Awarapan 2 में अरिजीत सिंह के साथ काम करने पर Amaal Mallik ने कही बड़ी बात
इमरान हाशमी की फिल्म आवारापन 2 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की रिलीज से पहले इसके म्यूजिक को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। इसी बीच कंपोजर अमाल मलिक ने अरिजीत सिंह के साथ काम करने और सिंगर के प्लेबैक सिंगिंग से दूरी बनाने के फैसले पर खुलकर बात की है।
पिंकविला को दिए इंटरव्यू में अमाल मलिक ने बताया कि अरिजीत सिंह ने म्यूजिक को लेकर जो फैसला लिया है, वह अचानक नहीं था। अमाल के मुताबिक, अरिजीत के इस फैसले के बारे में इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोग पहले से ही समझने लगे थे।
अरिजीत सिंह ने म्यूजिक से दूरी बनाने का फैसला क्यों लिया?
अमाल मलिक ने कहा कि अरिजीत सिंह ने खुद यह फैसला लिया है और इसमें किसी तरह का दबाव नहीं है। उन्होंने बताया कि जब अरिजीत ने दुनिया के सामने अपने फैसले की बात कही, उससे करीब एक-दो साल पहले ही उनके साथ काम कर चुके लोग यह समझने लगे थे कि शायद वह इस तरह के म्यूजिक काम को लेकर पहले जैसी दिलचस्पी नहीं रखते।
अमाल ने यह भी कहा कि फिल्म म्यूजिक में एक समय के बाद बड़े कलाकारों के पास यह चुनने का मौका होता है कि उन्हें किस तरह के प्रोजेक्ट पर काम करना है। इसे भी पढ़ें: Aman Gandhi ने बताया क्यों हुआ था Shivangi Joshi और Rohit Suchanti का ब्रेकअप
सिर्फ अरिजीत के नाम से हिट नहीं होता गाना
अमाल मलिक ने फिल्म इंडस्ट्री में सिंगर के नाम के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कई बार किसी बड़े सिंगर को गाना देने के पीछे यह सोच होती है कि उसके नाम से गाना हिट हो जाएगा और ज्यादा लोग उसे सुनेंगे।
उनके मुताबिक, अरिजीत सिंह के साथ भी उनके करियर के शुरुआती वर्षों में ऐसा हुआ, जब उनके नाम से ही गानों को बड़ी लोकप्रियता मिल जाती थी। लेकिन अब सिर्फ किसी बड़े सिंगर का नाम किसी गाने की सफलता की गारंटी नहीं है।
अमाल ने कहा कि गाना कितना अच्छा है, यह भी उतना ही जरूरी है। अगर गाने में दम नहीं है तो सिर्फ अरिजीत सिंह या सोनू निगम जैसे बड़े सिंगर की आवाज उसे लंबे समय तक नहीं चला सकती।
गाने की सफलता में सिंगर और कंपोजर दोनों की भूमिका
अमाल मलिक ने कहा कि किसी गाने को लोग कितना पसंद करेंगे, यह केवल सिंगर पर निर्भर नहीं करता। गाने की सफलता सिंगर, कंपोजर और लिरिसिस्ट यानी गीतकार के बीच सही तालमेल और उनकी एनर्जी से बनती है।
उन्होंने कहा कि अगर गाने में अच्छी धुन, अच्छे बोल और सिंगर की शानदार आवाज एक साथ मिल जाए तो वह लोगों के दिल तक पहुंच सकता है। इसलिए किसी बड़े नाम को गाने से जोड़ देना ही उसकी सफलता के लिए काफी नहीं है।
आवारापन 2 के गाने को लेकर क्या बोले अमाल मलिक?
अमाल मलिक ने अरिजीत सिंह के साथ आवारापन 2 के लिए काम करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया। उन्होंने साफ किया कि यह कोई पुराना रिकॉर्ड किया हुआ गाना नहीं था, जिसे अब रिलीज किया जा रहा है।
अमाल ने बताया कि करीब एक साल तक यह गाना उनकी अपनी आवाज में था। उन्होंने कहा कि वह और अरिजीत अक्सर एक-दूसरे के साथ अपने म्यूजिक को शेयर करते हैं। इसी तरह अमाल ने भी अरिजीत को अपने कई गाने भेजे।
अमाल के मुताबिक, वह एक बार में करीब 5-6 गाने अरिजीत को भेजते हैं। इनमें से जो गाना अरिजीत को पसंद आता है, उस पर दोनों साथ काम करते हैं। आवारापन 2 के इस गाने के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
अरिजीत को पसंद आया अमाल का गाना
अमाल मलिक ने बताया कि जब अरिजीत ने गाना सुना तो इसे लेकर पहले से कोई तय डील या वादा नहीं था। उन्हें गाना पसंद आया और इसके बाद दोनों ने इस पर काम किया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों को ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि अरिजीत सिंह का कोई पुराना रिकॉर्ड किया हुआ गाना अब रिलीज किया गया है। अमाल के अनुसार, गाना पहले उनकी आवाज में था और बाद में अरिजीत ने इसे सुना और पसंद करने के बाद इस पर काम किया। इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच
14 अगस्त को रिलीज होगी आवारापन 2
इमरान हाशमी स्टारर आवारापन 2 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह है, क्योंकि यह 2007 में रिलीज हुई आवारापन का सीक्वल है। फिल्म की कहानी और इमरान हाशमी के किरदार के साथ-साथ इसके म्यूजिक पर भी दर्शकों की नजर है।
एससीआई ने 8,000 टीईयू क्षमता वाले 6 बड़े कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए जारी किया 720 मिलियन डॉलर का वैश्विक टेंडर
नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। देश की प्रमुख सरकारी नौवहन कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) ने अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक जहाज निर्माण टेंडर जारी किया है। कंपनी ने लगभग 720 मिलियन डॉलर (करीब 6,858 करोड़ रुपये) की लागत से छह आधुनिक कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा आमंत्रित की है। इस कदम को भारत की समुद्री परिवहन क्षमता बढ़ाने और घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मरीन इनसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, इस टेंडर के तहत 6 सेल्युलर कंटेनर पोत बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 8,000 ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (टीईयू) होगी। टीईयू कंटेनर जहाजों की माल ढुलाई क्षमता मापने की एक मानक इकाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, छह जहाजों में से दो जहाजों का ऑर्डर पक्का होगा, जबकि शेष चार जहाज वैकल्पिक श्रेणी में रखे गए हैं। इससे एससीआई को भविष्य की जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त जहाजों का ऑर्डर देने की सुविधा मिलेगी।
टेंडर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें भारतीय शिपयार्ड्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर) व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत यदि किसी विदेशी शिपयार्ड की बोली सबसे कम रहती है, तो योग्य भारतीय शिपयार्ड को उस कीमत का मिलान करने का अवसर दिया जाएगा।
यदि पहला पात्र भारतीय शिपयार्ड विदेशी कंपनी की बोली से मेल नहीं खा पाता, तो यह अवसर अगले योग्य भारतीय शिपयार्ड को दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय कंपनियों को मजबूत बनाना है।
एससीआई ने उन भारतीय शिपयार्ड्स के लिए भी रास्ता खोला है, जिनके पास बड़े कंटेनर जहाज बनाने का पूर्व अनुभव नहीं है। ऐसे शिपयार्ड अनुभवी विदेशी जहाज निर्माताओं के साथ तकनीकी साझेदारी कर इस टेंडर में भाग ले सकते हैं।
टेंडर की शर्तों के अनुसार, विदेशी तकनीकी साझेदार ने पिछले 10 वर्षों में कम से कम दो कंटेनर जहाज (5,000 टीईयू या उससे अधिक क्षमता वाले) सफलतापूर्वक बनाए और डिलीवर किए हों। साथ ही वे जहाज वर्तमान में संचालन में होने चाहिए। विदेशी साझेदार को निर्माण प्रक्रिया के दौरान बुनियादी और विस्तृत डिजाइन सहायता भी प्रदान करनी होगी।
सेल्युलर कंटेनर जहाज विशेष रूप से मानकीकृत कंटेनरों के परिवहन के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जिनमें ऊर्ध्वाधर गाइड रेल और स्लॉट होते हैं, जिनकी मदद से 20 फुट और 40 फुट के कंटेनरों को सुरक्षित रूप से एक के ऊपर एक रखा जा सकता है। इससे माल परिवहन अधिक सुरक्षित और कुशल बनता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस परियोजना में भाग लेने वाले भारतीय शिपयार्ड केंद्र सरकार की 24,736 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (एसबीएफएएस) का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के तहत प्रत्येक जहाज के निर्माण पर 15 से 25 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
यह योजना वर्ष 2025 में घोषित 69,725 करोड़ रुपए के समुद्री क्षेत्र पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय शिपयार्ड्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना और उन्हें वैश्विक जहाज निर्माण कंपनियों के मुकाबले मजबूत बनाना है।
--आईएएनएस
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