सैयारा के बाद दोबारा साथ आई हिट जोड़ी अहान पांडे और अनीत पड्डा, मोहित सूरी की लव स्टोरी में करेंगे काम
सैयारा फिल्म के स्टार अहान पांडे और अनीत पड्डा डायरेक्टर मोहित सूरी के साथ नजर आए हैं और इस रीयूनियन को देख फैंस काफी खुश हैं क्योंकि तीनों फिर एक लव स्टोरी लेकर आ रहे हैं।
टाटा ट्रस्ट में बड़ा विवाद: पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने लगाए गंभीर आरोप, गवर्नेंस पर दर्ज कराई आपत्ति
मुंबई। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के संचालन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने ट्रस्ट के बोर्ड की संरचना, ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति और संभावित हितों के टकराव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बता दें कि एसडीटीटी, सर रतन टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर टाटा संस को नियंत्रित करता है, इसलिए इस विवाद को कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिस्त्री का आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ फैसले एक अवैध रूप से गठित बोर्ड द्वारा लिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये फैसले महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।
ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति पर विवाद
मिस्त्री की आपत्ति का मुख्य मुद्दा ट्रस्टियों की नियुक्ति और कार्यकाल बढ़ाने को लेकर है। उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर 2024 को एक सर्वसम्मति प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में तय हुआ था कि सभी ट्रस्टी एक-दूसरे के कार्यकाल को बढ़ाने पर सहमत होंगे, ताकि ट्रस्ट समानता और निरंतरता के साथ आगे बढ़ सके। यह निर्णय दिवंगत रतन टाटा की सोच और दृष्टि को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। मिस्त्री के अनुसार, इस प्रस्ताव का एक उद्देश्य यह भी था कि ट्रस्टी बिना किसी डर के काम कर सकें और उनके फैसलों का असर उनके कार्यकाल पर न पड़े।
चयनात्मक कार्रवाई और निष्कासन का आरोप
हालांकि मिस्त्री ने आरोप लगाया कि इस प्रस्ताव को समान रूप से लागू नहीं किया गया। उनका दावा है कि केवल उनके मामले में इस नियम का उल्लंघन किया गया। उन्होंने कहा कि नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने के खिलाफ वोट किया और उन्हें ट्रस्ट से हटा दिया। मिस्त्री ने इस कार्रवाई को “दुर्भावनापूर्ण और अवैध” बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में पुनर्नियुक्ति के लिए कोई पारदर्शी और समान प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का आरोप
मिस्त्री ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट में किए गए कुछ बदलावों की जानकारी समय पर चैरिटी कमिश्नर को नहीं दी गई। महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत ऐसे बदलावों की सूचना देना अनिवार्य होता है। मिस्त्री का कहना है कि इस तरह की चूक से ट्रस्ट के बाद में लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल उठता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ट्रस्टियों की भागीदारी उस समय भी रही, जब वे आधिकारिक तौर पर ट्रस्टी नहीं थे। मिस्त्री की शिकायत में हितों के टकराव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ट्रस्टी, जैसे विजय सिंह, टाटा संस और अन्य समूह कंपनियों से भुगतान या कमीशन प्राप्त कर रहे थे। यह भुगतान उन्हें नामित निदेशक के रूप में मिला, लेकिन मिस्त्री ने सवाल उठाया कि क्या यह ट्रस्ट के ट्रस्टी के कर्तव्यों के अनुरूप है।
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