एससीआई ने 8,000 टीईयू क्षमता वाले 6 बड़े कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए जारी किया 720 मिलियन डॉलर का वैश्विक टेंडर
नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। देश की प्रमुख सरकारी नौवहन कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) ने अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक जहाज निर्माण टेंडर जारी किया है। कंपनी ने लगभग 720 मिलियन डॉलर (करीब 6,858 करोड़ रुपये) की लागत से छह आधुनिक कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा आमंत्रित की है। इस कदम को भारत की समुद्री परिवहन क्षमता बढ़ाने और घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मरीन इनसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, इस टेंडर के तहत 6 सेल्युलर कंटेनर पोत बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 8,000 ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (टीईयू) होगी। टीईयू कंटेनर जहाजों की माल ढुलाई क्षमता मापने की एक मानक इकाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, छह जहाजों में से दो जहाजों का ऑर्डर पक्का होगा, जबकि शेष चार जहाज वैकल्पिक श्रेणी में रखे गए हैं। इससे एससीआई को भविष्य की जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त जहाजों का ऑर्डर देने की सुविधा मिलेगी।
टेंडर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें भारतीय शिपयार्ड्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर) व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत यदि किसी विदेशी शिपयार्ड की बोली सबसे कम रहती है, तो योग्य भारतीय शिपयार्ड को उस कीमत का मिलान करने का अवसर दिया जाएगा।
यदि पहला पात्र भारतीय शिपयार्ड विदेशी कंपनी की बोली से मेल नहीं खा पाता, तो यह अवसर अगले योग्य भारतीय शिपयार्ड को दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय कंपनियों को मजबूत बनाना है।
एससीआई ने उन भारतीय शिपयार्ड्स के लिए भी रास्ता खोला है, जिनके पास बड़े कंटेनर जहाज बनाने का पूर्व अनुभव नहीं है। ऐसे शिपयार्ड अनुभवी विदेशी जहाज निर्माताओं के साथ तकनीकी साझेदारी कर इस टेंडर में भाग ले सकते हैं।
टेंडर की शर्तों के अनुसार, विदेशी तकनीकी साझेदार ने पिछले 10 वर्षों में कम से कम दो कंटेनर जहाज (5,000 टीईयू या उससे अधिक क्षमता वाले) सफलतापूर्वक बनाए और डिलीवर किए हों। साथ ही वे जहाज वर्तमान में संचालन में होने चाहिए। विदेशी साझेदार को निर्माण प्रक्रिया के दौरान बुनियादी और विस्तृत डिजाइन सहायता भी प्रदान करनी होगी।
सेल्युलर कंटेनर जहाज विशेष रूप से मानकीकृत कंटेनरों के परिवहन के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जिनमें ऊर्ध्वाधर गाइड रेल और स्लॉट होते हैं, जिनकी मदद से 20 फुट और 40 फुट के कंटेनरों को सुरक्षित रूप से एक के ऊपर एक रखा जा सकता है। इससे माल परिवहन अधिक सुरक्षित और कुशल बनता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस परियोजना में भाग लेने वाले भारतीय शिपयार्ड केंद्र सरकार की 24,736 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (एसबीएफएएस) का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के तहत प्रत्येक जहाज के निर्माण पर 15 से 25 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
यह योजना वर्ष 2025 में घोषित 69,725 करोड़ रुपए के समुद्री क्षेत्र पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय शिपयार्ड्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना और उन्हें वैश्विक जहाज निर्माण कंपनियों के मुकाबले मजबूत बनाना है।
--आईएएनएस
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NPS क्या है, क्या यह रिटायरमेंट सेविंग में कर सकता है मदद? जानें फायदे
क्या आप रिटायरमेंट की उम्र के करीब हैं, लेकिन भविष्य के लिए रोजाना बचत नहीं कर पाए हैं? अगर आप रिटायरमेंट के बाद की बचत की कमी को लेकर परेशान हैं और सोच रहे हैं कि रिटायरमेंट के लिए फंड कैसे जमा किया जाए, तो अब इस पर ध्यान देने का समय आ गया है. यहां आप जानेंगे कि कैसे छोटी रकम से शुरुआत करके भी ऐसे फंड जमा किए जा सकते हैं जो रिटायरमेंट के बाद आपके काम आएंगे. इसके लिए आप NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि यह क्या है, तो नीचे पूरी जानकारी दी गई है कि यह लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड बनाने में आपकी कैसे मदद कर सकता है.
NPS क्या है?
NPS, यानी National Pension System, एक Defined Contribution Pension System है जो रिटायरमेंट सेविंग स्कीम के तौर पर काम करता है. इस सिस्टम के तहत, नौकरी के दौरान अलग-अलग एसेट क्लास में रेगुलर तौर पर पैसे इन्वेस्ट किए जाते हैं. NPS को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. आसान शब्दों में कहें तो, NPS का मकसद समय के साथ आपकी कमाई का कुछ हिस्सा अलग रखकर रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड बनाना है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि इससे मिलने वाला रिटर्न शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है इसलिए यह फिक्स्ड-इंटरेस्ट वाली स्कीम नहीं है.
NPS में कौन निवेश कर सकता है?
रिटायरमेंट के लिए बचत करने का चाहने वाला कोई भी व्यक्ति NPS में शामिल हो सकता है. PFRDA के अनुसार कुछ खास शर्तों के साथ निवासी, अनिवासी और विदेशी नागरिक भी इसमें शामिल हो सकते हैं. मौजूदा नियमों के तहत, 'ऑल सिटिजन मॉडल' में शामिल होने की उम्र 18 से 85 साल के बीच है. इसके अलावा आप अपनी पसंद के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास चुन सकते हैं. इनमें इक्विटी (E), कॉर्पोरेट डेट (C) और सरकारी सिक्योरिटीज (G) शामिल हैं. इक्विटी (E) में स्टॉक मार्केट से जुड़े निवेश होते हैं, कॉर्पोरेट डेट (C) में कॉर्पोरेट डेट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं और सरकारी सिक्योरिटीज (G) में सरकारी सिक्योरिटीज शामिल होती हैं.
NPS के Tier-I और Tier-II Account क्या हैं?
NPS में मुख्य रूप से दो तरह के अकाउंट होते हैं: Tier-I और Tier-II, टियर-I एक पेंशन अकाउंट है जिसमें पैसे निकालने के लिए कुछ खास नियम होते हैं और इससे जुड़े टैक्स फायदे भी मिल सकते हैं.
टियर-II एक ऑप्शनल इन्वेस्टमेंट अकाउंट है जिसे कोई सब्सक्राइबर खोल सकता है, जिसके पास पहले से ही एक एक्टिव टियर-I अकाउंट हो. आमतौर पर, इसमें पैसे निकालने पर टियर-I जैसी पाबंदियां नहीं होतीं, हालांकि इससे जुड़े टैक्स फायदे अलग होते हैं.
NPS के क्या फायदे हैं?
NPS कई तरह के फायदे देता है जैसे रिटायरमेंट की प्लानिंग में मदद और कम लागत वाली पेंशन स्कीम. इसमें निवेश के अच्छे विकल्प और टैक्स में काफी फायदे मिलते हैं. साथ ही, अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो आप आसानी से अपने रिटायरमेंट अकाउंट को अपनी नई नौकरी वाली जगह पर ट्रांसफर कर सकते हैं.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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