परफेक्ट पैरेंट बनने के चक्कर में बच्चों पर न करें कंट्रोल, ऐसे करें डील
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल बहुत से माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हर चीज में सबसे आगे हों, पढ़ाई में टॉप करें, हर काम सही करें और किसी भी तरह की गलती न करें। लेकिन इसी सोच के चक्कर में कई बार वे अनजाने में बच्चों पर काफी दबाव डाल देते हैं और उन्होंने बहुत ज्यादा कंट्रोल करने लगते हैं, जिससे बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत पर असर पड़ता है।
परफेक्ट बनने की कोशिश में कई माता-पिता बच्चों की हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखने लगते हैं कि वे क्या पढ़ रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, क्या खेल रहे हैं और क्या पहन रहे हैं। धीरे-धीरे यह कंट्रोल इतना बढ़ जाता है कि बच्चा खुद फैसले लेना बंद कर देता है। उसमें आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह हर बात के लिए माता-पिता पर निर्भर हो जाता है। यह स्थिति बच्चे के विकास के लिए ठीक नहीं होती।
बच्चों को भी गलती करने और उससे सीखने का मौका मिलना चाहिए। अगर हर बार माता-पिता ही सब कुछ तय करेंगे, तो बच्चा कभी खुद से सोचने और समझने की क्षमता नहीं विकसित कर पाएगा। इसलिए जरूरी है कि बच्चों पर पूरा कंट्रोल करने के बजाय उन्हें थोड़ा स्पेस दिया जाए।
पेरेंटिंग में सबसे जरूरी चीज है भरोसा। अगर आप अपने बच्चे पर भरोसा करेंगे, तो वह भी आपसे अपनी बातें शेयर करेगा। लेकिन अगर हर बात पर रोक-टोक होगी, तो बच्चा धीरे-धीरे आपसे चीजें छुपाने लगेगा। इसलिए बेहतर है कि बच्चों के साथ दोस्त की तरह उसके साथ पेश आएं। उससे पूछें कि उसका दिन कैसा रहा, उसे क्या अच्छा लगा और क्या नहीं।
इसके साथ ही बच्चों की भावनाओं को समझना भी बहुत जरूरी है। अगर बच्चा किसी बात से परेशान है, तो उसे तुरंत डांटने के बजाय उसकी बात सुनें। कई बार बच्चे चाहते हैं कि उनकी बातों को सुना जाए। ऐसे में अगर माता-पिता शांत होकर उनकी बात सुनते हैं, तो बच्चे को बहुत राहत मिलती है।
परफेक्ट पैरेंट बनने के चक्कर में अक्सर माता-पिता बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने लगते हैं। हर बच्चा एक जैसा नहीं होता। किसी की पढ़ाई में रुचि होती है, तो किसी की खेल-कूद में। इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की क्षमता और रुचि को समझें और उसी के हिसाब से उसे आगे बढ़ने दें।
इसके अलावा, अगर कभी आपसे भी गलती हो जाए, तो बच्चे से माफी मांगने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। इससे बच्चा यह सीखता है कि गलतियां सभी से होती हैं और उन्हें सुधारना जरूरी है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत ने अफगानिस्तान भेजी 13 टन बीसीजी वैक्सीन
काबुल, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने मंगलवार को अफगानिस्तान के तपेदिक (टीबी) से लड़ने वाले बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में सहायता के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पोस्ट में कहा, भारत ने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय को 13 टन बीसीजी वैक्सीन और उससे जुड़े सूखा सामान भेजा है, ताकि अफगानिस्तान में तपेदिक (टीबी) के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम को बल मिले।
दरअसल, बीसीजी वैक्सीन एक फ्रीज-ड्राइड (लायोफिलाइज्ड) सफेद पाउडर के रूप में आती है, जो उपयोग से पहले तरल (डिलुएंट) के साथ मिलाई जाती है। यह 10-20 खुराक वाली शीशियों (वायल्स) में पैक की जाती है। ट्यूबरकुलिन सिरिंज/26जी सुई की आवश्यकता होती है। इसे 2 डिग्री सेल्सियस से 8 डिग्री सेल्सियस पर संग्रहित किया जाता है।
वैसे, पहली बार नहीं है जब भारत ने अफगानिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। समय-समय पर सरकार ये करती रही है।
हाल ही में आए बाढ़ और भूकंप के अफगान लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। उस दौरान भी भारत आगे आया और 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) भेजी।
जायसवाल ने अफगानिस्तान के लोगों के साथ भारत की एकजुटता और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता तब भी जताई थी।
जायसवाल ने एक्स पोस्ट में लिखा, बाढ़ और भूकंप के कारण अफगानिस्तान के लोग जिस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने एचएडीआर सामग्री भेजी है। इसमें किचन सेट, हाइजीन किट, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और भी बहुत कुछ शामिल है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ पूरी तरह से खड़ा है और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता और समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले मार्च में, भारत ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी।
पाकिस्तान के एक हमले में काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह हिंसा का एक कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा किया गया आक्रामकता का यह जघन्य कृत्य अफगानिस्तान की संप्रभुता पर एक खुला हमला भी है, और यह क्षेत्रीय अखंडता के लिए बड़ा खतरा है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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