गर्मियों में बदबूदार पसीने से डियोड्रेंट नहीं, यह आयुर्वेदिक उपचार दिलाएंगे राहत
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मियों के आते ही त्वचा की देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है। सर्दियों की तुलना में गर्मियों के मौसम में त्वचा ज्यादा देखभाल मांगती है, लेकिन त्वचा सुरक्षा से लेकर पसीने की दुर्गंध तक गर्मियों में एक आम समस्या बन जाती है।
लोग पसीने से बचने के लिए डियोड्रेंट और परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह अस्थायी परिणाम देते हैं, सही संतुलन नहीं। गर्मियों में आने वाले बदबूदार पसीने से निजात पाने के लिए आयुर्वेद शरीर के अंदर संतुलन पर जोर देता है, न कि बाहरी उपाय पर।
आयुर्वेद पसीने की दुर्गंध को कफ और वात का असंतुलन मानता है। कफ और वात के असंतुलन से पसीना ज्यादा निकलता है और बैक्टीरिया पनपने का वातावरण गर्मी की वजह से बन जाता है। ऐसे में शरीर से तेज दुर्गंध आती है, जिससे बाहर निकलने में भी शर्मिंदगी होती है। ऐसे में पहले शरीर को अंदर से स्वच्छ करना ज्यादा जरूरी है। पहले जानते हैं कि ऐसा होता क्यों है।
आयुर्वेद में इसे खान-पान से जोड़ा गया है। गर्मियों के समय ज्यादा तला-भुना, तीखा, मसालेदार और कम पानी पीना इसके पीछे का मुख्य कारण है। इससे हार्मोन असंतुलन पैदा होता है। इसके साथ ही लोग गर्मियों में सूती कपड़े पहनने के बजाय सिंथेटिक कपड़ों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, जो धूप के संपर्क में आते ही शरीर में गर्मी पैदा करते हैं और न सिर्फ पसीने में वृद्धि करते हैं, बल्कि इससे मुंहासे और घमौरी की संभावना भी बढ़ जाती है।
अब सवाल है कि क्या करें। इसके लिए दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। हो सके तो सुबह सौंफ का पानी पीएं। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह पेट साफ करने में भी मदद करती है। इसके साथ ही दिन में एक बार गुलाब जल का सेवन जरूर करें। इससे तन और मन में शीतलता मिलती है। शरीर को ठंडा रखने के लिए नारियल पानी जरूर पीएं। नारियल पानी शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और पेट को भी ठंडा रखने में मदद करता है। इसके साथ भुना जीरा मिलाकर दोपहर के वक्त छाछ जरूर लें। इससे गर्मियों में लू नहीं लगती और शरीर ठंडा महसूस करता है।
भीतरी शीतलता के अलावा शरीर को बाहर से भी स्वच्छ रखना जरूरी है। इसके लिए गर्मियों में नीम के पत्ते के साथ स्नान करे। यह बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है। अगर नीम का पेड़ आस-पास उपलब्ध नहीं है, तो फिटकरी को मिलाकर नहाने से भी बैक्टीरिया कम होगा। धूप और दुर्गंध से बचने के लिए शरीर पर चंदन और गुलाबजल का लेप लगाएं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ सुगंधित बनाने में भी मदद करेगा।
--आईएएनएस
पीएस/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने से होम लोन ब्याज दरों में स्थिरता आएगी: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के फैसले से होम लोन (मॉर्गेज) की ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों ने बुधवार को यह बात कही।
वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव (एफआरआईसीएस) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह डेवलपर्स और घर खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद होम लोन दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि यह कदम बढ़ती लागत के असर को कम करने में मदद करेगा और बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार रणनीति बनाने का समय देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह आखिरी बार हो सकता है जब रेपो रेट स्थिर रहे, इसके बाद दरें बढ़ सकती हैं।
नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि आरबीआई का न्यूट्रल रुख अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएगा।
उन्होंने कहा, स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदने वालों के लिए सामर्थ्य बनी रहती है और डेवलपर्स को भी बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक संकेतों से बाजार प्रभावित होता है, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का न होना एक सकारात्मक संकेत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई का यह फैसला निकट भविष्य में मांग को बनाए रखने और बाजार में विश्वास बढ़ाने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि सप्लाई चेन में रुकावट और बढ़ती लागत निर्माण गतिविधियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड विमल नादर ने कहा कि मौजूदा संकट की तीव्रता और अवधि का असर खपत पर पड़ेगा, खासकर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और हाउसिंग सेक्टर में, विशेष रूप से सस्ते और मिड-इनकम सेगमेंट में।
हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू रियल एस्टेट सेक्टर को मध्यम अवधि में मजबूती देंगे।
गौरतलब है कि आरबीआई ने वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष के अभी जारी रहने की संभावना है।
साथ ही, केंद्रीय बैंक ने 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान भी जताया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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