इसलिए भारत के रेमिटेंस में उनकी बड़ी हिस्सेदारी है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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