Responsive Scrollable Menu

अमेरिकी सीनेटरों ने चीन की चिप टूल एक्सेस पर रोक के लिए पेश किया एमएटीसीएच एक्ट

वाशिंगटन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका ने चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वियों को महत्वपूर्ण चिप निर्माण तकनीक तक पहुंचने से रोकने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस में अमेरिकी सीनेटरों ने उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों पर निर्यात नियंत्रण कड़ा करने के लिए विधेयक पेश किया।

प्रस्तावित मल्टीलेटरल अलाइनमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी कंट्रोल्स ऑन हार्डवेयर (एमएटीसीएच) अधिनियम का उद्देश्य मौजूदा नियंत्रणों की कमियों को दूर करना और अमेरिका की तकनीकी बढ़त और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों के साथ नीतियों में समन्वय स्थापित करना है।

प्रतिनिधि जॉन डब्ल्यू. मैनियन ने कहा, “अमेरिकी श्रमिकों, नवाचार और प्रतिभा ने दुनिया की सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री बनाई है। अमेरिका ग्लोबल मेमोरी चिप मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च की अगली पीढ़ी का नेतृत्व करने के लिए तैयार है, मैं उस भविष्य की रक्षा करने जा रहा हूं और यह सुनिश्चित करूंगा कि हम आगे रहें।”

उन्होंने आगे कहा कि यह बिल “उन टूल्स, तकनीक, नौकरियों और जानकारी की सुरक्षा करता है जो अमेरिका को चीन से आगे रखेंगे और 21वीं सदी की उन तकनीक में सबसे आगे रहेंगे, जिन पर दुनिया निर्भर है।”

यह कानून केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में खास चोकपॉइंट्स (समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख संकरे मार्ग) की पहचान करने और सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक जैसे एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने का निर्देश देता है। इसमें यह भी प्रस्ताव है कि अगर साझेदार देश अमेरिका की पाबंदियों का पालन नहीं करते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही एक और बिल है, जो सीनेटर पीट रिकेट्स और एंडी किम एक साथ ला रहे हैं। इसे सीनेटर जिम रिश और चक शूमर का समर्थन मिला है। सीनेटरों ने कहा कि मौजूदा एक्सपोर्ट कंट्रोल अभी भी बिखरे हुए हैं और अक्सर बिचौलियों के जरिए उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।

सीनेटर रिकेट्स ने कहा, सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता कम्युनिस्ट चीन के साथ टेक्नोलॉजी कॉम्पिटिशन के केंद्र में है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा नियम “इकाई-आधारित प्रतिबंधों का ऐसा ढांचा हैं, जिसे चीन आसानी से फ्रंट कंपनियों के जरिए दरकिनार कर देता है। यह बिल हमारे कंट्रोल को मजबूत करेगा और अमेरिकी कंपनियों के लिए बराबरी का मौका बनाएगा।”

सीनेटर एंडी किम ने कहा कि इस कोशिश का मकसद सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट को चीन और दूसरे दुश्मनों के हाथों से दूर रखना है। उन्होंने सहयोगी देशों के साथ तालमेल की जरूरत पर जोर दिया।

एमएटीसीएच एक्ट में डीप अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी इक्विपमेंट समेत जरूरी चिप बनाने वाले टूल्स पर पूरे देश में रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके तहत हुआवेई, एसएमआईसी और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों के संयंत्रों को प्रतिबंधित इकाइयों के रूप में चिह्नित कर निशाना बनाया गया है।

कांग्रेसी माइकल बॉमगार्टनर ने चेतावनी दी, “अमेरिका ऐसे कोई भी पीछे के दरवाजे खुले नहीं छोड़ सकता जिससे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में आगे बढ़ने के लिए जरूरी टूल्स मिल सकें।”

लॉमेकर्स ने तर्क दिया कि अमेरिका और सहयोगी एक्सपोर्ट सिस्टम के बीच गैप की वजह से चीनी कंपनियों को पाबंदियों के बावजूद जरूरी टेक्नोलॉजी तक पहुंचने का मौका मिला है।

बिल में ऐसे नियम शामिल हैं जिनसे अगर सहयोगी तय समय में साथ नहीं आते हैं, तो अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर विदेश में बनी चीजों पर अमेरिका का अधिकार क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।

समर्थकों का कहना है कि यह कानून आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका के लीडरशिप को बनाए रखने के लिए जरूरी है। बिल का समर्थन करने वाले विश्लेषक ने कहा कि कंट्रोल में गैप की वजह से चीन को बड़ी मात्रा में एडवांस्ड इक्विपमेंट हासिल करने का मौका मिला है।

रयान फेडासियुक ने कहा, “चीन इस अंतर का लगातार फायदा उठा रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि सहयोगी देशों के नियंत्रण हमेशा उसी तरह लागू नहीं होते।

यह कदम घरेलू सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन को मजबूत करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस की पहले की कोशिशों पर आधारित है। यह चिप बनाने में चीन की तेजी से हो रही तरक्की और रक्षा और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसके असर को लेकर वाशिंगटन में बढ़ती चिंता को भी दिखाता है।

सेमीकंडक्टर को एआई, डिफेंस सिस्टम और ग्लोबल सप्लाई चेन का समर्थन करने वाली एक रणनीतिक तकनीक के तौर पर देखा जाता है। अमेरिका ने हाल के सालों में चीन की एडवांस्ड चिप्स और मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट तक पहुंच को धीमा करने के लिए कई बार एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए हैं।

अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों में मतभेद एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिसके चलते कांग्रेस में तकनीक पर नियंत्रण के लिए अधिक समन्वित और बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग तेज हो गई है।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

समुद्र की गहराई में छिपा बड़ा खतरा, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण भारत को डेटा ब्लैकआउट होने का डर सताया

ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के मध्य पूर्व में फैलने के बाद से एक छिपा हुआ खतरा मंडराने लगा है. यह समुद्र की गहराई में छिपा है. स्ट्रेट आफ होर्मुज और रेड सी से गुजरने वाले अहम अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबलों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. ये केबल दुनिया के अधिकांश इंटरनेट का आधार हैं. इस आधुनिक सूचना युग में, अंडरसी केबल डिजिटल कनेक्टिविटी की मजबूत नींव बन गए हैं. 

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ के अनुसार, करीब 99 प्रतिशत अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक पनडुब्बी केबलों के जरिए से होता है. हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर युद्धग्रस्त वाले क्षेत्र में केबलों के बुनियादी ढांचे पर किसी तरह का खतरा नहीं बताया है. मगर रेड सी में इस पर खतरे आशंकाएं काफी बढ़ गई हैं. खासकर ईरान समर्थित हौतियों के संघर्ष में शामिल होने के बाद यमानी विद्रोही समूह ने कई मौकों पर रेड सी में फाइबर-ऑप्टिक केबलों को काटने की धमकी दे चुके हैं.

भारत की इंटरनेट केबलों पर निर्भरता 

इन केबलों में किसी भी तरह की रुकावट भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है. इसकी वजह देश के करीब 60 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचालन खाड़ी देशों से होकर गुजरने वाली उस अहम केबल के जरिए ही होता है. ये मुंबई से यूरोप तक जाती है. शेष ट्रैफिक चेन्नई से होकर सिंगापुर और प्रशांत महासागर से होते पूर्व की ओर जाता है.

इस तरह से भारत के इंटरनेट नेटवर्क का अधिकतर भाग भू-राजनीतिक तनावों के प्रति असुरक्षित हो जाता है. रेड सी में केबल कटौती की समस्या काफी समयसे रही है. युद्ध ने हालात को और गंभीर बना दिया है. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, यह खतरा काफी बड़ा है. अगर केबलों को नुकसान होता है तो इसे एक वैश्विक खतरे के रूप में देखा जाएगा. 

रेड सी में 17 पनडुब्बी केबल गुजरती हैं

रिपोर्ट के तहत, रेड सी से होकर करीब 17 पनडुब्बी केबल गुजरती हैं. हर केबल,  जो फाइबर-ऑप्टिक कोर, तांबे के तार और प्लास्टिक शीट से बनी होती है, औसतन 100 गीगाबाइट डेटा को संचारित करती है. इस तरह से मार्ग तैयार करने में एक साल  तक का वक्त लग सकता है. इनमें किसी भी तरह के नुकसान से डेटा ब्लैकआउट होने की संभावना बन सकती है. इंटरनेट किसी एक मार्ग पर निर्भर नहीं होता है. कनेक्टिविटी केबलों के एक नेटवर्क के जरिए काम करता है. अगर एक केबल रुक भी जाता है तो ट्रैफिक  दूसरे के जरिए चल सकता है. मगर नेटवर्क में अस्थायी व्यवधान भी दूरसंचार और इंटरनेट कंपनियों के लिए बड़ा महंगा होगा. इस तरह से ट्रैफिक प्रबंधन पर असर होगा. 

Continue reading on the app

  Sports

कार्तिकेय सिंह चौहान के मानहानि दावे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, पनामा पेपर लीक पर दिए बयान से जुड़ा है मामला

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान और कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी जल्द ही हाईकोर्ट में आमने सामने दिखाई देंगे। कार्तिकेय ने राहुल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसे लेकर राहुल गांधी ने एमपी एमएलए कोर्ट के समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। … Fri, 03 Apr 2026 12:35:37 GMT

  Videos
See all

Kanpur Kidney Racket Burst: कानपुर किडनी कांड में एक्शन, Ghaziabad से दो टेक्नीशियन गिरफ्तार | UP #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-03T07:45:03+00:00

हिंदुओं से लूटा सामान ईरान को किया दान | Kashmiri Hindus | Iran | Bangladesh | Taliban | Turkey #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-03T07:46:41+00:00

बुर्का पहनी खातून ने पिस्टल दिखाकर लूटी ज्वेलरी #up #ayodhya #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-03T07:40:04+00:00

Shorts : सीमा हैदर ने किया कुआं पूजन | Top News | Viral News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-03T07:41:50+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers