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डिजिटल पेमेंट होगा और सुरक्षित, RBI ला रहा 5 बड़े सेफ्टी नियम

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की ओर से देश में डिजिटल पेमेंट को लेकर कुछ सेफ्टी रूल्स बनाए गए हैं। ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए कुछ नियम ले गए हैं जिन्हें 5 पॉइंट सेफ्टी प्लान कहा जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पॉइंट्स प्रस्तावित किए गए हैं, फिलहाल लागू नहीं हुए हैं। 8 मई 2024 तक जनता से इन प्रस्तावों पर सुझाव मांगे गए हैं।

जो सेफ्टी पॉइंट्स तय किए गए हैं, उसमें किल स्विच से लेकर पेमेंट में होने वाली एक घंटे की देरी शामिल है। चलिए आपको बता देते हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की तरफ से कौन से नियम लाए गए हैं। जिनका डिजिटल पेमेंट के दौरान असर देखने को मिलेगा।

क्या है RBI का मास्टर प्लान

किल स्विच

यह आरबीआई की ऐसी पॉलिसी है जिसके जरिए एक ही क्लिक में सभी भुगतान मोड तुरंत बंद हो जाएंगे। इसमें यूपीआई से लेकर डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग शामिल है। इस तरह से अकाउंट हैक होने पर तुरंत ट्रांजैक्शन की सुविधा रोकी जा सकेगी। अगर किसी को लगता है कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है तो वह अपने सभी अकाउंट के पेमेंट मोड तुरंत बंद कर सकते हैं।

एक घंटा वेटिंग पीरियड

कई बार ऐसा होता है कि डिजिटल तरीके से धोखाधड़ी करने की कोशिश की जाती है। लेकिन अब अगर 10000 से ऊपर का पेमेंट किया जाता है तो 1 घंटे का वेटिंग पीरियड रहेगा। इस ट्रांजैक्शन के दौरान पैसा अकाउंट से कटेगा लेकिन बैंक के पास ही रहेगा। ऐसे में अगर अकाउंट धारक को ये लगता है कि उसके साथ कोई धोखाधड़ी हुई है तो वह बैंक को जानकारी दे सकता है। शिकायत मिलने पर बैंक द्वारा तुरंत ट्रांजैक्शन कैंसिल कर दिया जाएगा।

शैडो क्रेडिट श्रेणी

ठगी करने वाले अक्सर फर्जी खाते का इस्तेमाल करते हैं जो दूसरों के नाम पर होते हैं। रिजर्व बैंक अब क्रेडिट लिमिट तय करने पर विचार कर रहा है। ऐसे में अगर क्रेडिट लिमिट से ज्यादा पैसा किसी भी खाते में आएगा तो वह शैडो क्रेडिट श्रेणी में रखा जाएगा। इस तरह के खाते से ग्राहक तब तक पैसा बाहर नहीं निकाल सकेगा जब तक वह बैंक के सामने इस पैसे के आने का सही सोर्स पेश न कर दे।

वरिष्ठ नागरिकों के ट्रस्टेड पर्सन

70 साल से ज्यादा उम्र के जो वरिष्ठ नागरिक हैं उनके लिए आरबीआई ट्रस्टेड पर्सन कॉन्सेप्ट लेकर आया है। बड़े ट्रांजैक्शन के लिए इन लोगों को अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति से वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य किया जा सकता है। इससे ठगी पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।

मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन

हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन अब तक OTP पर निर्भर हैं। लेकिन अब इसे बायोमेट्रिक, पिन और सेफ्टी टोकन जैसी जरूरी लेयर्स से कवर किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा की लेनदेन किसी नए डिवाइस से किया जा रहा है या फिर पुराने ट्रस्टेड डिवाइस से हो रहा है।

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गूगल ने लॉन्च की ‘एआई एज गैलरी’ एप:बिना इंटरनेट चलेगा नया AI; फोन में ही डाउनलोड होगा 'ग़ामा-4' मॉडल, डेटा रहेगा सेफ

अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लाउड, सर्वर और लगातार इंटरनेट कनेक्शन के बिना नहीं चलता था। लेकिन यह ट्रेंड अब बदलने लगा है। गूगल ने AI Edge Gallery नाम का ऐसा एप पेश किया है, जो एआई को सीधे स्मार्टफोन के अंदर ले आता है। यानी यूजर अपने फोन पर ही गामा-4 जैसे मॉडल चला सकता है, वो भी बिना इंटरनेट के। यह बदलाव सिर्फ एक नया एप नहीं, बल्कि एआई के इस्तेमाल का तरीका बदलने वाला कदम है। अब तक जब भी यूजर कोई सवाल पूछता था, फोटो समझने को कहता था या ऑडियो ट्रांसक्राइब करता था, तो पूरा डेटा इंटरनेट के जरिए क्लाउड सर्वर तक जाता था। फिर रिजल्ट वापस फोन पर आता था। अब एआई का काम सीधे आपके फोन या डिवाइस पर ही होने लगा है। फोटो पहचानना, वॉइस समझना, टेक्स्ट प्रोसेस करना... सब कुछ लोकल डिवाइस परस्टोर होता है। आपके डेटा को सर्वर पर भेजने की जरूरत खत्म हो जाती है। इंटरनेट न होने पर भी इसके लगभग सभी फीचर्स काम करेंगे। इस तरह से एक्टिवेट करें - प्ले स्टोर या एप स्टोर से AI Edge Gallery डाउनलोड करें। - फोन की क्षमता के हिसाब से गामा मॉडल सिलेक्ट करें। यहां 2 से 4 जीबी का वर्जन डाउनलोड करना होगा, यानी फोन में इतनी स्टोरेज बची होनी चाहिए। - इसके बाद इसमें चार मोड्स हैं। टेक्स्ट से इमेज तक के लिए... उन्हें इस्तेमाल करें। प्राइवेसी से लेकर 4 मोड्स तक; यूजर्स को ये फायदे 1. फायदा - रिमोट एरिया में भी काम करेगा एआई सबसे बड़ा फायदा प्राइवेसी और एक्सेस का है। एआई इस्तेमाल करते समय आपका डेटा फोन से बाहर नहीं जाता है, इसलिए आपकी जानकारी सुरक्षित रहती है। साथ ही ऑफलाइन मोड में भी एआई काम करता है, जिससे बिना इंटरनेट वाले इलाकों में भी इसका इस्तेमाल संभव है। 2. तकनीक - नए प्रोसेसर पर बेहतर काम करेगी एप यह एप और इसके मॉडल फोन के एनपीयू (न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सभी फोन पर चल सकता है, लेकिन फ्लैगशिप और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर बेहतर काम करता है, जिनमें एआई-सक्षम चिपसेट (जैसे गूगल टेंसर या लेटेस्ट स्नैपड्रैगन) मौजूद हों। 3. प्राइवेसी - आपकी निजी फाइलें इंटरनेट पर शेयर नहीं होंगी इसके एजेंट स्किल्स और थिंकिंग मोड का इस्तेमाल करके आप फोन में सेव फाइलों को एनालाइज कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आपकी कॉन्फिडेंशियल फाइलें इंटरनेट पर अपलोड नहीं होतीं। 4. मोड्स - इमेज भी बना सकेंगे, ऑडियो जनरेट होगी इसमें एआई चैट के साथ थिंकिंग मोड मिलता है, जिससे यह समझा जा सकता है कि एआई जवाब कैसे बना रहा है। आस्क इमेज में फोटो अपलोड कर उससे जुड़ी जानकारी ली जा सकती है। किस भी ऑडियो को टेक्स्ट में बदलने और ट्रांसलेशन करने में मदद करता है। 5. सीमाएं - रियल टाइम सर्च जैसे फीचर्स नहीं हैं यह एआई पूरी तरह फोन पर चलता है और इंटरनेट से जुड़ा नहीं होता, इसलिए इसमें रियल-टाइम सर्च की सुविधा नहीं है। यह उन डेटा और नॉलेज पर आधारित होता है जो पहले से मॉडल में मौजूद होता है। कुछ मॉडल्स की जानकारी जून 2024 तक के डेटा पर आधारित है।

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  Sports

IPL 2026: 9 चौके-छक्के… अभिषेक शर्मा से भी तेज प्रियांश आर्या, सिर्फ इतनी गेंदों पर ठोका अर्धशतक

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