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क्रेटा-स्कॉर्पियो को पछाड़कर नंबर 1 बनी ये कार, एक साल में बिकीं 2,16,054 यूनिट

FY26 में भारत के SUV बाजार में Tata Nexon ने सबसे ज्यादा बिक्री के साथ पहला स्थान हासिल किया. Nexon ने 2.16 लाख यूनिट्स बेचकर 32% की ग्रोथ दर्ज की. Hyundai Creta 2.01 लाख यूनिट्स के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि Tata Punch तीसरे स्थान पर रही.

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ट्रंप का ‘टैरिफ बम’, ईरान को हथियार देने वाले देशों पर लगेगा 50 फीसदी टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है. इस बार उन्होंने सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर बड़ा दांव खेला है. ट्रंप ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान को हथियारों की आपूर्ति करेगा, उस देश से आने वाले हर सामान पर अमेरिका 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाएगा. 

यह चेतावनी सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक सख्त आर्थिक संदेश है या तो अमेरिका के साथ व्यापार बनाए रखें या ईरान के साथ रक्षा सहयोग जारी रखें.

वैश्विक बाजार में बढ़ी बेचैनी

ट्रंप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. कई देश, जो ईरान के साथ रक्षा या तकनीकी सहयोग रखते हैं, अब दुविधा में हैं. एक तरफ अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जहां व्यापारिक संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ उनके रणनीतिक और क्षेत्रीय हित जुड़े हुए हैं. ऐसे में यह टैरिफ नीति देशों को 'दो राहे' पर खड़ा कर रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है और व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है.

टैरिफ वॉर का नया चरण

ट्रंप पहले भी 'टैरिफ वॉर' की रणनीति अपना चुके हैं, लेकिन इस बार इसका लक्ष्य सीधे तौर पर सुरक्षा और सैन्य सहयोग से जुड़ा है. यह कदम केवल आर्थिक दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. अमेरिका चाहता है कि कोई भी देश ईरान को सैन्य ताकत बढ़ाने में मदद न करे. इस रणनीति से यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले समय में आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल और तेज हो सकता है.

ईरान और उसके सहयोगियों के लिए चुनौती

ईरान के साथ खड़े देशों के लिए यह फैसला बड़ा झटका साबित हो सकता है. अगर वे ईरान को समर्थन जारी रखते हैं, तो उन्हें अमेरिकी बाजार में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

वहीं, अगर वे अमेरिका के दबाव में आकर ईरान से दूरी बनाते हैं, तो उनके क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकते हैं. इस स्थिति में कई देशों को अपनी विदेश नीति और आर्थिक रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है.

क्या बढ़ेगा वैश्विक तनाव?

ट्रंप की इस घोषणा ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी आक्रामक रुख अपनाने के लिए तैयार है. यह कदम आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को और जटिल बना सकता है. सवाल यह है कि क्या देश अमेरिकी दबाव में झुकेंगे या अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहेंगे?

फिलहाल इतना तय है कि 'टैरिफ बम' ने दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों में हलचल मचा दी है और इसके असर दूर तक देखने को मिल सकते हैं.

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