ट्रंप की धमकी : ईरान सहयोग करे या न करे, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा
वाशिंगटन, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि शनिवार को पाकिस्तान में ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह अहम वैश्विक तेल मार्ग बहुत जल्द और अपने आप खुल जाएगा, चाहे ईरान सहयोग करे या नहीं।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “यह अपने आप खुल जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह रास्ता “जल्द ही” खुल जाएगा।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है यह काम तेजी से होगा। और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम इसे किसी न किसी तरीके से पूरा कर लेंगे।” खबरों के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा चले युद्ध के दौरान ईरान ने इस जलमार्ग को बंद कर दिया था।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में उनका सबसे बड़ा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा, “परमाणु हथियार नहीं होंगे। बस यही 99 प्रतिशत मुद्दा है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के पास फिलहाल कोई मजबूत विकल्प नहीं है और वह सिर्फ होरमुज़ स्ट्रेट का इस्तेमाल कर दुनिया पर थोड़े समय के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
उधर, ईरान ने शुक्रवार को कहा कि उसकी सेना पूरी तरह सतर्क और तैयार है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल बार-बार अपने वादे तोड़ते रहे हैं, इसलिए वह सतर्क है।
ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ईरानियों को शायद यह एहसास नहीं है कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया से थोड़े समय के लिए ज़बरदस्ती वसूली करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने आगे लिखा, आज वे सिर्फ इसलिए ज़िंदा हैं ताकि बातचीत कर सकें!
इससे पहले शुक्रवार को, ट्रंप ने द न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक फ़ोन इंटरव्यू में बताया कि ईरान के साथ बातचीत के नतीजे लगभग 24 घंटों में साफ हो जाएंगे। उन्होंने धमकी दी कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता विफल हो जाती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू करने के लिए अमेरिकी युद्धपोतों को फिर से हथियारों से लैस किया जा रहा है।
इस युद्ध में अमेरिका, ईरान और इजरायल तीनों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल जो युद्धविराम हुआ है, वह बहुत कमजोर है और दोनों पक्षों के बीच पुराने मतभेदों के कारण स्थायी शांति समझौता करना आसान नहीं होगा।
--आईएएनएस
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US Iran Peace Talk: शांति वार्ता से पहले ईरान ने जारी किया भावुक Video, दिखाई हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें
US Iran Peace Talk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अहम शांति वार्ता होने जा रही है. इस वार्ता में दोनों देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन बातचीत से पहले ही माहौल भावनात्मक और संवेदनशील हो गया है. इसकी वजह बना है ईरान के मीनाब हमले का दर्द, जिसे तेहरान अब तक भुला नहीं पाया है.
इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी नेता, साथ लाए दर्द की यादें
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ शांति वार्ता में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे. हालांकि, उनकी यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी रही. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गालिबफ अपने साथ उन मासूम बच्चों की तस्वीरें, खून से सने स्कूल बैग और जूते लेकर आए, जो मीनाब हमले में मारे गए थे.
बताया जा रहा है कि फ्लाइट के दौरान उन्होंने इन तस्वीरों और सामान को सीटों पर रखा और लंबे समय तक उन्हें देखते रहे. यह दृश्य इस बात का प्रतीक बन गया कि ईरान इस त्रासदी को भूला नहीं है और यह दर्द अभी भी उसकी नीतियों और निर्णयों को प्रभावित कर रहा है.
For the laughter of all the children,
— Iran Embassy in Sierra Leone (@IRANinSalone) April 11, 2026
Silenced by the death cult...
Never forgotten. pic.twitter.com/Ngumh6KUSK
मीनाब हमला, जिसने दुनिया को झकझोर दिया
28 फरवरी को ईरान के मीनाब शहर में एक गर्ल्स स्कूल पर हुआ हमला हाल के सबसे भयावह घटनाओं में से एक माना जा रहा है. इस हमले में 165 से ज्यादा मासूम बच्चियों की मौत हो गई थी. घटना के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में तबाही का मंजर साफ देखा गया चारों ओर खून से सनी जमीन, बिखरे हुए बैग और जूते, और अपनों को खोने का दर्द.
इस हमले की दुनियाभर में कड़ी निंदा हुई थी. कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया था.
आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ा तनाव
इस हमले को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उल्टा ईरान पर ही सवाल खड़े किए थे. उनका कहना था कि यह हमला ईरान की अपनी सैन्य चूक का परिणाम हो सकता है.
अमेरिकी पक्ष ने यह भी दावा किया था कि उनका निशाना कोई स्कूल नहीं, बल्कि सैन्य ठिकाने थे, जो स्कूल के पास स्थित थे। हालांकि, इस सफाई से विवाद और गहरा गया है.
शांति वार्ता पर भावनात्मक दबाव
इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को पहले ही काफी अहम माना जा रहा था, लेकिन अब मीनाब हमले की यादों ने इसे और जटिल बना दिया है. ईरान का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह सिर्फ कूटनीतिक समझौते से आगे बढ़कर न्याय और जवाबदेही की भी मांग कर रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भावनात्मक अपील वार्ता को प्रभावित कर सकती है. ईरान यह संदेश देना चाहता है कि शांति सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए.
क्या आसान होगी शांति की राह?
हालांकि दोनों देशों ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि शांति की राह आसान नहीं होगी. मीनाब जैसे हमलों की यादें और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला इस प्रक्रिया को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है.
अब सबकी नजर इस्लामाबाद वार्ता पर टिकी है क्या यह बातचीत तनाव कम करने में सफल होगी या फिर मीनाब का दर्द एक बार फिर कूटनीति पर भारी पड़ेगा.
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