हीटवेव : सुरक्षा गाइडलाइन जारी, बढ़ते तापमान के बीच इन बातों का रखें ख्याल
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों में गर्मी की मार अभी से शुरू हो गई है। सुबह-शाम जहां मौसम सामान्य रहता है, वहीं दोपहर में तेज धूप और लू ने लोगों का घर से निकलना मुश्किल कर दिया है। बढ़ते तापमान और हीटवेव की वजह से लोगों को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बेहोशी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में अगर आर अगर आप किसी बड़े कार्यक्रम, मेले, खेल प्रतियोगिता या भीड़ वाले आयोजन में शामिल हो रहे हैं या उसकी तैयारी कर रहे हैं, तो गर्मी और लू से बचाव का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए सेहत के प्रति पहले से सतर्क रहना जरूरी है। अगर आप किसी कार्यक्रम का आयोजन करने का सोच रहे हैं तो स्थानीय मौसम विभाग से यह जरूर जान लें कि कहीं हीटवेव या ज्यादा ह्यूमिडिटी का अलर्ट तो नहीं है। अगर किसी दिन तापमान बहुत ज्यादा हो या हीटवेव की चेतावनी हो, तो कोशिश करनी चाहिए कि उस दिन आउटडोर कार्यक्रम न रखा जाए। अगर रखना ही पड़े तो समय का खास ध्यान रखना चाहिए।
आमतौर पर दिन का सबसे गर्म समय दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच होता है, इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि इस समय के दौरान कोई भी भारी गतिविधि या आउटडोर इवेंट न हो। कार्यक्रम को सुबह या शाम के समय रखना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
भीड़ वाले आयोजन में पानी की व्यवस्था सबसे जरूरी चीज होती है। हर 500 लोगों पर कम से कम एक साफ और सुरक्षित पानी का स्टॉल होना चाहिए। पानी की गुणवत्ता और सफाई का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए, ताकि किसी को पेट या पानी से जुड़ी बीमारी न हो।
इसके साथ ही जगह-जगह पर छांव बनाना बहुत जरूरी है, ताकि लोग सीधे धूप के संपर्क में न आएं। खुली धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर जल्दी गर्म हो जाता है और लोग बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए बैठने और आराम करने के लिए छायादार जगह जरूर होनी चाहिए।
भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों में कूलिंग और मिस्टिंग एरिया बनाना भी बहुत मददगार होता है। यहां पानी की हल्की फुहार या ठंडी हवा से लोगों को राहत मिलती है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और हीट स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।
आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि अगर किसी को लू लग जाए या हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें, जैसे तेज बुखार, चक्कर आना, उलझन या बेहोशी, तो तुरंत मेडिकल मदद उपलब्ध हो। इसके लिए एंबुलेंस और मेडिकल टीम तैयार रहनी चाहिए, ताकि मरीज को जल्दी से अस्पताल पहुंचाया जा सके। साथ ही, लोगों को उनकी स्थानीय भाषा में यह भी बताया जाना चाहिए कि हीट रिलेटेड बीमारियों के लक्षण क्या होते हैं और कब डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। इससे लोग खुद भी सतर्क रहेंगे और दूसरों की मदद भी कर पाएंगे।
अगर कोई व्यक्ति बेहोश हो जाए या उसकी हालत गंभीर हो, तो तुरंत 108 या 102 पर कॉल करना चाहिए।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
परफेक्ट पैरेंट बनने के चक्कर में बच्चों पर न करें कंट्रोल, ऐसे करें डील
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल बहुत से माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हर चीज में सबसे आगे हों, पढ़ाई में टॉप करें, हर काम सही करें और किसी भी तरह की गलती न करें। लेकिन इसी सोच के चक्कर में कई बार वे अनजाने में बच्चों पर काफी दबाव डाल देते हैं और उन्होंने बहुत ज्यादा कंट्रोल करने लगते हैं, जिससे बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत पर असर पड़ता है।
परफेक्ट बनने की कोशिश में कई माता-पिता बच्चों की हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखने लगते हैं कि वे क्या पढ़ रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, क्या खेल रहे हैं और क्या पहन रहे हैं। धीरे-धीरे यह कंट्रोल इतना बढ़ जाता है कि बच्चा खुद फैसले लेना बंद कर देता है। उसमें आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह हर बात के लिए माता-पिता पर निर्भर हो जाता है। यह स्थिति बच्चे के विकास के लिए ठीक नहीं होती।
बच्चों को भी गलती करने और उससे सीखने का मौका मिलना चाहिए। अगर हर बार माता-पिता ही सब कुछ तय करेंगे, तो बच्चा कभी खुद से सोचने और समझने की क्षमता नहीं विकसित कर पाएगा। इसलिए जरूरी है कि बच्चों पर पूरा कंट्रोल करने के बजाय उन्हें थोड़ा स्पेस दिया जाए।
पेरेंटिंग में सबसे जरूरी चीज है भरोसा। अगर आप अपने बच्चे पर भरोसा करेंगे, तो वह भी आपसे अपनी बातें शेयर करेगा। लेकिन अगर हर बात पर रोक-टोक होगी, तो बच्चा धीरे-धीरे आपसे चीजें छुपाने लगेगा। इसलिए बेहतर है कि बच्चों के साथ दोस्त की तरह उसके साथ पेश आएं। उससे पूछें कि उसका दिन कैसा रहा, उसे क्या अच्छा लगा और क्या नहीं।
इसके साथ ही बच्चों की भावनाओं को समझना भी बहुत जरूरी है। अगर बच्चा किसी बात से परेशान है, तो उसे तुरंत डांटने के बजाय उसकी बात सुनें। कई बार बच्चे चाहते हैं कि उनकी बातों को सुना जाए। ऐसे में अगर माता-पिता शांत होकर उनकी बात सुनते हैं, तो बच्चे को बहुत राहत मिलती है।
परफेक्ट पैरेंट बनने के चक्कर में अक्सर माता-पिता बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने लगते हैं। हर बच्चा एक जैसा नहीं होता। किसी की पढ़ाई में रुचि होती है, तो किसी की खेल-कूद में। इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की क्षमता और रुचि को समझें और उसी के हिसाब से उसे आगे बढ़ने दें।
इसके अलावा, अगर कभी आपसे भी गलती हो जाए, तो बच्चे से माफी मांगने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। इससे बच्चा यह सीखता है कि गलतियां सभी से होती हैं और उन्हें सुधारना जरूरी है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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