लगभग 80 सालों से भारत के पड़ोस में एक नासूर है जिस पर आखिरकार दवाई छिड़कने का समय आ गया है। इतिहास में पहली बार इजराइल ने नासूर बन चुके पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर वही बयान दिया है जो हमास के खिलाफ दिया गया था। आज गाज़ा में हमास ढूंढने के बाद भी नहीं मिल रहा। खबर है कि इजराइल की खुफ़िया एजेंसी मोसाद को अगला टारगेट पाकिस्तान दिया गया है। यह भारत के लिए भी एक बहुत बड़ा और सुनहरा मौका है। ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने वाली भारतीय एयरफोर्स के चीफ एपी सिंह अमेरिका पहुंचे हैं। भारतीय वायु सेना अध्यक्ष का अमेरिका पहुंचना एक बहुत बड़ा संकेत है। लेकिन सवाल है कि पाकिस्तान ने ऐसा क्या किया जिसके बाद मोसाद पाकिस्तान के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है। दरअसल पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ट्वीट कर दिया जिसमें इजराइल को शैतान और मानवता पर श्राप कह दिया। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हम इस्लामाबाद में शांति वार्ता करवा रहे हैं। लेकिन इजराइल लेबनान में नरसंहार कर रहा है। मैं प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीन की जमीन पर इस कैंसर जैसे देश इजराइल को बनाया, वह सभी लोग नर्क में जले।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के इस बयान को सुनने के बाद इजराइल ने पहली बार पाकिस्तान को आतंकी देश बोलकर संबोधित किया है। इजराइल ने पहली बार खुलकर पाकिस्तान को लेकर अपनी फॉरेन पॉलिसी बदल ली है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नितिन याू की तरफ से बयान आया है कि पाकिस्तान द्वारा इजराइल के विनाश का आवाहन करना अत्यंत आपत्तिजनक है। पाकिस्तान ने सीमा लांघ दी है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा है कि इजराइल खुले तौर पर यहूदी विरोधी और झूठे आरोपों को बेहद गंभीरता से लेता है। हमारे देश को जिसने भी कैंसर बोला है उसका पूर्ण विनाश होकर रहेगा। इजराइल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने हमारे विनाश की कसम खाई है। यानी इजरायली विदेश मंत्री गिदोनसार ने सीधे-सीधे पाकिस्तान को एक आतंकी देश बोल दिया है।
अमेरिका में इजराइल के राजदूत येल माइकल लीडर ने कहा है कि पाकिस्तान ने ईरान के आयतुल्लाओं की तरह हमारी मौत का नारा लगाया है। मैं ख्वाजा आसिफ को बोलना चाहता हूं कि आप कोई मध्यस्थ नहीं है। आप खुद एक समस्या हैं। हैरानी की बात देखिए कि जिस वक्त अमेरिका में इजराइल के राजदूत पाकिस्तान को मिटाने की धमकी दे रहे थे उसी वक्त अमेरिका में भारतीय नौसेना अध्यक्ष एपी सिंह ने अमेरिकी एयरफोर्स चीफ से मुलाकात की है। हो सकता है कि पाकिस्तान पर संभावित एक्शन से पहले अमेरिका को जानकारी दी जा रही है। बहरहाल हजारों इजराइली लोगों ने पाकिस्तान को मिटाने की मांग शुरू कर दी है। दुनिया भर में रहने वाले यहूदियों ने कहा है कि पाकिस्तान अब हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है।
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अमेरिका के एक प्रमुख विश्वविद्यालय से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां एक पूर्व एथलेटिक ट्रेनर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नॉर्थ कैरोलिना स्टेट विश्वविद्यालय के पूर्व ट्रेनर रॉबर्ट मर्फी पर कई पूर्व छात्र-खिलाड़ियों ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि यह आरोप चिकित्सा उपचार के दौरान अनुचित व्यवहार से जुड़े हैं, जिसे लेकर कई खिलाड़ियों ने खुलकर अपनी बात रखी है।
गौरतलब है कि आरोपों के अनुसार, यह घटनाएं वर्ष 2013 से शुरू हुई थीं, जब एक खिलाड़ी ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और शुरुआती दिनों में ही कथित तौर पर गलत व्यवहार का सामना किया। पीड़ितों का कहना है कि उस समय वे पेशेवर प्रशिक्षण के दबाव में थे और उन्होंने दर्द या असहजता को नजरअंदाज किया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 11 पूर्व खिलाड़ियों ने सामने आकर अपनी आपबीती साझा की है, जिनमें से कई ने अपनी पहचान गुप्त रखी है। बताया जा रहा है कि इन मामलों को लेकर एक दीवानी मुकदमा भी चल रहा है, जिसमें कई अन्य पूर्व खिलाड़ी भी शामिल हो चुके हैं।
बता दें कि वर्ष 2022 में एक पूर्व खिलाड़ी की शिकायत के बाद मामला औपचारिक जांच तक पहुंचा, जिसके बाद मर्फी ने विश्वविद्यालय छोड़ दिया था। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले से इन आरोपों की जानकारी थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी।
गौरतलब है कि आरोपों में यह भी कहा गया है कि ट्रेनर खिलाड़ियों के निजी क्षेत्रों में अनुचित तरीके से हस्तक्षेप करते थे और कुछ मामलों में उन्हें असामान्य परीक्षण प्रक्रियाओं के दौरान असहज परिस्थितियों में रखा जाता था। वहीं मर्फी ने जांच में यह कहा कि वह खिलाड़ियों को उपचार के लिए बुलाने के लिए लॉकर रूम और स्नान क्षेत्र में जाते थे।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह मामला फिलहाल सीविल स्तर पर चल रहा है और अभी तक किसी आपराधिक सजा या दोषसिद्धि की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने खेल संस्थानों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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