भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। निर्देशक नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण' का बहुप्रतीक्षित टीज़र वैश्विक स्तर पर एक साथ रिलीज़ कर दिया गया है। इस टीज़र की सबसे बड़ी हाइलाइट रणबीर कपूर का 'भगवान राम' के रूप में पहला आधिकारिक लुक है, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। फिल्म की टैगलाइन—"Before the Hero, there was Ram"—कहानी की गहराई और राम के आदर्शों को रेखांकित करती है। प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा द्वारा पेश किए गए इस टीज़र में केवल रणबीर ही नहीं, बल्कि फिल्म के अन्य मुख्य किरदारों की भी प्रभावशाली झलक दिखाई गई है:
रणबीर कपूर: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के रूप में।
साई पल्लवी: माता सीता के शांत और दिव्य स्वरूप में।
यश (KGF फेम): लंकेश रावण के शक्तिशाली और रौद्र अवतार में।
रवि दुबे: लक्ष्मण के रूप में वीरता और समर्पण की झलक।
यह एक ऐसी कहानी है जो 5,000 से भी ज़्यादा सालों से चली आ रही है। कई लोगों के लिए यह कहानी बहुत जानी-पहचानी, लगभग अपनी सी लगती है। वहीं, कुछ लोगों के लिए यह पहला मौका हो सकता है जब वे इसे इतने बड़े पैमाने पर और इतने शानदार विज़ुअल अंदाज़ में सामने आते हुए देखेंगे।
रामायण से रणबीर कपूर का भगवान राम के रूप में पहला लुक सामने आया
रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने एक खास टीज़र के ज़रिए 'राम' से दर्शकों का परिचय कराया है। यह पहली बार है जब रणबीर कपूर को इस किरदार में पूरी तरह से देखा गया है। अब दर्शकों को इस बात का काफी हद तक अंदाज़ा हो गया है कि फ़िल्म का मिजाज़ कैसा होगा और RK भगवान राम के रूप में कैसे दिखेंगे। टीज़र में यश की रावण के रूप में, साई पल्लवी की सीता के रूप में और रवि दुबे की लक्ष्मण के रूप में भी झलकियाँ दिखाई गई हैं। फ़िल्म की टैगलाइन है, "हीरो के आने से पहले, राम थे।"
राम की सबसे खास बात यह नहीं है कि वे क्या करते हैं, बल्कि यह है कि वे क्या नहीं करने का फ़ैसला करते हैं। वे सत्ता को छोड़ देते हैं, जबकि वे उसे अपने पास रख सकते थे। वे अपने कर्तव्य को हर चीज़ से ऊपर रखते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें कितनी भी बड़ी कीमत चुकानी पड़े। 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के नाम से मशहूर राम, नुकसान, वनवास और अन्याय के पलों में भी गरिमा, संयम और नैतिक स्पष्टता का एक आदर्श पेश करते हैं। यही वजह है कि यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई है।
रामायण: नितेश तिवारी, रणबीर कपूर और नमित मल्होत्रा ने फ़िल्म के बारे में बात की
रामायण (जो कि दो हिस्सों वाली फ़िल्म सीरीज़ है) के डायरेक्टर नितेश तिवारी ने कहा, "रामायण की महानता उसकी भावनात्मक गहराई में छिपी है। असल में, यह सिर्फ़ अच्छाई और बुराई की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे फ़ैसलों, उनके नतीजों और सही काम करने की ज़िम्मेदारी के बारे में है। राम की यात्रा बेहद मानवीय है, और हमने इसी बात के प्रति पूरी तरह से ईमानदार रहने की कोशिश की है।" रणबीर कपूर ने राम का किरदार निभाने के बारे में बात करते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं यहाँ राम का प्रतिनिधित्व करने आया हूँ। मैं तो यहाँ उनसे सीखने आया हूँ। उनमें एक ऐसी सादगी और पवित्रता है जो बहुत ही दुर्लभ है; और उसे समझने और अपने भीतर उतारने की कोशिश करना मेरे लिए एक बेहद विनम्र अनुभव रहा है।”
रामायण के प्रोड्यूसर, फ़िल्म-मेकर और क्रिएटिव आर्किटेक्ट नमित मल्होत्रा ने कहा, “राम की कहानी की असली ताक़त इस बात में नहीं है कि उन्होंने क्या जीता, बल्कि इस बात में है कि उन्होंने क्या त्याग दिया। वे एक ऐसे आदर्श का प्रतिनिधित्व करते हैं जो आसान नहीं है, सुविधाजनक नहीं है; लेकिन ज़रूरी है। वे अपनी इच्छाओं से ऊपर अपने कर्तव्य को चुनते हैं, अपने आराम से ऊपर सच्चाई को चुनते हैं, और अपने स्वार्थ से ऊपर त्याग को चुनते हैं। यही वजह है कि उनकी कहानी हज़ारों सालों से चली आ रही है, और आज भी उसका उतना ही महत्व है।”
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बजरंग बली हनुमान का जन्म भगवान श्रीराम की सहायता के लिए हुआ। हनुमान जी को भगवान शंकर का अवतार भी माना जाता है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सेवा के निमित्त भगवान शिव जी ने एकादश रुद्र को ही हनुमान के रूप में अवतरित किया था। हनुमान जी चूंकि वानर−उपदेवता श्रेणी के तहत आते हैं इसलिए वे मणिकु.डल, लंगोट व यज्ञोपवीत धारण किए और हाथ में गदा लिए ही उत्पन्न हुए थे। पुराणों में कहा गया है कि उपदेवताओं के लिए स्वेच्छानुसार रूप एवं आकार ग्रहण कर लेना सहज सिद्ध है। पुराणों के अनुसार, इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं। माता अंजनी एवं पवन देवता के पुत्र हनुमान का जीवनकाल पराक्रम और श्रीराम के प्रति अटूट निष्ठा की असंख्य गाथाओं से भरा पड़ा है। हनुमान जी में किसी भी संकट को हर लेने की क्षमता है और अपने भक्तों की यह सदैव रक्षा करते हैं। हनुमान रक्षा स्त्रोत का पाठ यदि नियमित रूप से किया जाए तो कोई बाधा आपके जीवन में नहीं आ सकती। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करने से बड़े से बड़ा भय दूर हो जाता है।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी के पूजन का विशेष महत्व है। हनुमान जी भक्तों से विशेष प्रेम करते हैं और उनकी हर पुकार को सुनते हैं। श्रीराम की नित उपासना करने वालों पर हनुमान जी खूब प्रसन्न रहते हैं। हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमानजी की पूजा विधि विधान से करनी चाहिए। इसके लिए पूजा के स्थान पर उनकी मूर्ति स्थापित करके शुद्ध जल, दूध, दही, घी, मधु और चीनी का पंचामृत, तिल के तेल में मिला सिंदूर, लाल पुष्प, जनेऊ, सुपारी, नैवेद्य, नारियल का गोला चढ़ाएं और तिल के तेल का दीपक जलाकर उनकी पूजा करें। इससे हनुमान जी प्रसन्न होकर भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं।
हनुमान जी के बचपन से जुड़ा एक प्रचलित प्रसंग यह है कि एक बार बालक हनुमान ने पूर्व दिशा में सूर्य को उदय होते देखा तो वह तुरंत आकाश में उड़ चले। वायुदेव ने जब यह देखा तो वह शीतल पवन के रूप में उनके साथ चलने लगे ताकि बालक पर सूर्य का ताप नहीं पड़े। अमावस्या का दिन था। राहु सूर्य को ग्रसित करने के लिए बढ़ रहा था तो हनुमानजी ने उसे पकड़ लिया। राहु किसी तरह उनकी पकड़ से छूट कर भागा और देवराज इंद्र के पास पहुंचा। इंद्र अपने प्रिय हाथी ऐरावत पर बैठकर चलने लगे तो हनुमान जी ऐरावत पर भी झपटे। इस पर इंद्र को क्रोध आ गया। उन्होंने बालक पर वज्र से प्रहार किया तो हनुमान जी की ठुड्डी घायल हो गई। वह मूर्छित होकर पर्वत शिखर पर गिर गए। यह सब देखकर वायुदेव को भी क्रोध आ गया। उन्होंने अपनी गति रोक दी और अपने पुत्र को लेकर एक गुफा में चले गए। अब वायु के नहीं चलने से सब लोग घबरा गए। देवतागण सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी के पास पहुंचे। सारी बात सुनकर ब्रह्माजी उस गुफा में पहुंचे और हनुमान जी को आर्शीवाद दिया तो उन्होंने आंखें खोल दीं। पवन देवता का भी क्रोध शांत हो गया। ब्रह्माजी ने कहा कि इस बालक को कभी भी ब्रह्म श्राप नहीं लगेगा। इसके बाद उन्होंने सभी देवताओं से कहा कि आप सब भी इस बालक को वर दें। इस पर देवराज इंद्र बोले कि मेरे वज्र से इस बालक की हनु यानि ठोढ़ी पर चोट लगी है इसलिए इसका नाम हनुमान होगा। सूर्य ने अपना तेज दिया तो वरूण ने कहा कि हनुमान सदा जल से सुरक्षित रहेंगे। इस प्रकार हर देवता ने हनुमानजी को वर प्रदान किया जिससे वह बलशाली हो गए।
एक और प्रसंग यह है कि सूर्यदेव के कहने पर हनुमान जी ने उन्हें सुग्रीव की मदद करने का वचन दिया। बाद में हनुमान ने सुग्रीव की भरपूर मदद की और उनके खास मित्र बन गए। सीताजी का हरण करके रावण जब उन्हें लंका ले गया तो सीताजी को खोजते श्रीराम और लक्ष्मण जी से हनुमान जी की भेंट हुई। उनका परिचय जानने के बाद वह उन दोनों को कंधे पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले गए। सुग्रीव के बारे में जानकर श्रीराम ने उन्हें मदद का भरोसा दिया और सुग्रीव ने भी सीताजी को ढूंढ़ने में मदद करने का वादा किया। श्रीराम ने अपने वादे के अनुसार एक ही तीर में बाली का अंत कर दिया और सुग्रीव फिर से किष्किन्धा नगरी में लौट आए। उसके बाद सुग्रीव का आदेश पाकर प्रमुख वानर दल सीताजी की खोज में सब दिशाओं में चल दिए। श्रीराम जी ने हनुमान जी से कहा कि मैं आपकी वीरता से परिचित हूं और मुझे विश्वास है कि आप अपने लक्ष्य में कामयाब होंगे। इसके बाद श्रीराम जी ने हनुमानजी को अपनी एक अंगूठी दी जिस पर उनका नाम लिखा हुआ था। सीताजी का पता मिलने के बाद जब हनुमान जी लंका में पहुंचे तो उन्होंने माता सीता से भेंटकर उन्हें श्रीराम का संदेश दिया और लंका की पूरी वाटिका उजाड़ने के बाद लंका में आग भी लगा दी। इसके बाद सीताजी को मुक्त कराने के लिए जो युद्ध हुआ उसमें हनुमान जी ने महती भूमिका निभाई।
- शुभा दुबे
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