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युद्ध के बीच चीन का बड़ा एक्शन! पूरी दुनिया हैरान!

मिडिल ईस्ट में जंग अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। एक तरफ अमेरिका इजराइल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं तो दूसरी तरफ ईरान भी जवाबी कारवाही में पीछे नहीं है। लेकिन इसी वैश्विक तनाव के बीच चीन का एक नया खतरा सिर उठा रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ती जंग के बीच चीन की गतिविधियों ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। चीन ने अचानक अपने पूर्वी तट के पास सबसे बड़े हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है। यह कोई सामान्य कदम नहीं है। आमतौर पर ऐसे प्रतिबंध कुछ दिनों के सैन्य अभ्यास के लिए लगाए जाते हैं। दुनिया को परेशान कर रहा है क्योंकि चीन ने अचानक 40 दिनों के लिए एयर स्पेस बंद कर दिया है। यह प्रतिबंध येलो सी और ईस्ट चाइना सी के हिस्से में लगाया गया है जो करीब 25,900 वर्ग किमी.बताया जा रहा है। 

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6 मई तक लागू यह नोटम अलर्ट किसी बड़े सैन्य अभ्यास या रणनीतिक तैयारी की ओर इशारा कर रहा है। एक तरफ ड्रैगन ने अचानक एयरस्पेस को बंद कर दिया तो दूसरी तरफ ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि चीन के फाइटर जेट्स, युद्धपोत और जहाज ताइवान के आसपास एक्टिव हो गए हैं। दावा किया गया कि चीन के विमान मीडियन लाइन पार कर ताइवान के एयर डिफेंस ज़ोन में घुस चुके हैं। जिसे देखते हुए ताइवान की सेना हाई अलर्ट पर है और हर गतिविधि पर नजर रख रही है। ताइवान को भी पता है कि यह सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं हो सकता। इतने बड़े पैमाने पर हवाई क्षेत्र को रिजर्व करना संयुक्त सैन्य ऑपरेशन, मिसाइल टेस्टिंग और युद्ध तैयारी का संकेत हो सकता है। क्योंकि चीन की एयरफोर्स, नेवी और मिसाइल फोर्स का एक साथ अभ्यास में जुटना कोई आम बात नहीं। एक तरफ अमेरिका मिडिल ईस्ट में उलझा हुआ है। ईरान से उसे कड़ी टक्कर मिल रही है।

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यही वजह है कि अमेरिका ने पूरा फोकस मिडिल ईस्ट की तरफ लगा दिया है। इसी मौके का फायदा उठाकर चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है। ऐसा इसीलिए क्योंकि चीन पहले ही 2027 तक ताइवान पर नियंत्रण का लक्ष्य जाहिर कर चुका है। इसी को देखते हुए ताइवान भी तैयारी में जुटा है। लगातार अपना रक्षा बजट बढ़ाता जा रहा है। सैन्य सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं और अमेरिका से हथियार खरीदने की योजना पर काम हो रहा है। मिडिल ईस्ट जंग के बीच अगर चीन ने ताइवान पर हमला कर दिया तो एक और नया मोर्चा खुल जाएगा। चीन कहता है कि ताइवान उसी का हिस्सा है और यह उसकी सरकारी नीति का हिस्सा है। जबकि ताइवान खुद को एक अलग देश मानता है और उसकी अपनी सरकार, अपनी सेना, अपनी अर्थव्यवस्था है। यानी वो अपने तरीके से चलता है। यह मुद्दा दुनिया भर में विवाद बना हुआ है कि कौन सही है और कौन गलत। इस पर अलग-अलग देशों की अलग-अलग राय है। फिलहाल चीन ने अपने इरादों पर चुप्पी साध रखी है। 

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'कभी नहीं जीतते नफरत और हिंसा, हमेशा होती है साहस की जीत', प्रियंका गांधी वाड्रा ने की ईरान की सराहना

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरान के लोगों की प्रशंसा की और कहा कि नफरत, गुस्सा, हिंसा व अन्याय कभी नहीं जीतते। साहस हमेशा जीतता है।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ईरानी पुरुषों और महिलाओं ने अपने देश के संसाधनों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाई, जबकि पश्चिमी ताकतों ने घिनौनी भाषा का इस्तेमाल करते हुए एक सभ्यता के अंत की घोषणा की। दुनिया देख रही है और समझ रही है कि कैसे पश्चिम के चेहरे से नैतिकता का नकाब हट रहा है। नफरत, गुस्सा, हिंसा और अन्याय कभी नहीं जीतते। साहस हमेशा जीतता है।

इसी बीच, कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक पोस्ट में लिखा, पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में एक तरफ अमेरिका और इजरायल व दूसरी तरफ ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में लागू हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम का सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शासन के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग के साथ शुरू हुआ था।

जयराम रमेश ने युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका के बाद एक्स पोस्ट में लिखा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जारी समर्थन के कारण पाकिस्तान को अलग-थलग करने और दुनिया को यह विश्वास दिलाने की नीति कि वह एक विफल राष्ट्र है, स्पष्ट रूप से सफल नहीं हुई है, जैसा कि मनमोहन सिंह ने मुंबई आतंकी हमलों के बाद कर दिखाया था। यह तथ्य कि एक दिवालिया अर्थव्यवस्था, जो पूरी तरह बाहरी डोनर्स की मदद पर निर्भर है, और कई मायनों में एक टूटे हुए देश ने ऐसी भूमिका निभा ली, पीएम मोदी की कूटनीतिक रणनीति और नैरेटिव प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, उन्होंने या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को 10 मई 2025 को अचानक और तत्काल क्यों रोक दिया गया, जिसकी पहली घोषणा अमेरिका के विदेश मंत्री ने की थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तब से लगभग सौ बार श्रेय ले चुके हैं। हर जगह एक स्पष्ट राहत की भावना है। विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दलाल कहकर खारिज किया था। लेकिन अब स्वयंभू विश्वगुरु पूरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं। उनका स्वयं घोषित 56 इंच का सीना सिमटकर रह गया है। उनकी कायरता न केवल इजरायल की आक्रामकता पर, बल्कि व्हाइट हाउस में बैठे उनके करीबी मित्र की ओर से इस्तेमाल की जा रही पूरी तरह अस्वीकार्य और शर्मनाक भाषा पर भी उनकी चुप्पी से पता चलती है।

--आईएएनएस

डीसीएच/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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