राष्ट्रीय पर्वों पर गुजरात का बड़ा तोहफा, मेजबान जिलों का विकास अनुदान हुआ दोगुना
नेशनल फेस्टिवल्स और गुजरात स्थापना दिवस के आयोजनों को विकास से जोड़ने के लिए गुजरात सरकार ने बड़ा फैसला किया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ऐसे जिलों को मिलने वाले विकास अनुदान को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है, जहां राजधानी गांधीनगर के बाहर राज्यस्तरीय समारोह आयोजित किए जाते हैं.
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण विकास, नगर पालिका और महानगरपालिका क्षेत्रों के लिए अलग-अलग 5-5 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. इस तरह महानगरपालिका वाले जिलों में कुल 15 करोड़ रुपये और बिना महानगरपालिका वाले जिलों में अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक विकास राशि उपलब्ध होगी. गुजरात सरकार की मानें तो पहले प्रत्येक श्रेणी में 2.50 करोड़ रुपये तक का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यानी प्रत्येक श्रेणी के अनुदान में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
2003 में शुरू हुई थी ये पहल
बता दें, साल 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परंपरा की शुरुआत की थी. इसके तहत उन्होंने गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गुजरात स्थापना दिवस जैसे कार्यक्रमों को राजधानी गांधीनगर तक सीमित रखने की बजाए अलग-अलग जिलों मे आयोजित किया. इसका उद्देश्य नेशनल फेस्टिवल्स को जनता के करीब ले जाने के साथ संबंधित क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देना भी रहा है.
इस बार इस शहर में होगा 15 अगस्त का राज्यस्तरीय कार्यक्रम
तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी के पद चिन्हों पर चलते हुए, 15 अगस्त 2026 का राज्यस्तरीय प्रमुख आयोजन अमरेली में आयोजित होगा. अमरेली महानगरपालिका नहीं है, जिस वजह से ग्रामीण और नगरपालिका को विकास के लिए कुल 10 करोड़ रुपये मिलेंगे. राज्य सरकार राष्ट्रीय पर्वों को सिर्फ समारोह तक सीमित रखना नहीं है बल्कि उनको देशभक्ति, जनभागिदारी और स्थानीय विकास के अवसर में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे मेजबान जिलों में विकास कार्यों को एक्स्ट्रा स्पीड मिलने की उम्मीद है.
‘भारत के लिए सब कुछ खोने को तैयार था’, अदनान सामी को भारतीय नागरिकता पाने के लिए लगे थे 18 साल, 2 बार हुआ रिजेक्शन
Adnan Sami Indian CItizenship: फेमस सिंगर अदनान सामी (Adnan Same) ने जूम संग इंटरव्यू के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में कई अनसुने किस्से शेयर किए. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें भारत की नागरिकता पाने के लिए 18 साल लग गए थे. इतना ही नहीं उन्होंने अपने पिता को खोने, तलाक और अपने मोटापे को लेकर बात की. अदनान ने बताया कि भारतीय नागरिक बनने का फैसला उनके लिए किसी फायदे का सौदा नहीं था, बल्कि इमोशनल और भारत के प्रति उनका प्यार था. उन्होंने यह भी बताया कि वह भारत के लिए सब कुछ खोने के लिए तैयार थे. आइए जातने हैं कि उन्होंने इस इंटरव्यू में क्या कुछ कहा है-
भारतीय नागरिकता पाने के लिए लगे थे 18 साल
अदनान सामी का जन्म 15 अगस्त 1973 को लंदन में हुआ था. उनके पिता अरशद सामी खान पाकिस्तानी राजनयिक और पाकिस्तान एयर फोर्स के ऑफिर रह चुके हैं. जबकि उनकी मां नौरीन जम्मू-कश्मीर से थीं. अदनान ने काफी लंबे समय से भारत में काम कर रहे हैं और यहां के म्यूजिक लवर्स के बीच अपनी खास पहचान बनाई. हालांकि भारतीय नागरिकता हासिल करना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था.अदनान ने बताया कि उन्हें भारतीय नागरिकता पाने के लिए 18 साल का लंबा स्ट्रगल करना पड़ा. इतना ही इस दौरान उन्हें दो बार आवेदन का रिजेक्शन भी झेलना पड़ा.
अचानक नहीं मिली भारत की नागरिकता
उन्होंने आगे उन लोगों की सोच पर भी हैरानी जताई जो मानते हैं कि उन्हें एकदम भारत की नागरिकता मिल गई. अदनान ने साफ कहा कि इसके पीछे लंबा इंतजार और कई मुश्किलें थीं. उन्होंने कहा, 'बहुत से लोग सोचते हैं कि एक दिन मैं उठा और अचानक मुझे नागरिकता मिल गई... इसमें बहुत समय लगा और दो बार रिजेक्शन भी झेलना पड़ा.' आपको बता दें कि उन्हें 1 जनवरी 2016 को भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर भारतीय नागरिकता दे दी.
‘भारत के लिए बहुत कुछ खोने को तैयार था’
अदनान सामी ने उन लोगों को भी कड़ा जवाब दिया, जो लोग उन पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने भारतीय नागरिकता अपने फायदे के लिए ली थी. उन्होंने कहा कि उनके फैमिली की फाइनेंशियल कंडिशन काफी मजबूत थी और इंडिया आने के फैसले में उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ा. अदनान ने कहा, 'माफ़ कीजिए, मैंने बहुत सारा पैसा गंवाया क्योंकि मैं एक बहुत अमीर फैमिली से आता हूं, उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं है कि मैं कौन हूं या मेरा फैमिली बैकग्राउंड क्या है. इसलिए उन लोगों को नहीं पता कि मैं भारत के प्रति प्यार की वजह से सब कुछ खोने के लिए तैयार था.'
भारतीय नागरिकता क्यों ली?
अदनान का कहना है कि वह जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका या कनाडा जैसे देशों की नागरिकता भी ले सकते थे, लेकिन उन्होंने भारत की नागरिकता ली. उनकी पत्नी भी जर्मनी से हैं वो वहां की नागरिकता आसानी से ले सकते थे. उन्होंने कहा, 'यह समझना इतना मुश्किल क्यों है कि आप किसी देश से प्यार करते हैं? मैं जर्मनी का नागरिक बन सकता था...मेरी पत्नी जर्मनी से हैं. मैं ब्रिटिश, अमेरिकी और कनाडा की भी नागरिकता ले सकता था. लेकिन मैंने भारत को क्यों चुना? क्योंकि मैं एक इमोशनल इंसान हूं और एक टिपिकल पठान हूं और जब मैं किसी चीज से प्यार करता हूं, तो मैं उसे अपना बनाना चाहता हूं.
लोगों ने 'पाकिस्तानी एजेंट' तक कहा
अदनान सामी को भारत में काम करने के दौरान कई तरह की आलोचनाओं को सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि उन्हें पाकिस्तानी एजेंट तक कहा गया. हालांकि उन्होंने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. अदनान ने अपने म्यूजिक से लोगों को जवाब दिया. उन्होंने 'कभी तो नजर मिलाओ' और 'तेरा चेहरा' जैसे गानों के जरिए इंडिया में बहुत नाम कमाया. वह पियानो पर भारतीय शास्त्रीय संगीत बजाने वाले शुरुआती म्यूजिशियन में भी गिने जाते हैं.
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