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धरती की चेतावनी को सुनिए, प्रकृति का धैर्य अब जवाब दे रहा है

पूरी दुनिया में मौसम के तेजी से बिगड़ते मिजाज के कारण विभिन्न देशों में प्रकृति की मार अब स्पष्ट नजर आने लगी है। प्रकृति के साथ खिलवाड़ का ही परिणाम है कि अब हर साल देश के कई हिस्से भारी बारिश के कारण बाढ़ की वजह से त्राहि-त्राहि करते नजर आते हैं जबकि कई हिस्से मानसून के दौरान भी पर्याप्त बारिश के लिए तरसते रह जाते हैं। इस वर्ष भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। दुनिया के कई ठंडे इलाके अब ग्लोबल वार्मिंग के कारण तपने लगे हैं तो कई सूखे इलाके बाढ़ से त्रस्त हैं, जंगल झुलस रहे हैं। बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन और मौसम चक्र में आते बदलाव के कारण पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियों के अलावा जीव-जंतुओं की कई प्रजातियों के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पर्यावरण के तेजी से बदलते इस दौर में वैश्विक स्तर पर लोगों का ध्यान इन समस्याओं की ओर आकृष्ट करने के लिए ही प्रतिवर्ष 28 जुलाई को ‘विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस’ मनाया जाता है, जिसके माध्यम से वातावरण में हो रहे व्यापक बदलावों के चलते लगातार विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही जीव जंतुओं और वनस्पतियों की अनेक प्रजातियों की रक्षा का संकल्प लिया जाता है। विश्वभर में आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते प्रकृति के साथ बड़े पैमाने पर जो खिलवाड़ हो रहा है, उसके मद्देनजर आमजन को जागरूक करने के लिहाज से आज के समय में प्रकृति संरक्षण दिवस की महत्ता बढ़ गई है।

2020 में कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के दौर में पूरी दुनिया ने पहली बार प्रकृति को खुलकर मुस्कराते देखा था क्योंकि तब औद्योगिक इकाईयां, हवाई व रेल यात्राएं, बस यात्रा तथा निजी वाहनों का आवागमन बंद होने से हर तरह के प्रदूषण का स्तर पूर्ण रूप से नियंत्रित हो गया था। गंगा, यमुना जैसी जो पवित्र नदियां कई जगहों पर गंदे नालों की भांति बहती दिखाई देती थी, उनमें जल की निर्मल धारा बहने लगी थी। जिन नदियों को साफ करने के लिए पिछले कुछ दशकों में अनेक योजनाएं और समितियां बनी तथा नदियों की स्वच्छता के नाम पर अरबों-खरबों रुपये खर्च हो गए, लॉकडाउन के दौरान वे स्वतः ही स्वच्छ और निर्मल हो गई थी। पहली बार देखा गया था कि किस प्रकार लॉकडाउन के चलते लोगों के घरों में बंद रहने और सभी प्रकार के व्यावसायिक कार्य बंद हो जाने से हवा इतनी शुद्ध हो गई थी कि सैंकड़ों किलोमीटर दूर स्थित पर्वतों की चोटियां भी स्पष्ट दिखाई दी थी। जिन नन्हीं चिड़ियों की चहचहाहट को हमारे कान तरस गए थे, ब्रह्म मुहूर्त में उनकी मधुर आवाज फिर से सुनाई देनी लगी थी। प्रकृति के उस साफ-सुथरे स्वरूप को देखकर हर कोई खुश था। दरअसल प्रकृति को स्वयं अपनी मरम्मत करने और खुद को सजाने-संवारने का सुअवसर मिला था लेकिन इंसानी गतिविधियां पुनः शुरू होते ही प्रकृति के साथ निर्मम खिलवाड़ का वही दौर पुनः शुरू हो गया, जिसका परिणाम इस समय दुनिया के तमाम देश भुगत रहे हैं।

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लॉकडाउन के दौर ने पूरी दुनिया को यह समझने का बेहतरीन अवसर दिया था कि इंसानी गतिविधियों के कारण ही प्रकृति का जिस बड़े पैमाने पर दोहन किया जाता रहा है, उसी के कारण स्वर्ग से भी सुंदर हमारी धरती कराहती रही है। प्रकृति मनुष्य को ऐसा न करने के लिए बार-बार किसी न किसी बड़ी आपदा के रूप में चेतावनियां भी देती रही है लेकिन उन चेतावनियों को सदा दरकिनार किया जाता रहा है। प्रकृति के साथ मानवीय छेड़छाड़ का ही नतीजा रहा है कि बीते कुछ वर्षों में मौसम चक्र में बदलाव स्पष्ट दिखाई दिया है। वर्ष दर वर्ष अब जिस प्रकार मौसम के बिगड़ते मिजाज के चलते समय-समय पर तबाही देखने को मिल रही है, ऐसे में हमें अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि मौसम चक्र के बदलाव के कारण प्रकृति संतुलन पर जो विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, उसकी अनदेखी के कितने भयावह परिणाम होंगे। प्रकृति बार-बार मौसम चक्र में बदलाव के संकेत, चेतावनी तथा संभलने का अवसर देती रही है लेकिन हम आदतन किसी बड़े खतरे के सामने आने तक ऐसे संकेतों या चेतावनियों को नजरअंदाज करते रहे हैं, जिसका नतीजा अक्सर भारी तबाही के रूप में सामने आता रहा है।

पिछले तीन दशकों से पर्यावरण प्रदूषण के कारण जिस प्रकार मौसम चक्र तीव्र गति से बदल रहा है और प्राकृतिक आपदाओं का आकस्मिक सिलसिला तेज हुआ है, उसके बावजूद यदि हम नहीं संभलना चाहते तो इसमें भला प्रकृति का क्या दोष? प्रकृति के साथ हम बड़े पैमाने पर जो छेड़छाड़ कर रहे हैं, उसी का नतीजा है कि पिछले कुछ समय में भयानक तूफानों, बाढ़, सूखा, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला तेजी से बढ़ा है। अपनी पुस्तक ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ में मैंने विस्तार से यह बताया है कि किस प्रकार पर्यावरण का संतुलन डगमगाने के चलते लोग अब तरह-तरह की भयानक बीमारियों के जाल में फंस रहे हैं। हमारे जो पर्वतीय स्थान कुछ सालों पहले तक शांत और स्वच्छ वातावरण के कारण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित किया करते थे, आज वहां भी प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और ठंडे इलाकों के रूप में विख्यात पहाड़ भी तपने लगने हैं, वहां भी जल संकट गहराने लगा है। दरअसल पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात के साधनों से बढ़ते प्रदूषण, बड़े-बड़े उद्योग स्थापित करने और राजमार्ग बनाने के नाम पर बड़े पैमाने पर वनों के दोहन, सुरंगें बनाने के लिए बेदर्दी से पहाड़ों का सीना चीरे जाने का ही दुष्परिणाम है कि हमारे इन खूबसूरत पहाड़ों की ठंडक अब लगातार कम हो रही है। पहाड़ों में बढ़ती इसी गर्माहट के चलते हमें अक्सर घने वनों में भयानक आग लगने की खबरें भी सुनने को मिलती रहती हैं। पहाड़ों की इसी गर्माहट का सीधा असर निचले मैदानी इलाकों पर पड़ता है, जहां का पारा अब वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा है।

हालांकि प्रकृति बार-बार अपना रौद्र रूप दिखाकर स्पष्ट चेतावनी देती रही है कि यदि उसके साथ अंधाधुंध खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो उसके घातक परिणाम होंगे लेकिन विड़म्बना है कि लगातार प्रकृति का प्रचण्ड रूप देखते रहने के बावजूद प्रकृति की चेतावनियों को नजरअंदाज कर दुनिया अपने विनाश को आमंत्रित कर रही है। दरअसल हम समझना ही नहीं चाहते कि पहाड़ों का सीना चीरकर हरे-भरे जंगलों को तबाह कर हम कंक्रीट के जो जंगल विकसित कर रहे हैं, वह वास्तव में विकास नहीं है बल्कि विकास के नाम पर हम अपने ही विनाश का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। प्रकृति कभी समुद्री तूफान तो कभी भूकम्प, कभी सूखा तो कभी अकाल के रूप में अपना विकराल रूप दिखाकर हमें बारम्बार चेतावनी देती रही है कि हम यदि इसी प्रकार प्राकृतिक संसाधनों का बुरे तरीके से दोहन करते रहे तो हमारे भविष्य की तस्वीर कैसी होने वाली है। यदि हम अभी भी नहीं संभले और हमने प्रकृति से साथ खिलवाड़ बंद नहीं किया तो हमें आने वाले समय में इसके खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

- योगेश कुमार गोयल
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, पर्यावरण विषयों के जानकार और ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ पुस्तक के लेखक हैं)

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Fact Check: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में नेमार और लियोनेल मेसी के आमने-सामने आने का वीडियो AI निर्मित

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 से जोड़कर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच मैच चल रहा है। मैच में नेमार और लियोनेल मेसी आमने-सामने हैं। लियोनेल मेसी नेमार को […]

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  Sports

Devdutt Padikkal का Sri Lanka में शतक, Team India के लिए No. 3 का दावा मजबूत

श्रीलंका के खिलाफ भारत की आगामी टेस्ट सीरीज़ से पहले देवदत्त पडिक्कल ने शनिवार को कोलंबो में चल रहे तीन दिवसीय वार्म-अप मैच में श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ शानदार शतक लगाकर अपनी मज़बूत दावेदारी पेश की। यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद नंबर 3 पर बैटिंग करने आए बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने 121 गेंदों पर 103 रन बनाए, जिसमें 14 बाउंड्री शामिल थीं। शतक पूरा करने के बाद पडिक्कल 'रिटायर्ड आउट' हो गए।
 

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भारत की पारी की शुरुआत मुश्किल रही क्योंकि जायसवाल दूसरी ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद केएल राहुल ने 67 गेंदों पर 40 रन की संयमित पारी खेली, लेकिन आउट होने से पहले पडिक्कल ने यह सुनिश्चित किया कि भारत शुरुआती झटके से उबर सके। पडिक्कल को राहुल के रूप में एक अच्छा साथी मिला और फिर उन्होंने रवींद्र जडेजा के साथ अपनी पारी आगे बढ़ाई। कर्नाटक के इस बल्लेबाज ने तेज और स्पिन दोनों तरह की गेंदबाजी के खिलाफ अच्छा नियंत्रण दिखाया और 40वें ओवर में रमेश मेंडिस की गेंद पर चौका लगाकर अपना शतक पूरा किया।

पडिक्कल का शतक भारत के लिए एक अहम समय पर आया है, क्योंकि पैर की चोट के कारण आने वाली टेस्ट सीरीज़ के लिए बी साई सुदर्शन का खेलना अभी पक्का नहीं है। सुदर्शन को भारत की टीम में शामिल तो किया गया है, लेकिन उनका खेलना उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा। अगर वह सीरीज़ के पहले मैच में नहीं खेल पाते हैं, तो नंबर 3 की पोज़िशन के लिए पडिक्कल के नाम पर विचार किया जा सकता है।

पडिक्कल पहले ही भारत के लिए दो टेस्ट मैच खेल चुके हैं, और दोनों ही 2024 में खेले गए थे। उन्होंने धर्मशाला में इंग्लैंड के खिलाफ़ अपना टेस्ट डेब्यू किया था और अपनी पहली पारी में 65 रन बनाए थे। इसके बाद, उन्होंने 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ मैच खेला था। अपने दो टेस्ट मैचों में, पडिक्कल ने तीन पारियों में कुल 90 रन बनाए हैं। 26 साल के इस खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में भी खूब रन बनाए हैं। 2025-26 रणजी ट्रॉफी सीज़न के दौरान, पडिक्कल ने 60.33 की औसत से 543 रन बनाए और सेमीफ़ाइनल में उत्तराखंड के ख़िलाफ़ अपने करियर का बेस्ट स्कोर 232 रन बनाया।
 

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विजय हजारे ट्रॉफी में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जिसमें उन्होंने 90.62 की औसत से 725 रन बनाए। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने 167.02 के स्ट्राइक रेट से 309 रन बनाए। पडिक्कल ने इस साल की शुरुआत में श्रीलंका में इंडिया A का भी प्रतिनिधित्व किया और गाले में श्रीलंका A के ख़िलाफ़ अनौपचारिक टेस्ट मैचों की तीन पारियों में दो अर्धशतक लगाए।
 
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Sat, 08 Aug 2026 19:18:06 +0530

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