टाटा ट्रस्ट में बड़ा विवाद: पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने लगाए गंभीर आरोप, गवर्नेंस पर दर्ज कराई आपत्ति
मुंबई। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के संचालन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने ट्रस्ट के बोर्ड की संरचना, ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति और संभावित हितों के टकराव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बता दें कि एसडीटीटी, सर रतन टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर टाटा संस को नियंत्रित करता है, इसलिए इस विवाद को कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिस्त्री का आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ फैसले एक अवैध रूप से गठित बोर्ड द्वारा लिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये फैसले महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।
ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति पर विवाद
मिस्त्री की आपत्ति का मुख्य मुद्दा ट्रस्टियों की नियुक्ति और कार्यकाल बढ़ाने को लेकर है। उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर 2024 को एक सर्वसम्मति प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में तय हुआ था कि सभी ट्रस्टी एक-दूसरे के कार्यकाल को बढ़ाने पर सहमत होंगे, ताकि ट्रस्ट समानता और निरंतरता के साथ आगे बढ़ सके। यह निर्णय दिवंगत रतन टाटा की सोच और दृष्टि को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। मिस्त्री के अनुसार, इस प्रस्ताव का एक उद्देश्य यह भी था कि ट्रस्टी बिना किसी डर के काम कर सकें और उनके फैसलों का असर उनके कार्यकाल पर न पड़े।
चयनात्मक कार्रवाई और निष्कासन का आरोप
हालांकि मिस्त्री ने आरोप लगाया कि इस प्रस्ताव को समान रूप से लागू नहीं किया गया। उनका दावा है कि केवल उनके मामले में इस नियम का उल्लंघन किया गया। उन्होंने कहा कि नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने के खिलाफ वोट किया और उन्हें ट्रस्ट से हटा दिया। मिस्त्री ने इस कार्रवाई को “दुर्भावनापूर्ण और अवैध” बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में पुनर्नियुक्ति के लिए कोई पारदर्शी और समान प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का आरोप
मिस्त्री ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट में किए गए कुछ बदलावों की जानकारी समय पर चैरिटी कमिश्नर को नहीं दी गई। महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत ऐसे बदलावों की सूचना देना अनिवार्य होता है। मिस्त्री का कहना है कि इस तरह की चूक से ट्रस्ट के बाद में लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल उठता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ट्रस्टियों की भागीदारी उस समय भी रही, जब वे आधिकारिक तौर पर ट्रस्टी नहीं थे। मिस्त्री की शिकायत में हितों के टकराव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ट्रस्टी, जैसे विजय सिंह, टाटा संस और अन्य समूह कंपनियों से भुगतान या कमीशन प्राप्त कर रहे थे। यह भुगतान उन्हें नामित निदेशक के रूप में मिला, लेकिन मिस्त्री ने सवाल उठाया कि क्या यह ट्रस्ट के ट्रस्टी के कर्तव्यों के अनुरूप है।
दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत: आईएमएफ की ताजा रैंकिंग में छिना 5वां स्थान, जानें क्या है वजह
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत 2025 में एक स्थान फिसलकर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हालांकि, देश अब भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर बनाए हुए है। 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 3.92 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है, जिससे वह ब्रिटेन (4 ट्रिलियन डॉलर) और जापान (4.44 ट्रिलियन डॉलर) से पीछे रहा। अमेरिका 30.8 ट्रिलियन डॉलर के साथ शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि चीन 19.6 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। जर्मनी 4.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर है। इससे पहले 2024 में भारत 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ पांचवें स्थान पर था और ब्रिटेन उससे पीछे था। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब भारत ने रुपये के लिहाज से करीब 9% की नाममात्र वृद्धि दर्ज की है।
रुपये की कमजोरी से डॉलर जीडीपी पर असर
भारत की रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है। चूंकि वैश्विक रैंकिंग डॉलर में मापी जाती है, इसलिए रुपये की गिरावट ने भारत की डॉलर आधारित जीडीपी वृद्धि को धीमा कर दिया। आईएमएफ के अनुसार, रुपया 2024 में 84.6 प्रति डॉलर से गिरकर 2025 में 88.5 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा, नई जीडीपी सीरीज के तहत किए गए संशोधनों ने भी वृद्धि की रफ्तार को प्रभावित किया है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत की जीडीपी रुपये में 2024 के 318 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 2025 में 346.5 ट्रिलियन रुपये हो गई, लेकिन डॉलर में यह बढ़ोतरी सीमित रही। यानी घरेलू स्तर पर अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तुलना में इसका असर कम दिखा।
2027 से फिर रफ्तार, तीसरे स्थान की ओर बढ़त
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारत 2026 में भी छठे स्थान पर बना रह सकता है, लेकिन इसके बाद तेजी लौटने की संभावना है। 2027 तक भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर फिर चौथे स्थान पर पहुंच सकता है। उस समय भारत की जीडीपी 4.58 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जबकि ब्रिटेन की 4.47 ट्रिलियन डॉलर रह सकती है। इसके बाद 2028 में भारत जापान को भी पीछे छोड़ सकता है। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था 5.06 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि जापान की 4.74 ट्रिलियन डॉलर रह सकती है। हालांकि, संशोधित आईएमएफ अनुमान के अनुसार, भारत 2031 तक मजबूती से तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा, जब उसकी जीडीपी 6.79 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
सबसे तेज अर्थव्यवस्था का रुतबा बरकार
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वाला देश बना हुआ है। मध्यम अवधि में भारत की विकास दर 6% से अधिक रहने की उम्मीद है। 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, जिससे जर्मनी के साथ अंतर कम होगा। इसके बाद भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थायी रूप से जगह बना सकता है। इस दौरान अमेरिका 39 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर बना रहेगा, जबकि चीन 27.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा। कुल मिलाकर, ये आंकड़े दिखाते हैं कि अल्पकालिक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लंबी अवधि में मजबूत वृद्धि की राह पर बनी हुई है।
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