समझौते के लिए तानाशाही छोड़कर ईरान के अधिकारों का सम्मान करे अमेरिका : राष्ट्रपति पेजेश्कियान
तेहरान, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि समाधान के लिए वाशिंगटन को अपनी तानाशाही छोड़नी होगी और ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना होगा।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे।
इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ की प्रशंसा की। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, मैं बातचीत करने वाली टीम के सदस्यों, खासकर अपने भाई डॉ. गालिबाफ की सराहना करता हूं और कहता हूं कि ईश्वर आपको शक्ति दे।
ये टिप्पणी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच घंटों चली वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद आई। अमेरिका और ईरान की यह वार्ता रविवार को हुई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से गालिबाफ ने डेलीगेशन की कमान संभाली। कई घंटों तक चली बातचीत बाद में बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हुई।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि विस्तृत चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौटेगा, लेकिन यह स्थिति अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह है।
वहीं, गालिबाफ ने दावा किया कि इस बेनतीजा वार्ता में अमेरिका नाकाम रहा है। गालिबाफ ने एक्स पर बताया कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि ईरान की ओर से नीयत और इच्छा दोनों मौजूद हैं, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों की वजह से उन्हें भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, विरोधी पक्ष इस दौर की बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल मिनाब 168 का भरोसा जीतने में आखिरकार नाकाम रहा।
--आईएएनएस
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ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी करेगा अमेरिका, शांति वार्ता फेल होने के बाद तेहरान के खिलाफ ट्रंप का एक्शन
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता से पूरी दुनिया को उम्मीद थी, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई समझौता ना होने की वजह से उन उम्मीदों पर पानी फिर गया. अब अमेरिका ईरान के खिलाफ पहले से सख्त एक्शन लेने के मूड में नजर आ रहा है. जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक निर्देश से समझा जा सकता है. दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश के तहत अमेरिका आज (सोमवार, 13 अप्रैल) से ईरान पर समुद्री नाकाबंदी लागू करने जा रहा है. जिसे इस क्षेत्रीय तनाव में एक महत्वपूर्ण वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है.
ईरानी बंदरगाहों के अलावा तटीय क्षेत्र में होगी नाकाबंदी
अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के मुताबिक, यह उपाय ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में और उसके आसपास परिचालन करने वाले सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होगा. CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें लिखा, "राष्ट्रपति की घोषणा के मुताबिक, 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे पूर्वी समय (ET) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात पर नाकाबंदी लागू की जाएगी."
— U.S. Central Command (@CENTCOM) April 12, 2026
बयान में कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर यह नाकाबंदी निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी. CENTCOM ने आगे कहा, "अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाहों सहित, ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर यह नाकाबंदी निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी. सेनाएं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेंगी."
अमेरिकी मरीन ने नाविकों को दी ये सलाह
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा कि इस उपाय के लागू होने से पहले औपचारिक सूचना के माध्यम से वाणिज्यिक नाविकों के साथ अतिरिक्त परिचालन विवरण साझा किए जाएंगे. बयान में आगे कहा गया, "सभी नाविकों को 'नोटिस टू मरीनर्स' प्रसारणों पर नजर रखने और ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास परिचालन करते समय ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना बलों के साथ संचार बनाए रखने की सलाह दी गई है."
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