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UN में भी पिट गए ईरान के दुश्मन, कैसे ढाल बन कर खड़े हो गए रूस-चीन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तैना के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान और स्टेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक अहम प्रस्ताव पर तीखी कूटनीतिक जंग देखने को मिली। बहरीन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य हुरमूस जलडमरू मध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान के कथित आक्रामक व्यवहार को रोकना था। इस प्रस्ताव को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का समर्थन प्राप्त था। लेकिन अंततः रूस और चीन ने अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में कई हफ्तों तक चली चर्चा और कूटनीतिक प्रयासों के बाद इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। सुरक्षा परिषद के कुल 15 सदस्य देशों में से 11 ने इसके पक्ष में वोट किया। जबकि पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। भारी समर्थन के बावजूद प्रस्ताव पारित नहीं हो सका क्योंकि रूस और चीन ने वीटो का इस्तेमाल करते हुए इसे रोक दिया। 

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी प्रस्ताव पर मंगलवार को वीटो लगा दिया। यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। होर्मुज को ईरान ने सिर्फ मित्र राष्ट्रों के लिए खोला है। 15 सदस्यीय परिषद में बहरीन की ओर से पेश प्रस्ताव को 11 देशों का समर्थन मिला, जबकि रूस और चीन ने विरोध किया और दो देशों ने मतदान से परहेज किया। वीटो के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। वोटिंग से पहले यूएई ने कहा कि ईरान की कार्रवाई से वैश्विक स्तर पर खाद्य और ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और आपूर्ति बाधित हो रही है। शुरुआती मसौदे में बल प्रयोग की अनुमति थी, लेकिन विरोध के बाद इसे केवल रक्षात्मक उपायों तक सीमित किया गया। बहरीन अभी अप्रैल महीने के लिए काउंसिल का प्रेजिडेंट है।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने डेडलाइन खत्म होने से कुछ मिनट पहले ही सीज फायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर के अनुरोध पर दो हफ्ते का युद्ध विराम किया जा रहा है। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान स्टेट ऑफ होमोस को खोलने के लिए तैयार हो गया है और उनके 10 सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है। ट्रंप ने लिखा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही स्टेट ऑफ होमोस को पूरा तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो हफ्ते के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि दो तरफा सीज फायर होगा। इसकी वजह यह है कि हमने अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को ना केवल पूरा कर लिया है बल्कि उनसे कहीं आगे निकल चुके हैं। इसके अलावा ईरान के साथ शांति और मध्य पूर्व में शांति के लिए हम एक ठोस समझौते के बहुत करीब हैं। 

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बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है होम्योपैथी, बिना साइड इफेक्ट के इलाज

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के समय में हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता होती है अपने बच्चे की सेहत। जरा-सी खांसी, बुखार या पेट दर्द होते ही हम तुरंत इलाज की ओर भागते हैं। लेकिन इसी के साथ दवाइयों के साइड इफेक्ट का डर भी रहता है। ऐसे में होम्योपैथी एक ऐसा विकल्प है, जिसे कई लोग सुरक्षित इलाज के रूप में देखते हैं।

होम्योपैथी की सबसे खास बात यह मानी जाती है कि इसमें दवाइयां बहुत हल्की और शरीर के अनुरूप होती हैं। यही वजह है कि बच्चों के लिए इसे अक्सर पसंद किया जाता है। छोटे बच्चों का शरीर नाजुक होता है, इसलिए माता-पिता चाहते हैं कि इलाज ऐसा हो जो असरदार भी हो और नुकसानदायक भी न हो। होम्योपैथी इस जरूरत को काफी हद तक पूरा करती है।

बचपन में बच्चों को बार-बार सर्दी-जुकाम, खांसी, पेट की गड़बड़ी या दांत निकलने के समय परेशानी जैसी कई छोटी-छोटी समस्याएं होती रहती हैं। ऐसे मामलों में कई परिवार होम्योपैथी पर भरोसा करते हैं। माना जाता है कि यह सिर्फ बीमारी को दबाने के बजाय शरीर की अंदरूनी प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बेहतर बनाने पर ध्यान देती है।

एक और वजह जिससे लोग होम्योपैथी की ओर आकर्षित होते हैं, वह है इसका आसान सेवन। इसकी दवाइयां अक्सर मीठी गोलियों के रूप में होती हैं, जिन्हें बच्चे बिना किसी परेशानी के ले लेते हैं। यह बात भी माता-पिता के लिए राहत भरी होती है, क्योंकि बच्चों को कड़वी दवा खिलाना अक्सर मुश्किल हो जाता है।

बच्चों के विकास के दौरान उनकी इम्युनिटी मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। इस संदर्भ में होम्योपैथी को कुछ लोग एक सहायक विकल्प के रूप में अपनाते हैं, जिससे बार-बार होने वाली बीमारियों की आवृत्ति कम करने में मदद मिल सके। हालांकि, इसके साथ संतुलित आहार, साफ-सफाई और सही दिनचर्या भी उतनी ही जरूरी है।

हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि हर तरह की बीमारी के लिए एक ही तरीका सही नहीं होता। होम्योपैथी को कई लोग हल्की और शुरुआती समस्याओं में उपयोगी मानते हैं, लेकिन गंभीर या आपात स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। सही इलाज वही है, जो बच्चे की स्थिति के अनुसार चुना जाए।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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