फिजिकल हेल्थ- चांदीपुरा वायरस से 3 बच्चों की मौत:डॉक्टर से जानें ये क्या है, कैसे फैलता है, इसका लक्षण, इलाज और बचाव क्या है
हाल ही में गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 7 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 3 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ अन्य संदिग्ध मरीजों के सैंपल्स की जांच जारी है। ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (NCDC) के मुताबिक, भारत में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप समय-समय पर आता रहा है। इसके मामले खासकर मानसून के दौरान बढ़ते हैं, क्योंकि इस मौसम में वायरस फैलाने वाले कीड़े ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में चांदीपुरा वायरस की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- चांदीपुरा वायरस क्या है? जवाब- चांदीपुरा वायरस एक रेयर, लेकिन बेहद खतरनाक वायरल इन्फेक्शन है। इसकी पहचान पहली बार साल 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। इसलिए इसका नाम चांदीपुरा रखा गया। सवाल- यह वायरस कैसे फैलता है? जवाब- पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- मानसून में चांदीपुरा वायरस का खतरा क्यों बढ़ जाता है? जवाब- इसके कई कारण हैं- सवाल- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- शुरुआत में चांदीपुरा वायरस के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं। ग्राफिक में इसके सभी शुरुआती लक्षण देखिए- सवाल- चांदीपुरा वायरस के गंभीर लक्षण क्या हैं? जवाब- अगर संक्रमण तेजी से बढ़कर ब्रेन को प्रभावित करने लगे तो पेशेंट की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है। ऐसे में कुछ लक्षण दिख सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- संक्रमित होने के कितने दिन बाद लक्षण दिखते हैं? जवाब- चांदीपुरा वायरस से संक्रमित होने के आमतौर पर 3-6 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसे ‘इन्क्यूबेशन पीरियड’ कहा जाता है। कुछ बच्चों में बीमारी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में 24-48 घंटे के भीतर दौरे पड़ना, बेहोशी या ब्रेन में सूजन जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। सवाल- सामान्य वायरल बुखार और चांदीपुरा वायरस में फर्क कैसे पहचानें? जवाब- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण वायरल फीवर से मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन इनमें कुछ अंतर होता है। ग्राफिक में दोनों के बीच फर्क समझिए- सवाल- इस वायरस का खतरा किसे ज्यादा है? जवाब- चांदीपुरा वायरस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इन्फेक्शन का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों होता है? जवाब- इसकी कई वजहें हैं। नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– 1. बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है 2. वायरस का असर जल्दी गंभीर हो सकता है 3. बाहर खेलने से रिस्क बढ़ जाता है 4. शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लगते हैं ध्यान रखें अगर बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ें, बार-बार उल्टी हो, बहुत ज्यादा सुस्ती आए या बेहोशी होने लगे, तो तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाएं। सवाल- चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है? जवाब- अभी तक चांदीपुरा वायरस को खत्म करने वाली कोई खास दवा (एंटीवायरस) या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज उसके लक्षणों और हालत के अनुसार किया जाता है। इसे सपोर्टिव ट्रीटमेंट कहते हैं। सवाल- चांदीपुरा वायरस से बचाव कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसेकि- चांदीपुरा वायरस से जुड़े कुछ कॉमन सवाल–जवाब सवाल- क्या चांदीपुरा वायरस से संक्रमित हर बच्चे की मौत हो जाती है? जवाब- नहीं, चांदीपुरा वायरस से संक्रमित हर बच्चे की मौत नहीं होती। कई बच्चों में समय पर इलाज मिलने से वे पूरी तरह ठीक भी हो जाते हैं। हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से गंभीर होकर ब्रेन को प्रभावित कर सकता है। सवाल- क्या यह वायरस बड़ों को भी अटैक कर सकता है? जवाब- हां, वयस्कों में भी संक्रमण हो सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी और मौत का रिस्क बच्चों की तुलना में कम होता है। सवाल- क्या यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है? जवाब- नहीं, चांदीपुरा वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। सवाल- क्या इसके लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध है? जवाब- नहीं, फिलहाल चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। सवाल- क्या मच्छर भगाने वाली क्रीम या जाली से बचाव हो सकता है? जवाब- हां, क्योंकि यह वायरस कीटों के जरिए फैलता है। इसलिए कीटों से बचाव इन्फेक्शन का रिस्क कम कर सकता है। सवाल- क्या बुखार आते ही चांदीपुरा वायरस की जांच करानी चाहिए? जवाब- नहीं, हर बुखार चांदीपुरा वायरस की वजह से नहीं होता। …………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- रैट फीवर पर एडवाइजरी:बारिश में बढ़ता रिस्क, पानी में न भीगें, जानें सभी लक्षण और बचाव के लिए जरूरी सावधानियां मुंबई में लगातार बारिश और जलभराव के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने रैट फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) को लेकर हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। दूषित बाढ़ के पानी से फैलने वाली इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- मानसून में रिस्की है ड्राइविंग:पहले गाड़ी के ये पार्ट्स चेक करें, सुरक्षा के 15 नियम याद रखें, 12 गलतियां न करें
बारिश में ड्राइव करना काफी चैलेंजिंग होता है। सड़क पर कहीं पानी भरा होता है, तो कहीं कीचड़ जमा होता है। विजिबिलिटी भी कम हो जाती है। ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। बारिश में सड़क की स्थिति, ब्रेकिंग सिस्टम और गाड़ी पर कंट्रोल, तीनों बदल जाते हैं। इसलिए इस मौसम में गाड़ी चलाते हुए सेफ्टी का खास ख्याल रखना जरूरी है। इसलिए 'जरूरत की खबर' में आज हम बारिश में सुरक्षित ड्राइविंग के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- वीर बहादुर सिंह, यातायात प्रभारी, जालौन, उत्तर प्रदेश अमित खरे, फाउंडर ‘ASK CARGURU’ (ऑटोमोबाइल नॉलेज प्लेटफॉर्म) सवाल- बारिश में ड्राइव करना रिस्की क्यों होता है? जवाब- इसके कई कारण हैं। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- बारिश में ड्राइव करते समय लोग क्या कॉमन गलतियां करते हैं? जवाब- बारिश में ड्राइविंग के दौरान कई छोटी-छोटी गलतियां दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- बारिश में गाड़ी चलाते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- बारिश में ड्राइविंग के दौरान कुछ बुनियादी सावधानियों को ध्यान में रखकर खुद को खतरे से बचा सकते हैं। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए- सवाल- बारिश में ड्राइविंग से पहले गाड़ी में क्या चेक करना जरूरी है? जवाब- बारिश आने से पहले गाड़ी के वाइपर्स, विंडशील्ड क्लीनर, टायरों की ग्रिप और ब्रेक पैड्स समेत कुछ चीजें चेक करना जरूरी है। इससे सफर सुरक्षित रहता है। ग्राफिक में पूरी सेफ्टी चेकलिस्ट देखिए- सवाल- क्या बारिश में हाईवे पर ड्राइविंग ज्यादा खतरनाक है? जवाब- हां, इसके कई कारण हैं। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- कीचड़ और कच्ची सड़क पर ड्राइव करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- इस दौरान ये जरूरी सावधानियां जरूर बरतें- सवाल- अगर ड्राइविंग के समय तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश आए तो क्या करें? जवाब- इस दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अगर गाड़ी कीचड़ या गड्ढे में फंस गई है तो क्या करें? जवाब- ऐसे में कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं- सवाल- अगर बारिश में ड्राइविंग के दौरान कार बंद हो जाए तो क्या करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स समझिए- सवाल- अगर बारिश में ओवरटेक कर रहे हैं तो किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- बारिश में ब्लाइंड स्पॉट बढ़ जाते हैं, इसलिए जल्दबाजी में ओवरटेक न करें। सामने से आने वाली गाड़ी की दूरी सही आंकें। साथ ही कुछ बाताें का ध्यान रखें- बारिश में सेफ ड्राइविंग से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- मानसून में कार में कौन-सी इमरजेंसी चीजें रखनी चाहिए? जवाब- बारिश में गाड़ी में ये चीजें जरूर रखें- सवाल- बारिश में ड्राइविंग के दौरान क्या नहीं करना चाहिए? जवाब- मानसून में ये गलतियां न करें- सवाल- बारिश में कितनी स्पीड सुरक्षित मानी जाती है? जवाब- ये सड़क और बारिश की स्थिति पर निर्भर करती है। लेकिन आमतौर पर ड्राई रोड की तुलना में 20-30% कम स्पीड रखना सुरक्षित माना जाता है। सवाल- बारिश में इलेक्ट्रिक कार (EV) चलाना कितना सुरक्षित है? जवाब- अधिकांश EV वाटर-रेसिस्टेंट होती हैं, लेकिन गहरे पानी में ले जाना रिस्की हो सकता है। पानी भरी सड़क पर बैटरी या इलेक्ट्रिकल सिस्टम को नुकसान हो सकता है। ………………………….. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- मानसून में इलेक्ट्रॉनिक्स को रखें सेफ:पानी और नमी से बचाएं, ये कॉमन गलतियां न करें, प्रोटेक्शन के 12 टिप्स मानसून गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई परेशानियां भी लेकर आता है। इनमें से एक है ह्यूमिडिटी यानी नमी। घर में बढ़ी हुई नमी सिर्फ दीवारों और फर्नीचर को ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को भी नुकसान पहुंचाती है। पूरी खबर पढ़ें…
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