एंबुलेंस चालक बना डॉक्टर, टेक्नीशियन कर रहे थे ऑपरेशन... कानपुर किडनी रैकेट में खुलती जा रहीं परतें
Kanpur Kidney Racket: कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट घोटाले ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं. इस रैकेट में ऐसे लोग शामिल थे, जिनके पास डॉक्टर बनने की कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन वे खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज और यहां तक कि ऑपरेशन भी कर रहे थे.
कब हुई थी मामले की शुरुआत
इस मामले की शुरुआत 31 मार्च को हुई, जब पुलिस ने एक अस्पताल पर छापा मारा. आरोप था कि यहां बिना सरकारी अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे. छापे के दौरान एक महिला मिली, जिसकी किडनी बदली जा चुकी थी, और एक युवक मिला जिसे डोनर बताया गया. दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया.
कार्रवाई में कितनी गिरफ्तारी?
इस कार्रवाई में डॉक्टर दंपती डॉ. सुरजीत सिंह और डॉ. प्रीति आहूजा के साथ कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क था, जो अलग-अलग राज्यों से मरीजों को लाकर अवैध ट्रांसप्लांट करता था.
जब एंबुलेंस चालक बन गया ‘डॉक्टर’
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक एंबुलेंस चालक, शिवम, खुद को “डॉक्टर शिवम” बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था. पुलिस को उसके मोबाइल में कई वीडियो और फोटो मिले हैं, जिनमें वह मरीजों की जांच करता दिख रहा है. एक वीडियो में वह एक विदेशी महिला से अंग्रेजी में बात करते हुए उसका चेकअप करता नजर आ रहा है, जैसे वह कोई प्रशिक्षित डॉक्टर हो.
विदेशी मरीज भी बने शिकार
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं था. इसने विदेशी नागरिकों को भी निशाना बनाया. दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का भी यहां किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. ऑपरेशन के बाद जब उसकी तबीयत बिगड़ी, तो वही एंबुलेंस चालक ‘डॉक्टर’ बनकर उसका इलाज करता दिखा. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.
टेक्नीशियन कर रहे थे ऑपरेशन
जांच का दूसरा बड़ा खुलासा यह है कि ऑपरेशन करने वाले लोग भी असली डॉक्टर नहीं थे. पुलिस के मुताबिक, मुदस्सर अली सिद्दीकी नाम का व्यक्ति, जिसे डॉक्टर बताया जा रहा था, असल में एक ओटी टेक्नीशियन निकला. उसके परिवार ने भी पुष्टि की कि वह डॉक्टर नहीं है.
गाजियाबाद कनेक्शन भी आया सामने
इसके अलावा गाजियाबाद के कुलदीप और राजेश नाम के दो और टेक्नीशियन को गिरफ्तार किया गया है. ये सभी लोग डॉक्टर बनकर ऑपरेशन कर रहे थे. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी सिर्फ आठवीं पास थे, लेकिन मरीजों का इलाज कर रहे थे. एक अन्य आरोपी रोहित, जो कन्नौज का रहने वाला है, पहले गांव में झोलाछाप डॉक्टर था. बाद में उसने नर्सिंग होम खोल लिया और इस गिरोह से जुड़ गया.
अब तक 8 गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. पहले दिन 6 लोगों को पकड़ा गया था, जिनमें डॉक्टर दंपती और एंबुलेंस चालक शामिल थे. बाद में दो और टेक्नीशियन को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं. जांच अब लखनऊ, मेरठ, दिल्ली और कन्नौज तक फैल चुकी है.
कैसे चलता था पूरा रैकेट?
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह मरीजों और डोनर्स को अलग-अलग राज्यों से लाता था. उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता और फिर बिना किसी वैध अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया जाता. इस पूरे नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका तय थी जैसे कि कोई मरीज लाता था. किसी के ऊपर कागजी काम संभालने की जिम्मेदारी थी और कोई ऑपरेशन करता था.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल
इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं जैसे कि-
बिना अनुमति के ट्रांसप्लांट कैसे हो रहे थे?
बिना डिग्री वाले लोग ऑपरेशन कैसे कर रहे थे?
इतने लंबे समय तक यह सब बिना पकड़े कैसे चलता रहा?
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. आरोपियों के मोबाइल और दस्तावेजों से कई अहम सुराग मिले हैं.
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भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने पीएम तारिक से की मुलाकात, भारत-बांग्लादेश के आपसी हितों पर हुई चर्चा
ढाका, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने सोमवार को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट की। बांग्लादेश के पीएमओ की तरफ से जारी एक रिलीज में कहा गया कि यह मीटिंग बांग्लादेश सचिवालय में प्रधानमंत्री के दफ्तर में हुई।
दोनों नेताओं ने मुलाकात के दौरान भारत और बांग्लादेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान और प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कोबीर भी इस दौरान मीटिंग में मौजूद थे।
वहीं बांग्लादेश में भारत के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात को लेकर कहा, उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने 6 अप्रैल 2026 को माननीय प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार के साथ मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-बांग्लादेश की राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जुड़े कई क्षेत्रों में लोगों पर केंद्रित सहयोग पर ध्यान देते हुए द्विपक्षीय बातचीत पर चर्चा की।
भारतीय दूतावास ने आगे कहा, उच्चायुक्त ने आपसी हित और आपसी फायदे के आधार पर एक सकारात्मक, रचनात्मक और आगे की सोच वाला नजरिया अपनाकर बांग्लादेश सरकार और लोगों के साथ मिलकर काम करने के भारत के इरादे से अवगत कराया।
इससे पहले ईद के मौके पर उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने पीएम तारिक रहमान से मुलाकात की थी। बाद में बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग ने जानकारी देते हुए एक्स पर कहा, उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में प्रधानमंत्री महामहिम तारिक रहमान के साथ गर्मजोशी से ईद की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया।
वहीं, बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार ने बताया कि भारत ने द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक और निवेश संबंधों को बढ़ाने के लिए बांग्लादेश की नई सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।
दरअसल, इससे पहले मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में वाणिज्य मंत्री खंडाकर अब्दुल मुक्तदिर के साथ मुलाकात की। इस दौरान भारतीय हाई कमीश्नर ने दोनों देशों की सरकारों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक और निवेश संबंधों समेत अन्य क्षेत्रों में साथ काम करने का जिक्र किया।
--आईएएनएस
केके/एएस
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